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एंग्री टैगोर: विश्व भारती यूनिवर्सिटी में यह पोस्टर बना प्रतिरोध का निशानी

News18Hindi
Updated: February 5, 2020, 4:05 AM IST
एंग्री टैगोर: विश्व भारती यूनिवर्सिटी में यह पोस्टर बना प्रतिरोध का निशानी
विश्व भारती यूनिवर्सिटी के एक पूर्व बांग्लादेशी छात्र ने 'एंग्री टैगोर' पोस्टर बनाई है.

वामपंथी छात्रों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों के एक वर्ग ने आरोप लगाया है कि विश्व भारती यूनिवर्सिटी (Visva Bharati University) के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती कैंपस में भगवा विचारधारा को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं

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  • Last Updated: February 5, 2020, 4:05 AM IST
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सुजीत नाथ

कोलकाता. करीब पांच साल पहले 'एंग्री हनुमान' (Angry Hanuman) का पोस्टर देश भर में चर्चित रहा था. तब इसे एक बड़े सामाजिक संकेत की तरह देखा गया था. वहीं अब पश्चिम बंगाल के विश्व भारती यूनिवर्सिटी 'एंग्री टैगोर' (Angry Tagore) का एक पोस्टर काफी तेजी से वायरल हो रहा है. इस पोस्टर को यूनिवर्सिटी में कथित रूप से मैनेजमेंट द्वारा कैंपस के भगवाकरण की कोशिशों के खिलाफ प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है. एंग्री हनुमान पोस्टर जहां केरल के एक युवा ग्राफिक डिजाइनर करण आचार्य ने बनाया था, वहीं 'एंग्री टैगोर' का पोस्टर विश्व भारती यूनिवर्सिटी (Visva Bharati University) के ही एक पूर्व बांग्लादेशी छात्र रिफत बिन सलाम रूपम ने बनाया है.

शांतिनिकेतन में स्थित है विश्व भारती यूनिवर्सिटी
विश्व भारती यूनिवर्सिटी एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में स्थित है. इसकी स्थापना रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी, जिन्होंने इसे विश्व भारती कहा था. विश्व भारती का अर्थ है भारत के साथ दुनिया का सामंजस्य.

कुलपति पर कैंपस में भगवा विचारधारा लागू करने की कोशिश का आरोप 
मुख्य रूप से वामपंथी छात्रों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों के एक वर्ग ने आरोप लगाया है कि कुलपति विद्युत चक्रवर्ती कैंपस में भगवा विचारधारा को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, जो विश्व भारती की भावना के खिलाफ है.

छात्रों और बुद्धिजीवियों के बीच सोशल मीडिया पर लोकप्रिय 'एंग्री टैगोर' पोस्टर में काले रंग की पोशाक पहने गुस्से में रवींद्रनाथ टैगोर को बाएं हाथ को पीछे और दाहिने हाथ को ऊंचा उठाते हुए 'स्टॉप' के साथ दिखाया गया है.न्यूज18 से बात करते हुए एसएफआई के बीरभूम जिला सचिवालय के सदस्य सोमनाथ सॉ ने कहा, 'पिछले कुछ हफ्तों से हम रवींद्रनाथ टैगोर की विचारधारा को दबाने के लिए विश्व भारती यूनिवर्सिटी के कुलपति के विभिन्न कदमों का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने बीजेपी नेताओं को नागरिकता के विवादास्पद मुद्दे पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया. मेरे सहयोगियों पर दक्षिणपंथी लोगों ने यूनिवर्सिटी हॉस्टल के अंदर हमला किया और फिर उन्होंने एक आधिकारिक पत्र जारी कर सभी को मीडिया के सामने नहीं बोलने के लिए कहा. ये सभी रवींद्रनाथ टैगोर की विचारधारा के खिलाफ हैं. इस गुस्से भरे पोस्टर से हम एक संदेश देना चाहते हैं कि टैगोर (यदि वह जीवित होते) भी हमारे विरोध में शामिल हो जाते.'

सोमनाथ सॉ ने कहा, 'एंग्री टैगोर का पोस्टर जनसंचार के पूर्व छात्र द्वारा बनाया गया और उसका नाम रिफत बिन सलाम रूपम है. वह बांग्लादेश से है. इस पोस्टर में एक भी शब्द न होते हुए भी बहुत मजबूत संदेश है. हम पहले ही अपने समूहों में प्रसारित कर चुके हैं और जल्द ही इस पोस्टर को कैंपस में लगाया जाएगा.'

एंग्री टैगोर पोस्टर के माध्यम से विरोध जता रहे हैं रिफत
एंग्री टैगोर का पोस्टर बनाने वाले रिफत ने कहा, 'मैं विश्व भारती यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनने को लेकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं. भले ही मैं 2019 में यूनिवर्सिटी से पास हो गया, लेकिन मैं अभी भी भावनात्मक रूप से टैगोर के इस 'गुरुकुल' से जुड़ा हुआ हूं. हाल के दिनों में मैंने देखा है कि यूनिवर्सिटी में कुछ मूल्यों और विचारधारा को लागू करने की कोशिश की जा रही है, जो 'टैगोर' के विचार नहीं हैं. मुझे बहुत दुख हुआ और इस एंग्री टैगोर पोस्टर के माध्यम से विरोध करने का फैसला किया.”

कुलपति की राजनीति ने कैंपस में अस्थिरता: रिफत
उन्होंने कहा, 'छात्र राजनीति, चर्चा और बहस किसी भी यूनिवर्सिटी में कोई नई बात नहीं है. लेकिन यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होता है, जहां छात्र, शिक्षक और कर्मचारी एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाते हुए विरोध करते हैं. दुर्भाग्य से वर्तमान कुलपति की राजनीति ने कैंपस में अस्थिरता पैदा कर दी है. छात्र असुरक्षा से महसूस कर रहे हैं, जो पूरी तरह से टैगोर के आदर्श के विपरीत है. यदि 'गुरुदेव' आज जीवित होते तो निश्चित रूप से इसका विरोध करते थे और वह छात्रों के साथ खड़े होते.'

पिछले कुछ सालों में भारत में स्ट्रीट आर्ट, दीवार चित्रों, मेहंदी (हीना) कला, कैरिकेचर के द्वारा विरोध हुए हैं. 'एंग्री हनुमान' के बाद 'एंग्री टैगोर' निश्चित रूप से बंगाल के लोगों का ध्यान आकर्षित करने जा रहा है.

हाल ही में विश्व भारती यूनिवर्सिटी के कुलपति के सीएए पर टिप्पणी और 'एन्क्रिप्टेड धमकी' को लेकर सोशल मीडिया में दो वीडियो सामने आए थे. इसके बाद 30 जनवरी को सभी शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी को मीडिया के सामने बयान देने पर प्रतिबंध लगा दिए गए.

इससे पहले, 26 जनवरी को पूर्बापल्ली सीनियर व्बॉइज हॉस्टल में कुलपति कह रहे हैं, ‘भारतीय संविधान को मुट्ठी भर 293 लोगों ने मिलकर बनाया था. आज जो नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे हैं, वे संविधान को वेद बता रहे हैं. लेकिन जिन्हें यह पसंद नहीं खासकर वोटर जो संसद बनाते हैं, इसे बदल देंगे.’

कुलपति के इस बयान की पश्चिम बंगाल में कई लोगों ने निंदा की. पूर्व मेयर और सीपीआई नेता बिकास रंजन भट्टाचार्जी ने इसे राष्ट्रविरोधी करार दिया था. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान को चुनौती देते हुए कुलपति ने न केवल अपनी कुर्सी की प्रतिष्ठा कम की, बल्कि यह राष्ट्रविरोधी कृत्य भी है.

कुलपति पर छात्रों को ‘सबक सिखाने’ का आरोप
कैंपस में एक वीडियो प्रसारित होने के बाद कुछ छात्रों द्वारा कुलपति के खिलाफ एक पुलिस में शिकायत भी की गई. इस वीडियो में वह कुछ वामपंथी झुकाव वाले छात्रों को सबक सिखाने की बात कह रहे हैं.

8 जनवरी को बीजेपी सांसद स्वप्न दासगुप्ता को कुलपति ने कैंपस में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर एक व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया था. दासगुप्ता और कुलपति को वामपंथी छात्र संघ के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा.

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First published: February 4, 2020, 7:10 AM IST
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