क्या अरब महासागर बन रहा है चक्रवात की ‘पसंदीदा’ जगह

ताउ-ते अरब महासागर में निरंतर पैदा होने वाले चक्रवातों में बीते सालों का चौथा चक्रवाती तूफान है.

ताउ-ते अरब महासागर में निरंतर पैदा होने वाले चक्रवातों में बीते सालों का चौथा चक्रवाती तूफान है.

बीते सालों में देखा जा रहा है कि अरब महासागर (Arabian Sea) भी गर्म होता जा रहा है जिसकी वजह से यहां चक्रवात ज्यादा आ रहे हैं. मौसम विज्ञानी उसे ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) से जोड़ कर देख रहे हैं.

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नई दिल्ली. टाउते चक्रवात (Cyclone Tauktae) को अरब महासागर (Arabian Sea) में पैदा होने वाले, भयंकर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा गया है. इसके रात तक गुजरात के तट से टकराने की आशंका व्यक्त की जा रही है. हालिया सालों में देखा गया है कि अरब महासागर में भयंकर तूफान पहले की अपेक्षा जल्दी-जल्दी आ रहे हैं.

रविवार शाम 5.30 मिनट पर टाउते चक्रवात 150 किमी उत्तरपश्चिम में गोवा के पंजिम पहुंचा, यहां से 270 किमी दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए ये मुंबई से टकराया, फिर 510 किमी आगे चलकर वीरावल के दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ेगा और यहां से 470 किलोमीटर दीव के दक्षिणपूर्व से गुज़रते हुए 700 किलोमीटर दक्षिणपूर्व में कराची पहुंचेगा. 24 घंटे के भीतर इसके रफ्तार पकड़ने की आशंका जताई जा रही थी. जो सही साबित हो रही है.

मौसम विभाग के मुताबिक टाउते आज देर रात या मंगलवार की सुबह तक गुजरात के भावनगर के तट से टकराएगा और वहां पर पहुंचने तक ये भयानक रूप अख्तियार कर चुका होगा. उस दौरान यहां 150-160 प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. इस दौरान तेज या भीषण बारिश होने की आशंका जताई जा रही है जिससे गुजरात के 12 जिले प्रभावित होंगे जिनमें-कच्छ, सौराष्ट्र, पोरबंदर, जूनागढ़, भावनगर, अहमदाबाद, सूरत, वलसाड, अमरेली, आणंद, भरूच और केंद्र शासित प्रदेश दीव शामिल हैं.

टाउते में क्या खास है ?
टाउते अरब महासागर में निरंतर पैदा होने वाले चक्रवातों में बीते सालों का चौथा चक्रवाती तूफान है. 2018 से अब तक के इन सभी चक्रवातों को भयानक या उससे भी ऊपर की श्रेणी में रखा गया है. टाउते को मिलाकर तीन चक्रवात या तो महाराष्ट्र या गुजरात के तट से टकराए हैं. 2018 में आए चक्रवात मेकानू जो ओमान में टकरा कर रह गया था, 2019 में आया चक्रवात वायु गुजरात के तट से टकराया था, उसके बाद 2020 में आया निसर्ग महाराष्ट्र के तट से टकराया था. वहीं टाउते ने खुद को बहुत तेजी से भयानक रूप में बदल लिया है.

14 मई को अरब महासागर के दक्षिणपूर्व में कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद 16 मई को ही इसे भयानक चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रख दिया गया, जहां इसे अपना रूप भयंकर करने में दो दिन का वक्त लगा वहीं वायु को भयंकर होने में 36 घंटे लगे थे और मेकानू 4 दिन में बहुत भयंकर चक्रवाती तूफान में बदला था. इन सभी में निसर्ग की गति काफी धीमी थी और उसे विकसित होने में 5 दिन लगे थे. यही नहीं 2020 और 2021 में अरब महासागर में आए दोनों ही चक्रवात, जो भंयकर की श्रेणी के थे, मानसून से पहले वाली अवधि में आए थे.

किस वजह से आई गति में तीव्रता ?



किस भी उष्णकटिबंधीय चक्रवात को जिंदा रहने के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है. ये ऊर्जा उसे ऊष्णकटिबंधीय सागर के ऊपर मौजूद आद्र यानि नम हवा और गरम पानी से मिलती है. फिलहाल 50 मीटर तक गहरे समुद्र का गर्म पानी इस चक्रवात टाउते को अच्छी खासी उर्जा प्रदान कर रहा है. गर्मी की वजह से पानी के भाप बनने से ज्यादा ऊर्जा निकलती है.जिससे दबाव और गहरा होता जाता है. और इस तरह से कम दबाव कई चरणों में चक्रवात को तीव्र करने में अहम भूमिका निभाता है. आमतौर पर इसलिए बंगाल की खाड़ी और अरब महासागर में मानसून से पहले चक्रवात पैदा होते हैं जो भयानक रूप ले लेते हैं.

क्या अरब महासागर बन रहा है चक्रवात की पसंदीदा जगह

बंगाल की खाड़ी और अरब महासागर में मिला कर हर साल औसतन पांच चक्रवात आते हैं. इनमें से चार बंगाल की खाड़ी में पैदा होते हैं क्योंकि वह अरब महासागर से ज्यादा गर्म है. अरब महासागर में आमतौर पर लक्षद्वीप से चक्रवात उठता है जो पश्चिम की तरफ बढ़ता है. और भारत के दूर पश्चिमी तटों से टकराता है. लेकिन बीते सालों में देखा जा रहा है कि अरब महासागर भी गर्म होता जा रहा है जिसकी वजह से यहां चक्रवात ज्यादा आ रहे हैं. मौसम विज्ञानी उसे ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ कर देख रहे हैं.

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