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Analysis: कितने ताकतवर हैं लेउवा और कदवा पाटीदार, गुजरात की राजनीति में क्‍यों हैं अहम

Analysis: कितने ताकतवर हैं लेउवा और कदवा पाटीदार, गुजरात की राजनीति में क्‍यों हैं अहम

गुजरात के 17वें मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र पटेल पाटीदार समुदाय के पांचवें नेता है, जिन्‍होंने मुख्‍यमंत्री की कुर्सी संभाली है.

गुजरात के 17वें मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र पटेल पाटीदार समुदाय के पांचवें नेता है, जिन्‍होंने मुख्‍यमंत्री की कुर्सी संभाली है.

भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) पाटीदार समुदाय (Patidar community) से आने वाले पांचवें नेता हैं जिन्‍हें बीजेपी ने गुजरात (Gujarat) का मुख्‍यमंत्री बनाया है. गुजरात की राजनीति में पाटीदार समुदाय का अहम रोल रहता है, यही कारण है कि हर पार्टी इस समुदाय को नाराज नहीं करना चाहती हैं.

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  • News18Hindi
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    अहमदाबाद. गुजरात (Gujarat) के 17वें मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) पाटीदार समुदाय (Patidar community) के पांचवें नेता है, जिन्‍होंने मुख्‍यमंत्री की कुर्सी संभाली है. भूपेंद्र पटेल पाटीदारों के कदवा पटेल उप-जाति से आते है. गुजरात की राजनीति में पाटीदार समाज का इतना अहम रोल क्‍यों है कि हर पार्टी पाटीदार समाज का ही मुख्‍यमंत्री बनाना चाहती है.

    आइए जाते हैं कौन हैं लेउवा और कदवा पाटीदार. जिन्‍होंने दशकों से गुजरात की राजनीति में अहम भूमिका निभाई है? ‘पाटीदार’ शब्द का अर्थ है, वह जो भूमि की एक पट्टी का मालिक है. मध्यकालीन भारत में इस समुदाय के सदस्य अधिक मेहनती किसानों में से थे. आजादी के बाद, जब काश्तकारों को भूमि-स्वामित्व का अधिकार मिला तो पाटीदार प्रमुख कृषि भूमि के बड़े हिस्से के मालिक बन गए.
    परंपरागत रूप से भूमि-स्वामित्व वाले समुदाय, कारोबार और जोखिम उठाने में भी सबसे आगे देखे जाते हैं. कुछ पाटीदारों ने 1970 और 1980 के दशक में उद्योग में कदम रखा और समय के साथ व्यापार और व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण दबदबा कायम किया. कई लोगों ने देश छोड़ दिया. अमेरिका, ब्रिटेन और अफ्रीका में रह रहे गुजराती प्रवासियों में पाटीदार समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा है.

    गुजरात की 6.5 करोड़ आबादी में लगभग 1.5 करोड़ पाटीदारों के होने का अनुमान है. माना जाता है कि ओबीसी कोली पाटीदारों की तुलना में अधिक हैं, लेकिन समुदाय कई उप-जातियों में विभाजित है, और राजनीतिक लाभ के लिए अपनी संख्या का लाभ उठाने में असमर्थ रहा है. इसके विपरीत पाटीदारों में समुदाय और राजनीतिक क्षेत्र दोनों की भावना प्रबल रही है. भले ही दो प्रमुख उप-जातियों, कदवा और लेउवा के रीति-रिवाज और सामाजिक मानदंड अलग-अलग हैं, लेकिन उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक एक ही राजनीतिक समूह के रूप में मतदान किया है.

    लेउवा और कदवा पाटीदार
    पाटीदार या पटेल भगवान राम के वंशज होने का दावा करते हैं. लेउवा और कदवा राम के जुड़वां बेटों लव और कुश के वंशज होने का दावा करते हैं. लेउवा खोदल माँ को अपने कुल देवता के रूप में पूजते हैं जबकि कदवा पाटीदार उमिया माता की पूजा करते हैं. राज्य के पूर्व में आदिवासी बेल्ट को छोड़कर, उत्तरी गुजरात, सौराष्ट्र, मध्य गुजरात और दक्षिण गुजरात के सूरत में पाटीदार पूरे गुजरात में फैले हुए हैं. सामुदायिक बंधनों को मजबूत रखने के लिए, पाटीदार अपने उप-समूहों के भीतर विवाह करना पसंद करते हैं. लेउवा पटेलों की संख्या कदवाओं से मामूली अधिक है. वे सौराष्ट्र और मध्य गुजरात पर हावी हैं. उत्तर गुजरात में कदवा प्रमुख समुदाय हैं.

    गुजरात में पाटीदार मुख्‍यमंत्री की है लंबी लिस्‍ट
    कांग्रेस नेता दिवंगत चिमनभाई पटेल गुजरात के पहले पाटीदार मुख्यमंत्री थे. चिमनभाई पटेल ने जुलाई 1973 में पहली बार मुख्‍यमंत्री पद ग्रहण किया था. उन्होंने फरवरी 1974 में ‘नवनिर्माण आंदोलन’ के परिणामस्वरूप इस्तीफा दे दिया था, जो कॉलेज के छात्रों द्वारा छात्रावास भोजन बिल में वृद्धि के खिलाफ शुरू किया गया एक आंदोलन था.

    चिमनभाई पटेल अक्‍टूबर 1990 में एक बार फिर गुजरात के मुख्‍यमंत्री बने और साल 1994 तक इस पद पर बने रहे. जनता मोर्चा और जनता पार्टी के नेता दिवंगत बाबूभाई जसभाई पटेल ने भी दो बार मुख्यमंत्री का पद संभाला. उनका पहला कार्यकाल जून 1975 से मार्च 1976 के बीच था. उन्होंने अप्रैल 1977 से फरवरी 1980 तक फिर से पद ग्रहण किया.

    दिवंगत केशुभाई पटेल गुजरात में भाजपा के पहले मुख्‍यमंत्री थे. केशुभाई पटेल ने साल 1995 में विधानसभा चुनावों में बड़ी जीत हासिल करते हुए मुख्‍यमंत्री पद ग्रहण किया था. हालांकि उन्‍होंने सात महीने में ही अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था क्‍योंकि पार्टी के सहयोगी शंकरसिंह वाघेला ने उनके खिलाफ विद्रोह कर दिया था. वाघेला भाजपा की जीत के बाद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे.

    इसके बाद साल 1998 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने केशुभाई पटेल के नेतृत्‍व में एक बार फिर चुनाव लड़ा और सत्‍ता में लौटी. इस जीत के बाद केशुभाई पटेल को एक बार फिर मुख्‍यमंत्री बनाया गया. हालांकि, खराब सेहत की वजह उन्‍होंने अक्टूबर 2001 में समय से पहले इस्तीफा दे दिया. इसके बाद गुजरात के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 तक यह पद को संभाला.

    Tags: Bhupendra Patel, Gujarat, Gujarat news

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