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महिलाओं के खिलाफ अपराध मामलों का निपटारा 21 दिन में जरूरी बनाने वाले कानून को मंजूरी

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Updated: December 11, 2019, 11:38 PM IST
महिलाओं के खिलाफ अपराध मामलों का निपटारा 21 दिन में जरूरी बनाने वाले कानून को मंजूरी
आंध्रप्रदेश ने हैदराबाद गैंगरेप मामले के बाद एक विशेष कानून बनाया है (न्यूज18 क्रिएटिव)

यह कानून, आंध्र प्रदेश अपराध कानून में एक संशोधन होगा जिसे “आंध्र प्रदेश दिशा कानून” (AP Disha Act) नाम दिया गया है. पड़ोस के तेलंगाना में हाल ही में बलात्कार और हत्या (Rape and Murder) का शिकार हुई महिला पशु चिकित्सक (Female Veterinary Doctor) की याद में यह कानून लाया जा रहा है.

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  • Last Updated: December 11, 2019, 11:38 PM IST
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अमरावती. आंध्र प्रदेश कैबिनेट (Andhra Pradesh Cabinet) ने बुधवार को उस मसौदा कानून को स्वीकृति दे दी जो महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों (cases of atrocities against women) का निपटारा 21 दिन में करने और दोषियों के लिए सजा-ए-मौत को अनिवार्य बनाता है.

यह कानून, आंध्र प्रदेश अपराध कानून (AP Criminal Law) में एक संशोधन होगा जिसे “आंध्र प्रदेश दिशा कानून” (AP Disha Act) नाम दिया गया है. पड़ोस के तेलंगाना में हाल ही में बलात्कार और हत्या का शिकार हुई महिला पशु चिकित्सक की याद में यह कानून लाया जा रहा है.

इस कानून में बलात्कार के खिलाफ मौत की सजा का प्रावधान
इसके अलावा एक अन्य मसौदा कानून को भी मंजूरी दी गई जो महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए विशेष अदालतों के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगा. सरकारी सूत्रों की मानें तो यह दोनों विधेयक राज्य विधानसभा के जारी शीतकालीन सत्र (Winter session) में पेश किए जा सकते हैं.

प्रस्तावित ‘आंध्र प्रदेश दिशा अधिनियम’ के तहत, बलात्कार (Rape) के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है.

अदालतों के लिए 14 दिनों में मुकदमा पूरा करने का प्रावधान
संशोधित कानून, ऐसे मामलों में जहां संज्ञान लेने लायक साक्ष्य उपलब्ध हों, जांच को सात दिनों में पूरी करने और अगले 14 दिनों में अदालत से मुकदमा (Case) चलाने का प्रावधान करता है ताकि 21 दिनों के भीतर सजा दी जा सके.मौजूदा कानून ऐसे मामलों में मुकदमा चलाने के लिए चार महीने का समय देता है. मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी (YS Jagan Mohan Reddy) की अध्यक्षता में कैबिनेट ने,“महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ निर्दिष्ट अपराध के लिए आंध्र प्रदेश विशेष अदालत कानून, 2019’ के मसौदे को भी स्वीकृति दी.

पॉक्सो कानून के तहत भी 10 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान
इस कानून के तहत, सभी 13 जिलों में विशेष अदालतें गठित की जाएंगी जो बलात्कार (Rape), यौन उत्पीड़न, तेजाब हमला और सोशल मीडिया के जरिए उत्पीड़न जैसे महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में मुकदमा चलाएंगी.

अपराध की गंभीरता को देखते हुए, इस कानून में पॉक्सो कानून (POCSO Act) के तहत मिलने वाली सजा के साथ ही 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है.

SC गैंगरेप पीड़िता के मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश को सौंपने पर कर रहा विचार
वहीं उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने बुधवार को कहा कि वह तेलंगाना में पशु चिकित्सक से सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले के चारों आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की जांच के लिये शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त करने पर विचार कर रहा है.

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, ‘‘हम इस तथ्य के प्रति सचेत हैं कि तेलंगाना उच्च न्यायालय ने इस घटना का संज्ञान लिया है.’’ पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत सिर्फ यही चाहती है कि उच्चतम न्यायालय के दिल्ली में रहने वाले किसी पूर्व न्यायाधीश को इस मामले की जांच करनी चाहिए.

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First published: December 11, 2019, 11:38 PM IST
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