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ब्रिटेन से आंध्र पहुंची महिला कोरोना वायरस पॉजिटिव, नए स्ट्रेन के संक्रमण की पुष्टि

लगभग 70% तेजी से फैलने वाला ये बदला हुआ वायरस देश में 6 लोगों में मिला है.
लगभग 70% तेजी से फैलने वाला ये बदला हुआ वायरस देश में 6 लोगों में मिला है.

मेजबान कोशिका के भीतर वायरस (Virus) जब अपनी संख्या बढ़ाता है तो वायरस के स्वरूप में बदलाव आता है. इसे म्यूटेशन (Mutation) कहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 29, 2020, 7:42 PM IST
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अमरावती. ब्रिटेन से आंध्र प्रदेश के राजामहेंद्रवरम आई 47 वर्षीय महिला में नए प्रकार के कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण की पुष्टि हुई है, लेकिन राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि प्रदेश में नए वायरस का संक्रमण नहीं फैला है. राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त कतमनेनी भास्कर ने हैदराबाद के कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि ब्रिटेन (Britain) से लौटे 12 यात्रियों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी और इनमें से केवल महिला ही नए प्रकार के वायरस (Coronavirus) से संक्रमित पाई गई है.

भास्कर ने कहा, ‘‘महिला के बेटे में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई जबकि महिला के संपर्क में आया एक भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘राज्य में नए प्रकार के कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं फैला है. हम लगातार हालात की निगरानी कर रहे हैं और घबराने की बात नहीं है. मैं लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील करता हूं.’’

उन्होंने कहा, "हालिया दिनों में ब्रिटेन से 1432 लोग राज्य आए थे और उनमें से 1406 का पता लगा लिया गया है. हमने सभी नमूनों को जीनोम जांच के लिए हैदरबाद में सीसीएमबी के पास भेज दिया है. हमें 23 नमूनों के नतीजों का इंतजार है."



बता दें कि ब्रिटेन में हड़कंप मचा रहा कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन हमारे यहां पहुंच चुका है. लगभग 70% तेजी से फैलने वाला ये बदला हुआ वायरस 6 लोगों में मिला है, ये सभी लोग हाल ही में ब्रिटेन से लौटे थे. कोरोना वायरस में साल भर के भीतर 23 बार म्यूटेशन हुआ.

क्या है नया वायरस वेरिएंट
मेजबान कोशिका के भीतर वायरस जब अपनी संख्या बढ़ाता है तो वायरस के स्वरूप में बदलाव आता है. इसे म्यूटेशन कहते हैं. वायरस की कॉपीज बनने की प्रक्रिया में कभी-कभी गड़बड़ी आ जाती है. दूसरे वायरस पैदा करने के दौरान अगली पीढ़ी के लिए मूल जेनेटिक मटेरियल या कहें, कोड ट्रांसफर करने में गलती हो जाती है. ऐसे में जो नया वायरस पैदा होता है, उसमें जेनेटिक कोड अपनी पूर्व पीढ़ी से अलग होता है.
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