अमेरिकी अधिकारियों का दावा- हूती नहीं, ईरान से हुआ अरामको प्लांट पर हमला

अमेरिकी अधिकारियों का दावा- हूती नहीं, ईरान से हुआ अरामको प्लांट पर हमला
अमरीका में माना जा रहा है कि सऊदी में मौजूद आरामको के जिन संयंत्रों को टार्गेट बनाया गया है, उसके लोकेशन से नहीं लगता है कि हमला यमन से हुआ है.

अमेरिकी रिटायर्ड कर्नल सैड्रिक लीगटन ने सीएनएन को बताया, 'इस तरह के हमले को कोई सरकार ही अंजाम दे सकती है, न कि कोई विद्रोही गुट. इन बातों का सीधा मतलब है कि ये ड्रोन या तो ईरान (Iran) से भेजे गए थे या फिर इराक (Iraq) से.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 17, 2019, 9:14 AM IST
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सऊदी अरब (Saudi Arabia) स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी आरामको (ARAMCO) के दो संयंत्रों पर ड्रोन अटैक होने के बाद खाड़ी के देशों में तनाव का माहौल बना हुआ है. सऊदी और ईरान (Iran) के बीच तनाव अपने चरम पर है. हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. हूती विद्रोहियों का दावा है कि इस हमले के लिए आरामको के साइट पर दस से ज्यादा ड्रोन भेजे गए थे. इस मामले में अब तक दावा किया गया था कि ये हमला हूती विद्रोहियों ने यमन (Yemen) की जमीन से किया था. हालांकि अब इसे लेकर नए दावा सामने आए हैं कि ड्रोन इराक या ईरान की जमीन से भेजे गए थे.

अमरीकी अधिकारियों का मानना है कि सऊदी में मौजूद आरामको के जिन संयंत्रों को टार्गेट बनाया गया, उसके लोकेशन से नहीं लगता है कि हमला यमन से हुआ है. ये इलाके यमन सीमा से काफी दूर स्थित हैं. मीडिया एजेंसी सीएनएन से अमरीकी अधिकारियों ने बताया कि हमले में सऊदी के 19 केंद्रों को नुकसान पहुंचा है और ये काम केवल 10 ड्रोन का नहीं है. इससे पहले हूती विद्रोही दावाकर चुके हैं कि उनलोगों ने हमले को अंजाम देने के लिए 10 ड्रोन सऊदी भेजे थे.

ईरान या इराक से भेजे गए थे ड्रोन
इस अधिकारी ने आगे बताया, 'ये संभव नहीं है कि आप 10 ड्रोन से 10 केंद्रों पर हमला कर लें.' सीएनएन से अधिकारी ने इस हमले की सैटेलाइट तस्वीरें शेयर की हैं. इन तस्वीरों के आधार पर कहा जा रहा है कि ये सारे केंद्र उत्तर-पश्चिम में मौजूद हैं, जिसे यमन से टार्गेट करना काफी कठीन है. ट्रंप सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी यही लगता है कि ड्रोन ईरान या इराक से आए थे, लेकिन इस बात को अभी तक अधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है.
अमेरिकी रिटायर्ड कर्नल सेड्रिक लीगटन के हवाले से सीएनएन ने बताया, 'ये काफी सोचा-समझा हमला है, जिसे रणनीतिक उद्येशों से अंजाम दिया गया है. इस हमले को इस साजिश के तहत अंजाम दिया गया कि इसके ड्रोन सऊदी के रडार की पकड़ में न आ सके. काफी अहम केंद्रों को टार्गेट किया गया है. इस तरह के हमले को कोई सरकार ही अंजाम दे सकती है न कि कोई विद्रोही गुट. इन बातों का सीधा मतलब है कि ये ड्रोन या तो ईरान से भेजे गए थे या फिर इराक से.'



ईरान की ओर से अबतक कुछ भी साफ नहीं
आरामको के दो संयंत्रों पर ड्रोन अटैक में अपनी जमीन के इस्तेमाल को लेकर इराक ने रविवार को साफ तौर पर इनकार किया है. इराकी पीएम अब्देल अब्दुल महदी की ओर से जारी बयान में कहा गया है उनकी सरकार संविधान के विरुद्ध जाकर इलाके की शांति को भंग नहीं कर सकता है. वहीं ईरान की तरफ से इन आरोपों को लेकर कुछ भी साफ नहीं कहा गया है. राष्ट्रपति हसन रूहानी ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बस इतना कहा कि अमरीका सऊदी अरब को बड़ी मात्रा में हथियार और खुफिया मदद पहुंचा रहा है, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में अशांति का माहौल बना हुआ है.
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