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तमिलनाडु विधानसभा में सीएए विरोधी प्रस्ताव पारित-कानून को निरस्त करने का आग्रह

तमिलनाडु विधानसभा में सीएए विरोधी प्रस्ताव पारित-कानून को निरस्त करने का आग्रह

मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने केंद्र सरकार से इस कानून को निरस्त करने की अपील की.

मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने केंद्र सरकार से इस कानून को निरस्त करने की अपील की.

तमिलनाडु (tamil nadu) विधानसभा ने नागरिक संशोधन अधिनियम (सीएए), 2019 खिलाफ ( Anti-CAA resolution) के खिलाफ एकमत होकर प्रस्ताव पारित किया है और केंद्र ( central government) से इस कानून को निरस्त करने की अपील की है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (MK Stalin) जो इस प्रस्ताव को लेकर सदन में पहुंचे थे, उन्होंने केंद्र सरकार से इस कानून को निरस्त करने की अपील की ताकि देश में एकता और सांप्रदायिक सौहार्द्र बना रहे.

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  • News18Hindi
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    चेन्नई. तमिलनाडु (tamil nadu) विधानसभा ने नागरिक संशोधन अधिनियम (सीएए), 2019 (CAA Law) के खिलाफ एकमत होकर प्रस्ताव पारित किया है और केंद्र (central government) से इस कानून को निरस्त करने की अपील की है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (MK Stalin) जो इस प्रस्ताव को लेकर सदन में पहुंचे थे, उन्होंने केंद्र सरकार से इस कानून को निरस्त करने की अपील की ताकि देश में एकता और सांप्रदायिक सौहार्द्र बना रहे. स्टालिन ने दावा किया कि नागरिक संशोधन अधिनियम शरणार्थियों को उनके धर्म और राष्ट्रीयता के आधार पर अलग करने का तरीका है.

    प्रस्ताव रखते हुए स्टालिन ने कहा कि यह कानून भारत के संविधान में दर्ज धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का बिल्कुल भी पालन नहीं करता है. प्रस्ताव में कहा गया कि -अगस्त में जारी सदन मानता है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 जिसे संसद में 2019 में लाया गया था वो संविधान में निर्धारित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है और हमारे सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए भी ठीक नहीं है. लोकतांत्रिक सिद्धांतों के मुताबिक, एक देश को समाज के सभी वर्गों के लोगों की आकांक्षाओं और ज़रूरतों को ध्यान में रखकर चलाया जाना चाहिए. लेकिन नागरिक संशोधन अधिनियम को देखकर साफ लगता है कि यह कानून शरणार्थियों की हालत पर ध्यान देकर उनका समर्थन करने के बजाए, उनसे उनके मूल देश और धर्म के आधार पर भेदभाव करता है.

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    इसलिए भारत के संविधान में निहित धर्म निरपेक्ष सिद्धांतों को बरकरार रखने और देश में एकता और सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए, यह अगस्त का सदन प्रस्ताव पारित करता है और केंद्र सरकार से नागरिक संशोधन अधिनियम, 2019 निरस्त करने की अपील करता है. नागरिक संशोधन अधिनियम जो 1955 में बने नागरिकता अधिनियम में बदलाव करता है और अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए शरणार्थी हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिश्चियन को नागरिकता के योग्य बनाता है. इसके अलावा ये बिल नागालैंड, मिजोरम, और अरुणाचल प्रदेश और ऐसे इलाके जो छठी अनुसूची में आते हैं उन्हें इनर लाइन परमिट से छूट देता है. ये नियम उन समुदायों पर लागू होगा जो 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आ चुके हैं.

    इसके अलावा यह मूल 14 साल से 5 साल के नागरिकता को बेअसर करने के मामले में भी छूट देता है. कोई भी जो उक्त 6 धर्मों और तीन देशों से ताल्लुक रखता है वो भारत में पांच साल रहने के बाद नागरिकता के लिए आवेदन दे सकता है. यह अधिनियम ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्डधारकों, अगर किसी तरह का कोई कानून का उल्लंघन करते हैं, भले ही वो पार्किंग उल्लंघन जैसे छोटे अपराध ही क्यों ना हों, उनकी नागरिकता को रद्द करने की अनुमति देता है. सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिक संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली 150 याचिकाओं पर अभी तक सुनवाई नहीं की है.

    Tags: CAA Law, Central government, MK Stalin, Tamil nadu

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