आंध्र प्रदेश: किन वजहों से फैली रहस्यमयी बीमारी? CM जगन मोहन रेड्डी ने दिए वास्तविक कारण पता लगाने के निर्देश

अधिकारियों ने आशंका जताई है कि इस बीमारी से ग्रस्त मरीज़ों के शरीर में लीड और निकेल की मौजूदगी का पता चला है (Pic- PTI)

Andhra Mysterious Illness: आंध्र प्रदेश के सीएम ने कहा कि वे इस बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाएं. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे इस बात पर अपना ध्यान केंद्रित करें कि कहीं यह बीमारी दूषित पानी के पीने की वजह से तो नहीं हुआ है या फिर इसके कोई अन्य कारण तो नहीं हैं.

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    अमरावती (एम बालाकृष्णा​). आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी (Y. S. Jaganmohan Reddy) ने शुक्रवार को एलुरु में फैली बीमारी को लेकर एक बैठक की और अधिकारियों को इस बीमारी के फैलने के कारणों का पता लगाने को कहा है. अपने अधिकारियों, डब्ल्यूएचओ, एम्स, एनआईएन, सीसीएमबी और आईआईसीटी के विशेषज्ञों के साथ बैठक में रेड्डी ने कहा कि इस जांच का जो भी परिणाम आएगा और इसको लेकर जैसा भी कदम उठाने का सुझाव दिया जाएगा वैसा कदम उठाया जाएगा.

    उन्होंने विशेषज्ञों से कहा कि वे इस बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाएं. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे इस बात पर अपना ध्यान केंद्रित करें कि कहीं यह बीमारी दूषित पानी के पीने की वजह से तो नहीं हुई है या फिर इसके कोई अन्य कारण तो नहीं हैं. उन्होंने इस बीमारी के व्यापक जांच का आदेश दिया है.

    किन कारणों से फैल रही है ये बीमारी?
    अधिकारियों ने आशंका जताई है कि इस बीमारी से ग्रस्त मरीज़ों के शरीर में लेड और निकेल की मौजूदगी का पता चला है और ऐसी आशंका है कि इसी वजह से यह बीमारी फैली हो. ऐसा इस क्षेत्र में कीटनाशकों के ज़रूरत से अधिक उपयोग के कारण हुआ होगा. अधिकारियों ने कहा कि अब इस बीमारी से ग्रस्त होने वाले मरीज़ों की संख्या में कमी आ रही है और मरीज़ 3-4 घंटे में ठीक हो रहे हैं. इस बीमारी के वास्तविक कारणों के बारे में कुछ और जांच और व्यापक विश्लेषणों के बाद ही पता चल पाएगा.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुरू की जांच
    इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञों ने कहा कि जिस क्षेत्र में लोग बीमार पड़े हैं उस क्षेत्र का वे सर्वेक्षण कर रहे हैं और यहां के लोग किस तरह का भोजन कर रहे हैं और उनके अन्य चिकित्सा विवरणों को वे दर्ज कर रहे हैं. दूसरी ओर, विशेषज्ञों को संदेह है कि कोविड की रोकथाम के तहत शुरू किए गए स्वच्छता कार्यक्रमों में प्रयुक्त हुई ब्लीचिंग और क्लोरीन के कारण भी यह बीमारी फैली होगी.

    डॉक्टरों और एम्स, दिल्ली के विशेषज्ञों ने कहा कि अभी इस बीमारी को लेकर व्यापक जांच नहीं हुई है, लेकिन शुरुआती जांच में मरीज़ों के रक्त में लेड और निकेल की अधिक मात्रा पाई गई है और हो सकता है कि इस वजह से ही लोग बीमार पड़े हों. फिर, यह भी देखा गया है कि मरीज़ के बीमार पड़ने के 24 घंटे के भीतर ही उसके रक्त में लेड की मात्रा में भारी गिरावट हो जाती है. बैट्री की रीसाइक्लिंग या टूटे हुए बैटरीज जो फेंक देने की वजह से या उनको जला देने की वजह से भी इस तरह की स्थिति पैदा हो सकती है. विशेषज्ञों ने कहा कि वे पेयजल और दूध के नमूने की भी जांच कर रहे हैं और बहुत शीघ्र ही वे इस बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाएंगे.

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    कीटनाशक हो सकते हैं मुख्य कारण
    एम्स, मंगलगिरी के विशेषज्ञों ने कहा कि हो सकता है कि कीटनाशकों की वजह से कार्बनिक क्लोराइड प्रदूषित हो गया होगा, पर यह शुरुआती निष्कर्ष है और इस बारे में अभी सटीक निष्कर्ष आना बाक़ी है. एनआईएन, हैदराबाद के विशेषज्ञों ने कहा कि उन्होंने बीमार मरीज़ों के परिवार से खाद्य पदार्थ, पानी, दूध, पेशाब और रक्त का नमूना लिया है और बाज़ार से सब्ज़ियों और आवश्यक वस्तुओं के नमूने भी प्राप्त किए हैं. 'हम व्यापक जांच कर रहे हैं और अभी तक हमें किसी ख़तरे का कोई संकेत नहीं मिला है. हम पानी, खाद्य पदार्थों, दूध, पेशाब और रक्त के नमूने के जांच की रिपोर्ट शीघ्र देने वाले हैं.'



    इसी तरह, आईआईसीटी और सीसीएमबी के विशेषज्ञ भी इस स्थान पर लोगों के बीमार पड़ने की घटना की कई तरह से जांच कर रहे हैं ताकि इसके कारणों का पता लगाया जा सके. राज्य के मुख्य सचिव नीलम साहनी, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अनिल कुमार सिंघल, आंध्र प्रदेश चिकित्सा और इंफ़्रास्ट्रक्चर विकास निगम के अध्यक्ष डॉक्टर के चंद्रशेखर रेड्डी और एम्स, एनआईएन, आईआईसीटी, डब्ल्यूएचओ, सीसीएमबी एवं अन्य अधिकारी इस बैठक में मौजूद थे.

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