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India-China Standoff: सेना को 15 दिनों के लिए गोला-बारूद रखने की मंजूरी, गुस्ताख चीन को सिखाएंगे सबक

सरकार के इस फैसले से सशस्त्र बलों को चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चे पर जंग की तैयारी करने में मदद मिलेगी. ANI
सरकार के इस फैसले से सशस्त्र बलों को चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चे पर जंग की तैयारी करने में मदद मिलेगी. ANI

सरकारी सूत्रों के हवाले से ANI ने जानकारी दी है कि मिसाइल, टैकों के लिए गोला बारूद की संतोषप्रद मात्रा में खरीद हुई है, इससे सेना को चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) को एक साथ मुंहतोड़ जवाब देने में मदद मिलेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 14, 2020, 5:30 AM IST
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नई दिल्ली. चीन (China) के साथ सीमा पर जारी तनाव के बीच भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों (Armed Forces) को 15 दिनों के भीषण युद्ध के लिए साजो सामान और गोला बारूद भंडारण की अनुमति दे दी है. पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में चीन के साथ जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार के निर्णय और आपातकालीन वित्तीय शक्तियों को उपयोग करते हुए सशस्त्र बलों द्वारा आने वाले दिनों में 50 हजार करोड़ के साजो सामान और गोला बारूद के साथ हथियारों की खरीद करने की उम्मीद है.

केंद्र सरकार का फैसला 15-I लेवल के लिए आया है, पहले साजो सामान और गोला बारूद भंडारण की लिमिट 10 दिनों की थी, सरकार के इस फैसले से सशस्त्र बलों को चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चे पर जंग की तैयारी करने में मदद मिलेगी. सरकारी सूत्रों ने ANI से कहा, ''15 दिनों के भीषण युद्ध के लिए साजो सामान इकट्ठा करने की अनुमति मिलने के बाद अत्याधुनिक हथियार, उपकरण और गोला बारूद की खरीददारी की जा रही है.'' सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार ने इसके लिए कुछ समय पहले अनुमति दी थी.

बता दें कि सेना को पहले 40 दिनों के लिए हथियार, गोला बारूद और साजो सामान इकट्ठा करने की परमिशन थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 10 दिन कर दिया गया. खबरों के मुताबिक सैन्य साजो सामान के भंडारण और युद्ध के बदलते स्वरूप के चलते ऐसा फैसला लिया गया था. हालांकि उरी हमले के बाद ये पता लगा कि सशस्त्र बलों के पास स्टॉक काफी कम है और तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर की अगुवाई वाली डिफेंस कमिटी ने सशस्त्र बलों के वाइस-चीफ की वित्तीय ताकत को 100 करोड़ से बढ़ाकर 500 करोड़ कर दिया.



इसके साथ ही सेना के तीनों अंगों को इमरजेंसी वित्तीय ताकतें प्रदान की गईं, जिसके जरिए वे 300 करोड़ के अत्याधुनिक सामान और उपकरण खरीद सकते थे, जिससे जंग लड़ने में मदद मिल सके. चीन और पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सशस्त्र बल अपनी वित्तीय शक्तियों का उपयोग करते हुए उपकरण, हथियार, मिसाइल और सिस्टम की खरीददारी में जुटे हैं.
सूत्रों के मुताबिक मिसाइल, टैंकों के लिए गोला बारूद और आर्टिलरी की संतोषप्रद मात्रा में खरीद हुई है, ताकि जमीन पर मौजूद सैनिकों के लिए किसी तरह की चिंता ना रहे. पिछली गर्मियों से ही पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनातनी बनी हुई है.

गुस्ताख ड्रैगन की कोशिश नियंत्रण रेखा पर एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की है, जिसे हिंदुस्तान के रणबांकुरों ने अब तक सफलतापूर्वक नाकाम किया है.
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