सैकड़ों किमी दूर रखे 3486 शवों को है अपने वतन की मिट्टी का इंतजार

अभी भी अकेले खाड़ी देशें में हजारों शव भारत वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं. (File Photo)
अभी भी अकेले खाड़ी देशें में हजारों शव भारत वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं. (File Photo)

कोरोना (Corona) और लॉकडाउन के चलते कुछ ही शव भारत लाए जा सके. सरकार का दावा है कि बाकी के शवों (dead bodies) को भी देश लाने की कोशिशें जारी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2020, 4:36 PM IST
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नई दिल्ली. दो वक्त की रोटी की जुगाड़ में वतन से दूर हुए थे. सोचा था चार पैसे कमा लेंगे तो बच्चों का भविष्य भी सुधर जाएगा. लेकिन क्या पता था जिस वतन से चंद महीने और साल के लिए दूर जा रहे हैं तो उसकी मिट्टी भी नसीब नहीं होगी. खाक में मिलने के लिए भी कोई एक या दो दिन नहीं महीनों इंतज़ार करना पड़ेगा. उस पर भी यह गारंटी नहीं कि मिट्टी नसीब हो ही जाएगी.

फरवरी से लेकर अगस्त तक 5 हज़ार से अधिक भारतीयों (Indians) की विदेशों में मौत हो गई. इसमे खाड़ी देशों (Gulf Countries) की संख्या ज़्यादा है. कोरोना (Corona) और लॉकडाउन के चलते कुछ ही शव भारत लाए जा सके. सरकार का दावा है कि बाकी के शवों (dead bodies) को भी देश लाने की कोशिशें जारी हैं.

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सिर्फ 10 देशों में ही हो गई 5286 भारतीयों की मौत
फरवरी 2020 से पहली ही तमाम भारतीय नागरिक भारत से दूसरे देशों में गए हुए थे. लेकिन कोरोना और लॉकडाउन के चलते इंटरनेशनल फ्लाइट बंद हो जाने से जो जहां था वहीं फंस गया. यहां तक की जिसे फरवरी में वापस आना था वो भी नहीं आ सका. इसी बीच सिर्फ 10 देशों में ही 5286 भारतीयों की मौत हो गई. मौतों का यह आंकड़ा एक फरवरी से लेकर 15 अगस्त के दौरान का है.

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विदेशों में हुई मौत और उसके बाद भारत आए शवों का यह है आंकड़ा.


अकेले सऊदी अरब में ही 2360 भारतीयों की मौत हुई है. वहीं यूएई में 1441 और कुवैत में 694 भारतीयों की मौत हुई है. कुल 5286 शवों में से सिर्फ 1807 शव ही भारत लाए जा सके हैं. केन्द्र सरकार का कहना है कि कुछ शवों का उनके परिवार वालों की मर्जी से वहीं अंतिम संस्कार कर दिया गया.

खाड़ी के कुछ देशों में सिर्फ दफनाने की होती है इजाज़त

जानकारों की मानें तो खाड़ी के कुछ देशों में शवों को सिर्फ दफनाने की इजाज़त होती है. अगर किसी नॉन मुस्लिम की मौत हो जाती है तो उसे वहां दफनाया जा सकता है, लेकिन उसे जलाने की इजाज़त नहीं मिलती है. इसके लिए शव को अपने देश ही लाना होता है. खाड़ी के कई देशों में नौकरी कर चुके ताज मौहम्मद बताते हैं कि कई बार ऐसा हुआ कि कुछ लोग तो पैसा खर्च कर अपने परिजन का शव वापस भारत मंगा लेते हैं, लेकिन जो ऐसा नहीं कर सकते हैं तो उनके परिजन के शव को उसी देश में दफना दिया जाता है.
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