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अब भारत की बड़ी कंपनियों पर चीन की नज़र, सीईओ से लेकर इंटर्न तक की करवा रहा जासूसी- रिपोर्ट

चीन देश के स्टार्टअप्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और भारत में स्थित विदेशी निवेशक और उनके संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारियों की भी निगरानी कर रहा है. (PTI)

चीन देश के स्टार्टअप्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और भारत में स्थित विदेशी निवेशक और उनके संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारियों की भी निगरानी कर रहा है. (PTI)

चीन की सेना (Chinese Army and Intelligence Agency) और खुफिया एजेंसी से जुड़ी कंपनी झेन्‍हुआ डेटा इंफॉर्मेशन टेक्‍नॉलजी कंपनी लिमिटेड ने जो ओवरसीज की इंडिविजुअल डेटाबेस (OKIDB) तैयार किया है, उसमें भारत के अर्थ जगत (Indian Economy) के कम से कम 1,400 लोग, संगठन या कंपनियां शामिल हैं.

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    नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव (Ladakh Border Dispute) के बीच सोमवार को हाईब्रिड वॉरफेयर (Hybrid Warfare) को लेकर चीन की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ. चीन अपनी एक कंपनी के जरिए भारत के करीब 10 हजार से ज्यादा हस्तियों और संगठनों की जासूसी कर रहा है. अब एक दूसरे खुलासे में पता चला है कि चीन की नजर भारत के अर्थव्यवस्था पर है. अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन भारत के पेमेंट एप (Payment App), सप्लाई चेन, डिलीवरी एप्स और इन एप्स के सीईओ-सीएफओ समेत करीब 1400 व्यक्तियों और संस्थाओं की निगरानी कर रहा है.

    इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग की दूसरी कड़ी में इसका खुलासा किया. रिपोर्ट में बताया गया कि चीन की सेना और खुफिया एजेंसी से जुड़ी कंपनी झेन्‍हुआ डेटा इंफॉर्मेशन टेक्‍नॉलजी कंपनी लिमिटेड ने जो ओवरसीज की इंडिविजुअल डेटाबेस (OKIDB) तैयार किया है. चीन की निगरानी लिस्ट में इंडियन रेलवे में इंटर्नशिप कर रहे इंजीनियरिंग स्टूडेंट से लेकर अजीम प्रेमजी की वेंचर कंपनी के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर तक शामिल हैं. इतना ही नहीं चीन देश के स्टार्टअप्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और भारत में स्थित विदेशी निवेशक और उनके संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारियों की भी निगरानी कर रहा है.

    जासूस चीन: क्या है 'हाइब्रिड वॉरफेयर', डेटा को कैसे इस्तेमाल कर सकता है चीन?



    इन कंपनियों के संस्थापकों/CEO हो रही है निगरानी
    >>टीके कुरियन- प्रेमजी इन्वेस्ट में मुख्य निवेश अधिकारी
    >>अनीश शाह- ग्रुप सीएफओ, महिंद्रा ग्रुप
    >>पीके एक्स थॉमस- सीटीओ, रिलायंस ब्रांड्स
    >>ब्रायन बाडे- मुख्य कार्यकारी, रिलायंस रिटेल
    >>विनीत सेखसरिया- कंट्री हेड, मॉर्गन स्टेनली
    >>फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक बिन्नी बंसल
    >>ज़ोमैटो के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल
    >>स्विगी के सह-संस्थापक और सीईओ नंदन रेड्डी
    >>न्याका के सह-संस्थापक और सीईओ फाल्गुनी नायर
    >>उबर इंडिया के प्रमुख चालक संचालन पावन वैश्य
    >>PayU के चीफ नमित पोटनीस.

    रिपोर्ट के मुताबिक, चीन इन ऐप्स की जासूसी कर रहा है:-
    >>पेमेंट एप
    >>सप्लाई चेन
    >>डिलीवरी एप्स
    >>टेक स्टार्टअप्स
    >>ट्रैफिक एप्स
    >>वेंटर कैपिटल
    >>अर्बन ट्रैफिक
    >>डिजिटल हेल्थकेयर
    >>डिजिटल एजुकेशन

    चीन की शेनझेन और झेन्हुआ इंफोटेक कर रही हैं जासूसी
    चीन की कंपनी शेनझेन इंफोटेक और झेन्हुआ इंफोटेक ये जासूसी कर रही है. शेनझेन इंफोटेक कंपनी ये जासूसी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार के लिए कर रही है. इस कंपनी का काम दूसरे देशों पर नजर रखना है.

    भारत में VIPs की भी जासूसी कर रहा है चीन
    बता दें कि इससे पहले सोमवार को इंडियन एक्सप्रेस ने खुलासा किया था कि चीन भारत में बड़े संवेधानिक पदों पर बैठे राजनेताओं और सामरिक पदों पर बैठे अधिकारियों की जासूसी कर रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पांच पूर्व प्रधानमंत्रियों, पूर्व और वर्तमान के 40 मुख्यमंत्रियों, 350 सांसद, कानून निर्माता, विधायक, मेयर, सरपंच और सेना से जुड़े समेत करीब 1350 लोगों का रियल टाइम डेटा चुरा रहा है.

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    9 सितंबर से बंद है डेटा चुराने वाली कंपनी की वेबसाइट
    रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस की ओर से वेबसाइट www.china-revival.com में दिए गए ईमेल आईडी पर एक क्वॉयरी भेजी गई थी, जिसका कोई जवाब नहीं आया है. 9 सितंबर को ये कंपनी ने अपनी वेबसाइट पैसिव कर दी है. अब ये नहीं खुल रही. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में चीनी दूतावास के एक सूत्र ने कहा- 'चीन ने कंपनियों या व्यक्तियों को चीनी सरकार के लिए बैकडोर या स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करके अन्य देशों के डेटा चुराने के लिए नहीं कहा है.' हालांकि, सवाल ये है कि अगर चीनी सरकार ने ऐसा नहीं कहा तो चीनी सरकार ने ओकेआईडीबी डेटा का इस्तेमाल किस मकसद से किया?

    क्या है काम का डेटा?
    पते, वैवाहिक स्टेटस, खास लोगों के साथ तस्वीरें, राजनीतिक रिश्ते, परिवार और सोशल ​मीडिया पर सक्रियता जैसी सूचनाएं जासूसी और प्रॉक्सी वॉर के लिहाज़ से अहम समझी जाती हैं. ज़ेनहुआ कंपनी इस तरह की तमाम सूचनाओं का भंडार चीन की 'थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस' को सौंपती है. साथ ही, कंपनी उस डेटा को नष्ट नहीं करती, जो इंटेलिजेंस या चीनी सेना के काम का न हो, उसे भी अलग से भविष्य के लिए मेंटेन किया जाता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस डेटा का इस्तेमाल खतरनाक ढंग से हो सकता है.

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