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ANALYSIS: AAP के लिए आसान नहीं होगी दिल्ली में मुफ्त योजनाओं की डगर

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Updated: February 12, 2020, 1:20 PM IST
ANALYSIS: AAP के लिए आसान नहीं होगी दिल्ली में मुफ्त योजनाओं की डगर
अरविंद केजरीवाल सरकार के सामने मुफ्त योजनाओं को जारी रखने में पेश आ सकती हैं मुश्किलें.

क्‍या आप का मुफ्त योजनाओं का मॉडल टिकाऊ है या समय के साथ लोगों को मुफ्त बिजली-पानी मिलना बंद हो जाएगा? क्‍या मुफ्त योजनाओं के कारण राज्‍य की राजकोषीय हालत खराब हो जाएगी? जानें दिल्ली का आर्थिक हाल...

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  • Last Updated: February 12, 2020, 1:20 PM IST
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नई दिल्‍ली. आम आदमी पार्टी ने लगातार दूसरी बार दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2020 (Delhi Assembly Election 2020) में अपनी सबसे नजदीकी प्रतिद्वंद्वी बीजेपी (BJP) को करारी शिकस्‍त दी है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने 70 सदस्‍यीय दिल्‍ली विधानसभा में 62 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, बीजेपी को 8 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है. अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) 16 फरवरी को तीसरी बार मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेंगे. शपथ ग्रहण समारोह रामलीला मैदान में किया जाएगा. इस बीच आम के विरोधी और खासकर बीजेपी के कुछ नेता बार-बार दलील दे रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल ने राजकोष को बर्बाद करने वाली मुफ्त योजनाओं के दम पर मतदाताओं को लुभाया.

क्‍या दिल्‍ली के लोगों को मुफ्त बिजली-पानी मिलना होगा बंद
आम आदमी पार्टी के समर्थक इसके उलट दलील दे रहे हैं कि केजरीवाल सरकार ने शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर देकर सुशासन का नया मॉडल पेश किया है. यही नहीं, आप के शासनकाल में दिल्‍ली न सिर्फ तेजी से बढ़ रही है बल्कि राज्‍य की आर्थिक वृद्धि राष्‍ट्रीय औसत से ज्‍यादा है. साथ ही देश की जीडीपी (GDP) में भी दिल्‍ली की हिस्‍सेदारी बढ़ी है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर कौन सच बोल रहा है. क्‍या आप का मुफ्त योजनाओं का मॉडल टिकाऊ है या समय के साथ लोगों को मुफ्त बिजली-पानी मिलना बंद हो जाएगा? क्‍या मुफ्त योजनाओं के कारण राज्‍य की राजकोषीय हालत खराब हो जाएगी?

2015 के बाद से आप सरकार ने शुरू कीं कई मुफ्त योजनाएं

केजरीवाल सरकार ने हाल में दिल्‍ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा (Free Bus Ride) की योजना शुरू की थी. इससे पहले दिल्‍ली में 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और 400 यूनिट तक 50 फीसदी भुगतान की योजना लागू की गई थी. सबसे बड़ी बात 5 साल से ज्‍यादा समय से दिल्‍ली में बिजली की दरों (Electricity Tariffs) में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है. इस कारण इस समय दिल्‍ली में सभी मेट्रो शहरों के मुकाबले बिजली सबसे कम दरों पर उपलब्‍ध कराई जा रही है. एक महीने में एक परिवार को 20,000 लीटर तक मुफ्त पानी देने की घोषणा भी आप सरकार ने ही की थी. निजी स्‍कूलों की फीस वृद्धि पर अंकुश लगाया गया. साथ ही निजी स्‍कूलों में 25 फीसदी सीटें वंचित वर्ग के लिए आरक्षित की गईं. 12वीं पास करने वाले छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए 10 लाख रुपये तक के लोन की योजना शुरू की. स्‍टूडेंट्स को ये लोन 15 साल में चुकाने की सुविधा दी गई है.

दिल्‍ली के मतदाताओं ने सीएम अरविंद केजरीवाल के काम और योजनाओं को हाथों-हाथ लिया है.


स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं पर रहा केजरीवाल सरकार का खासा जोरदिल्‍ली की आप सरकार ने 200 मोहल्‍ला क्‍लीनिक (Mohalla Clinic) में मुफ्त उपचार, दवाइयां और टेस्‍ट सुविधा मुहैया कराई. इसके अलावा चुने हुए अस्‍पतालों में मुफ्त सर्जरी की व्‍यवस्‍था शुरू की. वहीं, सड़क दुर्घटना (Road Accident) में इलाज पर होने वाला पूरा खर्च दिल्‍ली सरकार उठाती है. हर श्रमजीवी के लिए न्‍यूनतम आय 9,500 रुपये से बढ़ाकर 14,000 रुपये की. साथ ही स्‍कूलों में गेस्‍ट टीचर्स का वेतन, आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं के पारिश्रमिक में वृद्धि की गई. वहीं, वरिष्‍ठ नागरिकों, दिव्‍यांगों और वंचित महिलाओं की पेंशन में बढ़ोतरी की. वहीं, दिल्‍ली से 10वीं और 12वीं पास करने वाले स्‍टूडेंट्स को कोचिंग के लिए 1 लाख रुपये तक उपलब्‍ध कराने की सुविधा शुरू की. इसके अलावा सरकारी स्‍कूलों में कक्षा 9 से 12वीं तक की शिक्षा भी मुफ्त की.

दिल्‍ली सरकार की ओर से इन क्षेत्रों में बढ़ाया गया खर्च
दिल्‍ली सरकार ने शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं पर खर्च में जबरदस्‍त बढ़ोतरी की. अब सवाल ये है कि क्‍या इन मुफ्त योजनाओं से दिल्‍ली का खजाना खाली हो सकता है? इसका जवाब है कि आम आदमी पार्टी के शासनकाल में शेष देश के औसत से ही नहीं, दिल्‍ली की पिछली सरकारों के मुकाबले भी खजाने की स्थिति ज्‍यादा काबू में रही है. मौजूदा वित्‍त वर्ष में दिल्‍ली के खजाने पर कुछ ज्‍यादा असर पड़ा है. बावजूद इसके देश के किसी भी दूसरे राज्‍य के मुकाबले राजकोषीय घाटा सबसे कम रहा है. आप सरकार ने राजस्‍व संतुलन के मामले में भी अच्‍छा प्रदर्शन किया है. छूट और मुफ्त योजनाओं के चलते राजस्‍व खर्च अप्रत्‍याशित तरीके से बढ़ता है. ऐसे में राजस्‍व को बढ़ाना मुश्किल हो जाता है. इसके उलट केजरीवाल सरकार राजस्‍व संतुलन यानी सरकारी की ओर से किए खर्च और हुई आमदनी में संतुलन के जरिये राजस्‍व को बढ़ाने में कामयाब हुई.

आप सरकार ने शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र पर खर्च काफी तेजी से बढ़ाकर लोगों की सहूलियतों को बढ़ाया. (स्रेात: आरबीआई)


अगर सब अच्‍छा है तो चिंता की जरूरत ही क्‍या है
अगर आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो दिल्‍ली का राजस्‍व अधिशेष (Revenue Surplus) हर गुजरते हुए साल के साथ नीचे आ रहा है. वहीं, राजकोषीय घाटा धीमे-धीमे बढ़ता जा रहा है. आम आदमी पार्टी के पूरे शासनकाल में रिवेन्‍यु सरप्‍लस ग्रॉस स्‍टेट डॉमेस्टिक प्रोड्यूस (GSDP) के 1.6 फीसदी से घटकर 0.6 फीसदी पर पहुंच गया है. दिल्‍ली सरकार को अलग-अलग टैक्‍स से हुई आमदनी 2015-16 में जीएसडीपी की 5.49 फीसदी थी, जो 2018-19 में घटकर 4.95 फीसदी रह गई है्. इस गिरावट के बावजूद दिल्‍ली सरकार का कुल राजस्‍व जीएसटी भरपाई (GST Compensation) के कारण लगभग बराबर रहा. इसके बाद भी टैक्‍स से राज्‍य को होने वाली आमदनी का घटना मुफ्त योजनाओं के लिए खतरे की घंटी का काम कर रहा है.

नए स्‍कूल और अस्‍पताल  बनाने पर करना होगा खर्च
दिल्‍ली सरकार को टैक्‍स से होने वाली आय में कमी के अलावा आप की नीतियों के कारण राज्‍य के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को भी नुकसान हुआ. नए स्‍कूल और अस्‍पताल बनाने पर होने वाले खर्च में कमी आई है. साल 2011-12 इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर पर दिल्‍ली की जीएसडीपी का 1.16 फीसदी खर्च किया गया. ये खर्च आप के शासनकाल के दौरान 2018-19 तक घटकर 0.54 फीसदी रह गया. अब अगर सरकार पहले से मौजूद स्‍कूलों और अस्‍पतालों पर ही खर्च करती रही तो आने वाले समय में बोटलनेक जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बना रहेगा. ऐसे में दिल्‍ली सरकार को अपनी सभी योजनाओं को चालू रखने के लिए रिवेन्‍यु बढ़ाने और नए स्‍कूल-अस्‍पताल बनाने पर ध्‍यान देना जरूरी होगा. हालांकि, ये सब अरविंद केजरीवाल सरकार के लिए आसान नहीं होगा.

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First published: February 12, 2020, 12:50 PM IST
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