आंध्र प्रदेश: जजों के खिलाफ टिप्पणी के मामले में हाईकोर्ट ने दिए सीबीआई जांच के आदेश

इस मामले में सीजेआई को चिट्ठी भी लिखी गई है.
इस मामले में सीजेआई को चिट्ठी भी लिखी गई है.

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने सीबीआई को सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर कुछ न्यायाधीशों और न्यायपालिका के खिलाफ की गईं कथित अपमानजनक टिप्पणियों के मामले की जांच करने का निर्देश दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 9:05 AM IST
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अमरावती. आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने सीआईडी (CID) जांच पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया कि वह सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर कुछ न्यायाधीशों और न्यायपालिका के खिलाफ की गईं कथित अपमानजनक टिप्पणियों के मामले की जांच करे. जस्टिस राकेश कुमार और जस्टिस जे उमा देवी की पीठ ने सीबीआई को मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए.

अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की जांच पर नाराजगी जताई और कहा कि वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ मामला सिर्फ इसलिए दर्ज नहीं किया गया, ताकि उन्हें बचाया जा सके. कोर्ट  ने राज्य सरकार को जांच में सीबीआई का सहयोग करने का निर्देश दिया.

हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों और न्यायपालिका पर की गई टिप्पणियों का स्वत: संज्ञान लिया था. ये टिप्पणियां उन अदालती फैसलों को लेकर की गई थीं, जो राज्य सरकार के पक्ष में नहीं थे. हाईकोर्ट के निर्देश पर अदालत के रजिस्ट्रार जनरल ने सीआईडी में शिकायत दर्ज कराई थी और लोगों के नाम तथा संबंधित सबूत दिए थे. अदालत ने मामले में सीआईडी की जांच पर संतोष व्यक्त नहीं किया.



रेड्डी के इन आरोपों से सनसनी फैली
बता दें मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी के इन आरोपों से सनसनी फैल गई है कि सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ जज आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की बैठकों को तेलुगुदेशम पार्टी के पक्ष में प्रभावित कर रहे हैं. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली पार्टी ने इसे ‘ज्यादती’ बताया है और ‘न्यायपालिका के खिलाफ षड्यंत्र’ करार दिया है. मुख्यमंत्री ने भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एसए बोबडे को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट का इस्तेमाल 'मेरी लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर एवं अपदस्थ करने में किया जा रहा है.' रेड्डी ने सीजेआई से मामले पर गौर करने का आग्रह किया और 'राज्य न्यायपालिका की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त कदम उठाने' पर विचार करने के लिए कहा.



उधर तेलुगुदेशम पार्टी ने इन आरोपों को 'न्यायपालिका के खिलाफ जानबूझकर किया गया षड्यंत्र' बताकर इसे खारिज कर दिया और कहा कि इससे अधिक ज्यादती नहीं हो सकती है. तेदेपा पोलित ब्यूरो के सदस्य यनमाला रामाकृष्णुडु ने बयान जारी कर कहा कि जब आपकी सरकार के गैरकानूनी और असंवैधानिक कृत्यों से परेशान कोई व्यक्ति या संगठन अदालत से न्याय पाना चाहता है और अगर अदालत से राहत मिल जाती है तो आप उन पर आरोप कैसे लगा सकते हैं. उन्होंने दावा किया कि पत्र से रेड्डी की नायडू के खिलाफ ‘ईर्ष्या’ भी झलकती है. (भाषा इनपुट के साथ)
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