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अन्वय नाइक केसः अर्नब और अन्य आरोपियों ने खुदकुशी की धमकी को इग्नोर किया, पुलिस ने दायर की चार्जशीट

अर्नब गोस्वामी ने शनिवार को बंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत को यह निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया है कि वह आरोप-पत्र पर संज्ञान न ले. फाइल फोटो
अर्नब गोस्वामी ने शनिवार को बंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत को यह निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया है कि वह आरोप-पत्र पर संज्ञान न ले. फाइल फोटो

महाराष्ट्र पुलिस (Maharashtra) की ओर से अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) और अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है. चार्जशीट के मुताबिक आरोपियों ने खुदकुशी की धमकी को इग्नोर किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2020, 10:16 PM IST
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मुंबई. खुदकुशी के लिये उकसाने के 2018 के मामले में रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी और दो अन्य लोगों के खिलाफ दायर आरोप-पत्र (Charge-Sheet) के मुताबिक आरोपियों ने पीड़ित अन्वय नाइक (Anvay Naik) की उन धमकियों पर कोई ध्यान नहीं दिया कि उन तीनों के द्वारा बकाये का भुगतान नहीं किये जाने पर वह खुदकुशी कर लेगा. मामले से संबंधित एक अन्य घटनाक्रम में गोस्वामी (Arnab Goswami) ने शनिवार को बंबई हाईकोर्ट (Bombay High Court) में एक बार फिर याचिका दायर कर निचली अदालत को यह निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया है कि वह आरोप-पत्र पर संज्ञान न ले.

पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी और दो अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए कथित रूप से उकसाने के 2018 के मामले में शुक्रवार को आरोप पत्र दायर किया. आरोप पत्र पड़ोसी रायगढ़ जिले के अलीबाग में एक अदालत के समक्ष दायर किया है. आरोप-पत्र में यह भी कहा गया कि आरोपियों द्वारा बकाये का भुगतान नहीं किये जाने से मानसिक तनाव में चल रहे नाइक ने पहले अपनी मां कुमुद का गला घोंटा जो कारोबार में उसकी साझेदार थीं और फिर खुद फांसी लगाकर जान दे दी.

पुलिस ने शुक्रवार को निकटवर्ती रायगढ़ जिले में अलीबाग की एक अदालत में आरोप-पत्र पेश किया. आंतरिक सज्जाकार अन्वय नाइक (Anvay Naik) और उसकी मां को कथित तौर पर खुदकुशी के लिये उकसाने का मामला रायगढ़ में ही चल रहा है. गोस्वामी के अलावा दो अन्य आरोपियों फिरोज शेख और नीतीश शारदा के नाम भी आरोप-पत्र में हैं.



आरोप-पत्र के मुताबिक, “पीड़ित (नाइक) ने उनसे (आरोपियों से) कहा था कि अगर वे उसके बकाए का भुगतान नहीं करेंगे तो वह खुदकुशी कर लेगा. आरोपियों ने हालांकि उसकी धमकी की अनदेखी की और उससे कहा कि वह जो चाहता है, वह करे.” इसमें कहा गया, “आरोपियों ने उसके बकाये का भुगतान नहीं किया, जिससे नाइक मानसिक तनाव में था. उसने यह सोच कर पहले अपनी मां का गला घोंट दिया कि उन्हें बाद में परेशानी हो सकती है क्योंकि वह भी कारोबार में साझेदार थीं.”
आरोप-पत्र में कहा गया है कि नाइक ने खुदकुशी से पहले एक पत्र लिखा और बाद में फांसी लगा ली. पुलिस ने कहा कि उन्होंने कथित सुसाइड नोट पर “मृत्युपूर्व बयान” के तौर पर भरोसा किया है. पुलिस ने कहा कि पत्र की लिखावट नाइक की लिखावट से मिल रही थी और फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि वह इसे लिखते वक्त दबाव में नहीं था.

पुलिस ने पूर्व में कहा था कि कॉनकोर्ड डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के मालिक नाइक ने अपने सुसाइड नोट में दावा किया था कि वह गोस्वामी, फिरोज शेख और नीतीश शारदा से बकाये की रकम नहीं मिलने की वजह से अपनी जिंदगी खत्म कर रहा है. पुलिस ने कहा कि नोट के मुताबिक तीनों को नाइक को क्रमश: 83 लाख, चार करोड़ और 55 लाख रुपये का भुगतान करना था.

आरोपियों में से एक के वकील राहुल अग्रवाल ने शनिवार को कहा कि अदालत 1914 पन्नों के आरोप-पत्र पर 16 दिसंबर को संज्ञान लेगी. गोस्वामी ने शनिवार को बंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अलीबाग अदालत को यह निर्देश दिये जाने की मांग की कि वह आरोप-पत्र पर संज्ञान न ले.

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भली भांति जानते हुए यह आरोप-पत्र अदालत में दिया कि उन्होंने हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को ही आरोप-पत्र दायर करने पर रोक लगाने के लिये याचिका दायर की है. इस साल मई में, महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) ने घोषणा की थी कि उन्होंने पुलिस द्वारा पूर्व में बंद किये गए इस मामले में अन्वय नाइक की बेटी अद्न्या नाइक की शिकायत पर फिर से जांच के आदेश दिये हैं.

अलीबाग पुलिस ने चार नवंबर को गोस्वामी, शेख और सारदा को गिरफ्तार किया था, लेकिन 11 नवंबर को उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी. इस बीच बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की गठबंधन सरकार के सुप्रीम कोर्ट द्वारा गोस्वामी और अन्य को जमानत देते वक्त की गई टिप्पणी के बावजूद आरोप-पत्र दायर करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने पूछा, “क्या यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उपहास नहीं है? क्या वे फिर से व्यक्तिगत स्वतंत्रता को दबाना चाहते हैं?”
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