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कश्मीर: आतंकवादी और बंदी की मार से बर्बादी की कगार पर सेब कारोबारी

भाषा
Updated: September 23, 2019, 11:09 PM IST
कश्मीर: आतंकवादी और बंदी की मार से बर्बादी की कगार पर सेब कारोबारी
पाबंदियों के दौरान श्रीगनर के लाल चौक की तस्वीर. (फाइल फोटो)

भारत (India) द्वारा पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर (Jammu-Kashmir) से विशेष दर्जा (Special status) हटाए जाने के बाद से घाटी में संचार नेटवर्कों (Communication)समेत पाबंदियां हैं.

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  • Last Updated: September 23, 2019, 11:09 PM IST
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श्रीनगर. जम्मू कश्मीर (Jmmu and Kashmir) के छोटे कारोबारी और सेब व्यापारी आतंकवाद और बंदी की दोहरी मार झेलने के लिए मजबूर हैं. सेब कारोबारियों का कहना है कि घाटी में 50 दिन से कारोबार ठप है जिसके चलते उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. कारोबारियों ने सोमवार को कहा कि वे घाटी में पाबंदियां (Restrictions) खत्म होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि सरकार (Government) जल्द ही पाबंदियों को खत्म करेगी.

कारोबारियों ने कहा कि वे आतंकवादी (Terrorist) समूहों की धमकियों से भी घबराए हुए हैं. भारत (India) द्वारा पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) का विशेष दर्जा (Special status) हटाए जाने के बाद से घाटी में संचार नेटवर्कों समेत पाबंदियां हैं. हालांकि पिछले सात सप्ताहों में हालात में मामूली सुधार देखने को मिले हैं, लेकिन आज भी सार्वजनिक वाहन सड़कों से गायब हैं और स्कूल अपने छात्रों की उपस्थिति का इंतजार कर रहे हैं.

तीन जिलों में हैं ज्यादा परेशानी
उत्तर कश्मीर (North Kashmir) के सोपोर और दक्षिण कश्मीर (South kashmir) के तीन जिलों में अधिकतर लोगों की आजीविका के साधन सेब कारोबार को काफी झटका लगा है. इसमें सितंबर तक 30 हजार टन की कमी आई है. इसकी वजह आतंकवादी समूहों से खतरा, बाग मालिकों की पिटाई और घाटी के बाहर फल लेकर जाने वाले ट्रकों को जलाया जाना शामिल है.

आतंकवाद से पीड़ित दक्षिण कश्मीर के शोपियां (Shopian) जिले के एक कारोबारी ने कहा, 'हम पुलिस को संदेश भेज रहे हैं लेकिन मीडिया में पुलिस के शीर्ष अधिकारियों द्वारा बड़े वादे करने के अलावा जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हो रहा है.'

आतंकी खुलकर देते हैं धमकी
नाम जाहिर न करने की शर्त पर एक कारोबारी ने कहा कि वह रात में किसी तरह अपने फलों को नई दिल्ली (New Delhi) ले जा सका और उसने 60,000 रुपये कमाए. उन्होंने कहा, 'वापसी में तीन आतंकवादी मेरे पास आए और मुझे विकल्प दिया कि या तो मेरा ट्रक जला दिया जाए या फिर पैर में गोली लगवाने के लिए तैयार रहा जाए. मेरे पास कोई विकल्प नहीं था. अब मुझे ट्रक की मरम्मत कराने में तकरीबन 1.5 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे.
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अब तक 40 घटनाएं आ चुकी हैं सामने
पुलिस ने बताया कि सितंबर के मध्य तक सेब बागान मालिकों, मजदूरों और वाहन चालकों को पीटने या आतंकवादी समूहों द्वारा धमकाने की कम से कम 40 घटनाएं दर्ज की गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि पांच अगस्त को घाटी में मोबाइल फोन और इंटरनेट समेत संचार पर लागू की गई पाबंदियां कई स्थानों पर हटा ली गई हैं लेकिन वे अब भी जारी हैं और निकट भविष्य में उन्हें हटाने की कोई योजना नहीं है.

घाटी में लैंडलाइन सेवा बहाल की गई लेकिन इनमें नागरिक उपभोक्ताओं की संख्या 18,000 रही जबकि करीब 30,000 लैंडलाइन सरकारी, औद्योगिक प्रतिष्ठान, स्कूल, अस्पताल और होटलों में बहाल किए गए.

पर्यटन क्षेत्र को हो रहा भारी नुकसान
जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में ज्यादातर होटल खाली है और टैक्सियां सड़कों से नदारद हैं. टैक्सी चालक शरीक अहमद ने कहा, 'पिछले साल पर्यटकों की संख्या को देखते हुए मैंने बैंक से कर्ज लेकर एक नई टैक्सी खरीदी थी. आज मुझे बैंक को किस्त चुकानी है और मेरी कोई आय नहीं है.'

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First published: September 23, 2019, 11:09 PM IST
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