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एंटनी के आरोप पर बोलीं रक्षामंत्री- 9% सस्ते में खरीदा राफेल, संसद को भी है पता

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Updated: September 18, 2018, 6:12 PM IST
एंटनी के आरोप पर बोलीं रक्षामंत्री- 9% सस्ते में खरीदा राफेल, संसद को भी है पता
एके एंटनी और निर्मला सीतारमण की फाइल फोटो

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एके एंटनी ने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण पर आरोप लगाया था कि राफेल डील के मुद्दे पर रक्षामंत्री तथ्य छिपा रही हैं.

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  • Last Updated: September 18, 2018, 6:12 PM IST
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वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एके एंटनी ने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण पर आरोप लगाया है कि वह राफेल डील के मुद्दे पर तथ्यों को छिपा रही हैं. वहीं कांग्रेस के इस आरोप पर पलटवार करते हुए निर्मला सीतारमण ने एंटनी के सारे आरोपों को गलत करार दिया और कहा कि संसद को विमानों की कीमतों और डील के बारे में पहले भी जानकारी थी.

सीतारमण ने साथ ही कहा कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पिछली यूपीए सरकार के समय किए गए करार में तय कीमत के मुकाबले नौ फीसदी कम कीमत पर राफेल विमान हासिल कर रही है.

पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने एनडीए सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि मोदी सरकार राफेल फाइटर जेट डील में हुए धांधली की दोषी है और स्वार्थों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों से समझौता कर रही है. उन्होंने कहा, ''अगर सरकार दोषी नहीं है तो वह क्यों एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन कर जांच कराने से बच रही है?''

एंटनी ने कहा कि कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाल में दावा किया था कि नए समझौते में विमान की कीमत यूपीए सरकार के समय हुए समझौते में तय कीमत से नौ फीसदी सस्ती है. वित्त मंत्री ने कहा कि यह 20 फीसदी सस्ती है, जबकि भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा कि यह 40 फीसदी सस्ती है, तो 'अगर यह इतनी ही सस्ती है तो उन्होंने 126 से ज्यादा विमान क्यों नहीं खरीदे?'

रक्षामंत्री सीतारमण ने इस पर पलटवार करते हुए कहा, 'एके एंटनी वरिष्ठ नेता हैं. उन्हें राफेल डील की सारी जानकारी थी. हमने पहले भी संसद को राफेल डील मेंm फाइटर विमानों की कीमतों को बताया था. यह उनकी गलती है कि वह कह रहे हैं कि हमें केवल 126 प्लेन लेना चाहिए था.''

सीतारमण ने पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की छवि राष्ट्रीय और ग्लोबल स्तर पर धूमिल करने का आरोप लगाया है.

सीतारमण ने कहा कि अगर यूपीए सरकार इस डील के बारे में निश्चिंत थी तो इस डील पर काम क्यों नहीं किया. एचएएल को निर्माता न चुनने का फैसला यूपीए का ही था.बता दें कि पिछली यूपीए सरकार ने 126 मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) खरीदने के लिए फ्रांसीसी कंपनी 'दसॉ एविएशन' से 2012 में बातचीत शुरू की थी. कंपनी को 18 ऐसे राफेल विमानों की आपूर्ति करनी थी जो उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार हों, जबकि उसे 108 ऐसे राफेल विमानों की आपूर्ति करनी थी, जिसे कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ मिलकर भारत में बनाती. बहरहाल, यह करार यूपीए सरकार के दौरान अंतिम रूप नहीं ले सका था.

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First published: September 18, 2018, 4:37 PM IST
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