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Analysis: पीएम मोदी और शी जिनपिंग की इस मुलाकात के क्या हैं मायने?

News18Hindi
Updated: October 12, 2019, 9:47 AM IST
Analysis: पीएम मोदी और शी जिनपिंग की इस मुलाकात के क्या हैं मायने?
महाबलीपुरम में बैठक करते पीएम मोदी और शी जिनपिंग

तमिलनाडु (Tamilnadu) स्थित महाबलीपुरम (Mahabalipuram) में पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और चीन (China) के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के बीच मुलाकात के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं.

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  • Last Updated: October 12, 2019, 9:47 AM IST
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अनूप गुप्ता.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और चीन(China) के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के बीच चेन्नई के महाबलीपुरम में मुलाक़ात हुई. इस मुलाकात ने एक तरफ जहां दुनिया के लोगों का इस बात पर ध्यान खींचा कि कश्मीर और डोकलाम समस्या को लेकर एशिया के दो बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्षो के बीच क्या बात हुई.

इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेशषभूषा भी आकर्षण का केंद्र रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ये मुलाक़ात पूरी तरह अनौपचारिक थी. लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी और शी जिंगपिंग के बीच की केमिस्ट्री देखने वाली थी.

पीएम नरेंद्र मोदी की वेशभूषा और तमिलनाडु राज्य में समुद्र किनारे स्थित ऐतिहासिक महाबलीपुरम लोगों को कई संदेश देते हैं. शी जिनपिंग से पीएम मोदी की मुलाक़ात के लिए महाबलीपुरम को ही क्यों चुना गया? ये ऐसा सवाल है, जिस पर राजनीतिक विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है.

सवाल ये है कि महाबलीपुरम को इस मुलाक़ात के लिए चुनने के पीछे कोई राजनयिक महत्व है या फिर राजनीतिक नफा नुकसान. क्या ये भी संभव है की तमिलों को लुभाने के लिए ऐसा किया गया है.

भारत अपनी विदेश नीति में थोड़ी तब्दीली कर रहा है...
कहा ये जा रहा है कि भारत अपनी विदेश नीति में थोड़ी तब्दीली करते हुए, सार्क देशों की तुलना में बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहता है. भारत बंगाल की खाड़ी में भी अपना दबदबा दिखाना चाहता है.
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इसीलिए उसने बंगाल की खाड़ी के पास के क्षेत्र को चुना है. चीन को भारत का ये दबदबा दिखाने का अच्छा मौका था, जिसको बखूबी अंजाम दिया गया, क्योंकि चीन भी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव जमाने की जुगत में है.

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की राय इससे काफी अलग है. महाबलीपुरम को वार्ता के लिए चुनना और पीएम के वेशभूषा पूरी तरह तमिलों को संदेश देने के लिए है. जानकारों का मानना है कि बीजेपी तमिलनाडु के लोगों को आकर्षित करना चाहती है. यह केवल उसी का एक हिस्सा है.

आमतौर पर तमिलनाडु में इस तरह की बैठक अब तक नही हुई है. इस बैठक के सहारे प्रधानमंत्री केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि तमिलों और तमिलनाडु की अहमियत केंद्र के लिए कितनी बड़ी है.

पीएम की वेशभूषा इस बात को स्पष्ट करने के लिए काफी है. पीएम ने आज तमिलनाडु की पारंपरिक वेशभूषा लुंगी, शर्ट और अंगवस्त्र धारण किये हुए थे, जो सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहे.

महाबलीपुरम का महत्व
तमिलनाडु में बंगाल की खाड़ी किनारे स्थित महाबलीपुरम शहर चेन्नई से करीब 60 किमी दूर है. इस नगर की स्थापना धार्मिक उद्देश्यों से सातवीं सदी में पल्लव वंश के राजा नरसिंह देव बर्मन ने करवाई थी.

महाबलीपुरम का संबंध चीन से भी जुड़ा हुआ है, ऐतिहासिक शोध के मुताबिक महाबलीपुरम से चीनी, फारसी और रोम के प्राचीन सिक्के बड़ी संख्या में मिले हैं. इतिहास को खंगाले तो पता चलता है कि महाबलीपुरम और चीन का संबंध करीब 2000 साल पुराना है.

महाबलीपुरम में व्यापार के लिए बड़ी संख्या में चीनी व्यापारी आया करते थे. महाबलीपुरम के पास में ही स्थित कांचीपुरम में 7वीं सदी में पल्लव शासन के दौरान चीनी यात्री ह्वेन सांग आए थे. जिन्होंने अपनी किताब में दक्षिण भारत की भव्यता और चीनी संबंधों का वर्णन किया था.

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First published: October 11, 2019, 11:49 PM IST
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