भारत के इन इलाकों में पड़ेगी इतनी गर्मी कि इंसानों का रहना हो जाएगा नामुमकिन

कुछ ही दशकों में भारत के ज्यादातर हिस्सों में इंसानों के रहने के लिए असहनीय गर्मी हो जाएगी.

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Updated: July 5, 2019, 10:37 PM IST
भारत के इन इलाकों में पड़ेगी इतनी गर्मी कि इंसानों का रहना हो जाएगा नामुमकिन
कुछ दशकों में भारत के ज्यादातर हिस्सों में इंसानों के लिए असहनीय गर्मी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी (फाइल फोटो)
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Updated: July 5, 2019, 10:37 PM IST
इस साल भारत में पड़ी भीषण गर्मी के चलते कम से कम 100 लोगों की जान गई है. इसके अलावा इस बार जितनी गर्मी पड़ी, उसके आगे और गर्म होते जाने के आसार हैं. ऐसे में कुछ ही दशकों में भारत के ज्यादातर हिस्सों में इंसानों के लिए असहनीय गर्मी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी. इतनी असहनीय की लोग यहां रह भी नहीं सकेंगे.

अमेरिकी न्यूज वेबसाइट सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आमतौर पर अलग-अलग हिस्सों में मार्च से जुलाई के बीच गर्मी पड़ती है. लेकिन हाल के कुछ सालों में इस दौरान पड़ने वाली गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है. इतना ही नहीं देश में गर्मी ज्यादा लंबी और गर्मी के मौसम में तपते दिनों की संख्या भी ज्यादा बढ़ चुकी है.

जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा शिकार बनेगा भारत

इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) के आंकड़ों के अनुसार भारत उन देशों में है जिनपर जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा प्रभाव पड़ने की आशा है.

मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑन टेक्नोलॉजी (MIT) के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दुनिया कार्बन उत्सर्जन को सुझाए गए स्तर तक घटाने में सफल भी हो जाती है तो भी भारत के कुछ हिस्सों में गर्मी इतनी बढ़ जाएगी कि यह इंसानों के इतनी गर्मी में जिंदा रहने की परीक्षा लेगी.

इलफातिह इलताहिर, जो कि MIT में हाईड्रोलॉजी और क्लाइमेट के प्रोफेसर हैं उनका कहना है कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के महत्वपूर्ण प्रभाव देखने को मिलेंगे और गर्मियां और ज्यादा भीषण होती जाएंगीं. और अगर उत्सर्जन पर लगाम नहीं लगी तब तो बहुत ही भीषण.

कब माना जाता है कि बढ़ गई है गर्मी?
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भारत सरकार का गर्मी का पैमाना यह है कि जब तापमान औसत तापमान से 4.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर चला जाए तो गर्मी मानी जाती है. लेकिन यह जरूरी है कि औसत से इतना ज्यादा तापमान कम से कम दो दिनों तक लगातार रहे. गर्मी को तब बहुत ज्यादा मान लिया जाता है जब यह तापमान कम से कम दो दिनों के लिए औसत तापमान से 6.4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह जाए.

ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों में गर्मी अलग-अलग वक्त पर आती है. भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी तब मानी जाती है जब यहां लगातार दो दिनों के लिए तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है.

पिछले 8 सालों में गर्मी के चलते मरने वालों की कुल संख्या 5 हजार रही है (सांकेतिक तस्वीर)


पिछले 8 सालों में भारत में गर्मी से हो गईं 484 मौतें
पिछले साल पूरे भारत में गर्मी से मरने वालों की संख्या 484 थी. यह 2010 में मात्र 21 थी. पिछले 8 सालों में गर्मी के चलते मरने वालों की कुल संख्या 5 हजार रही है. इस साल के आंकड़ों में भी कम ही राहत देखने को मिल रही है.

जून में दिल्ली का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था. यह इस महीने में रिकॉर्ड किया गया सबसे अधिक तापमान था. राष्ट्रीय राजधानी के पश्चिम में राजस्थान के चुरू के तापमान ने देश में गर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. यहां तापमान 50.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था.

भारत के अलावा स्पेन, चीन, नेपाल और जिम्बाब्वे भी भीषण गर्मी की चपेट में
बिहार में गर्मी की वजह से सारे स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटरों को पांच दिनों के लिए बंद करना पड़ा था क्योंकि यहां पर पड़ने वाली जबरदस्त गर्मी के चलते 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी. इतना ही नहीं सरकार ने लोगों से दोपहर के समय पर घर में ही रहने की चेतावनी जारी की थी. अब मौसम जानकारों का कहना है कि यह स्थिति आगे और खराब ही होने वाली है.

अकेले भारत की स्थिति ही ख़राब नहीं है. इस साल दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ी है. इसमें स्पेन, चीन, नेपाल और जिम्बाब्वे जैसे देश शामिल हैं.

2100 तक भारत के कई हिस्सों में गर्मी के चलते नहीं रह सकेंगे इंसान
MIT के रिसर्चर्स का कहना है कि इस शताब्दी के अंत तक दुनिया का औसत तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा. हालांकि एक दूसरे थोड़े आशावादी रिसर्च में कहा गया है कि यह 2.5 डिग्री सेल्सियस तक ही बढ़ेगा. लेकिन इन दोनों ही रिसर्च में पेरिस समझौते के 2100 तक मात्र 2% तापमान बढ़ने के अनुमान को टूटता हुआ दिखाया गया है.

हालांकि आशावादी स्टडी के हिसाब से 2100 तक दक्षिणी एशिया का कोई भी हिस्सा इंसानों के रहने की परिस्थितियों से ज्यादा गर्म नहीं होगा लेकिन दूसरी स्टडी के हिसाब से स्थितियां अलग होंगीं.

रिसर्चर्स का मानना है कि दूसरे मामले में छोटा नागपुर का पठार, देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से और बांग्लादेश के ज्यादातर भाग इंसानों के रहने के लायक नहीं रह जाएंगे.

स्वस्थ से स्वस्थ इंसान पर भी पड़ेगा गर्मी का असर (सांकेतिक तस्वीर)


और बढ़ी गर्मी तो श्रीलंका, पाक और गंगा घाटी पर भी पड़ेगा असर
इन रिसर्चर्स ने यह भी माना है कि दक्षिण एशिया के ज्यादातर भागों में यह परिस्थितियां बढ़ती जाएंगीं. धीरे-धीरे ऐसे ही गंगा नदीं की घाटी की जलवायु भी हो जाएगी. भारत के उत्तरीपूर्वी और पूर्वी तटों का हाल भी ऐसा ही हो जाएगी. उत्तरी श्रीलंका, और पाकिस्तान की सिंधु घाटी के इलाकों का भी यही हाल होगा.

फिट इंसानों को भी गर्मी से नहीं रहेगी कोई राहत
इंसानों के इस मौसम में जिंदा रहने की क्षमता को इस रिसर्च में गीले बल्ब के तापमान से समझाया गया है. यह नमी और बाहरी तापमान को समझने का एक तरीका है.

इसमें बताया गया है कि जब एक गीला बल्ब 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान तक पहुंचता है तो उसके बचने की संभावना कम हो जाती है. वैसे ही बहुत ज्यादा तापमान पर इंसानों का शरीर खुद को पसीना बहाकर ठंडा नहीं रख पाता और कुछ घंटों तक इस परिस्थिति में रहने के बाद उसकी मौत हो जाती है. चाहे वह कितना भी फिट इंसान क्यों न हो!

सरकार कर रही प्रयास लेकिन 100 करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में
ऐसे में भारत सरकार की ओर से नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोंतो के इस्तेमाल के कई सारे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि कार्बन का उत्सर्जन कम किया जा सके. लेकिन पूरी दुनिया को मिलकर कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए प्रयास करने होंगे.

ऐसे भयानक भविष्य को देखते हुए दुनिया भर के तापमान में कमी करने के लिए कई प्रयोग किए जा रहे हैं हालांकि आने वाले दशकों में भारत के लिए परिस्थितियां ज्यादा खतरनाक हैं. ऐसे में हमें ध्यान रखना होगा कि 100 करोड़ से ज्यादा लोगों की जिंदगी खतरे में है.

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First published: July 5, 2019, 8:18 PM IST
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