Analysis: बीजेपी आखिर क्यों नहीं चुन पा रही है अपना नया अध्यक्ष?

बीजेपी के इतिहास में उसके अध्यक्ष को लेकर मीडिया के साथ-साथ आम लोगों में इतना कौतूहल कभी नहीं रहा. जिस तरह पार्टी ने पश्चिम बंगाल में ममता का किला दरका दिया है ऐसे में पार्टी संगठन में इतने बड़े फेरबदल पर फैसला लेना प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के लिए आसान नहीं है.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 2:41 PM IST
Analysis: बीजेपी आखिर क्यों नहीं चुन पा रही है अपना नया अध्यक्ष?
बीजेपी के लिए आसान नहीं है दूसरा अमित शाह तलाशना
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 2:41 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के गृहमंत्री बनने के बाद बीजेपी की कमान किसके हाथ में होगी, इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. मीडिया में अलग-अलग तरह की खबरें आ रही हैं. कहीं यह दावा किया जा रहा है कि अमित शाह अभी पद नहीं छोड़ रहे हैं, तो कहीं उनके उत्तराधिकारी के रूप में जेपी नड्डा, भूपेंद्र यादव और कैलाश विजयवर्गीय जैसे नाम चर्चा में हैं. बीजेपी के इतिहास में उसके अध्यक्ष को लेकर मीडिया के साथ-साथ आम लोगों में इतना कौतूहल कभी नहीं रहा. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष तलाशना इतना मुश्किल क्यों है? इस सवाल के जवाब के लिए अमित शाह के पहले और बाद की बीजेपी को समझना पड़ेगा.

पहली बार पूर्ण बहुमत के आंकड़े को छूने वाली बीजेपी को 5 साल बाद 300 पार ले जाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी का ही कमाल माना जाता है.




अमित शाह ने बीजेपी को कितना बदला
अमित शाह अगस्‍त 2014 से बीजेपी के अध्‍यक्ष हैं. उन्होंने न सिर्फ भारत के सियासी नक्शे को भगवामय किया है, बल्कि बीजेपी को 10 करोड़ सदस्‍यों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भी बनवाया है. इसके पीछे उनकी रणनीति और मेहनत है. 2016 के विधानसभा चुनावों में असम, त्रिपुरा में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी. यही नहीं केरल, ओडिशा, पश्‍चिम बंगाल तथा तमिलनाडु में भी मजबूती से उभरी.


शाह की अध्यक्षता में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत से 2019 का चुनाव भी जीत लिया. इसलिए कोई भी इससे इनकार नहीं कर रहा है कि बीजेपी के अब तक के शानदार सफर के सबसे बड़े सेनानी अमित शाह ही हैं. पहली बार पूर्ण बहुमत के आंकड़े को छूने वाली बीजेपी को 5 साल बाद 300 पार ले जाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी का ही कमाल माना जाता है.


नए अध्यक्ष के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
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अमित शाह ने बीजेपी को जिस मुकाम पर पहुंचाया है, उससे आगे ले जाना आसान नहीं है, क्योंकि आने वाली चुनौती पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विस्तार है. इन राज्यों में बीजेपी अपनी स्थापना के बाद से अब तक अपने लिए जमीन नहीं तलाश पाई है. ऐसे में पार्टी के नए अध्यक्ष के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और संघ तीनों से तालमेल रखना भी बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि तीनों के तालमेल के बिना इन राज्यों में बीजेपी का विस्तार संभव नहीं है.

बीजेपी के नए अध्यक्ष के लिए प्रधानममंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और संघ तीनों से तालमेल रखना भी बड़ी चुनौती होगी


बीजेपी के लिए आसान नहीं है दूसरा अमित शाह तलाशना
वरिष्ठ पत्रकार अंबिका नंद सहाय का मानना है कि जनसंघ से लेकर बीजेपी तक अमित शाह जैसा संगठन को समर्पित अध्यक्ष पहली बार मिला है, जिसका असर पार्टी पर साफ-साफ दिखता है. अमित शाह जिस तरह साल के 365 दिन और 24 घंटे पार्टी के लिए अपना शत-प्रतिशत देते हैं, उसका कोई दूसरा उदाहरण किसी भी संगठन में देखने को नहीं मिला.

सहाय आगे बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बीच जैसा तालमेल है, वैसा इसके पहले किसी पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री में देखने को नहीं मिला. इसके साथ ही इन संबंधों का पार्टी के सगंठन पर हमेशा साकारात्मक असर रहा है. ऐसे में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमित शाह का विकल्प तलाशना है, क्योंकि पार्टी संविधान लगातार 2 बार से ज्यादा अध्यक्ष रहने की इजाजत नहीं देता.

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वरिष्ठ पत्रकार सहाय का मानना है कि बीजेपी अध्यक्ष के लिए मीडिया में जो नाम आ रहे हैं, उनसे अमित शाह की तुलना करना सूरज को दिया दिखाने जैसा है. चाहें वो संगठन पर पकड़ की बात हो या प्रधानमंत्री मोदी से तालमेल रखने की बात, फिलहाल बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में अमित शाह की तुलना में उनके आस-पास भी कोई नाम दिखाई नहीं देता.


ऐसे में जब बीजेपी पश्चिम बंगाल और दक्षिण में अपने विस्तार में लगी है. पार्टी और सरकार में तालमेल बहुत जरूरी है. जिस तरह पार्टी ने पश्चिम बंगाल में ममता का किला दरका दिया है ऐसे में पार्टी संगठन में इतने बड़े फेरबदल पर फैसला लेना प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के लिए आसान नहीं है.

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