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नागरिकता विधेयक के रथ पर सवार हो बीजेपी जीतना चाहती है बंगाल का रण!

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Updated: October 3, 2019, 5:22 PM IST
नागरिकता विधेयक के रथ पर सवार हो बीजेपी जीतना चाहती है बंगाल का रण!
साल 2021 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हैं. (PTI Photo/Ashok Bhaumik)

पश्चिम बंगाल में मटुआ समुदाय परिणाम प्रभावित करने वाले कारकों में से एक हैं. बीजेपी और टीएमसी दोनों की नजरें उन पर हैं.

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  • Last Updated: October 3, 2019, 5:22 PM IST
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सुजीत नाथ
कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West bengal) में साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में आने के लिए नागरिकता (संशोधन) विधेयक (CAB) रथ पर सवार होना चाहती है. पार्टी ने इस साल लोकसभा चुनावों में 'शरणार्थी कार्ड' सफलतापूर्वक खेला और बीजेपी प्रमुख अमित शाह (Amit Shah) नागरिकता (संशोधन) विधेयक को दरकिनार कर लगभग 70 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 40-45 प्रतिशत मटुआ मतदाताओं के विश्वास को सुरक्षित करने की रणनीति दोहराते दिखाई दे रहे हैं.

लंबे समय से राज्य में शरणार्थियों ने इस कानून की मांग की है, उनमें से कई हिंदू मटुआ समुदाय से हैं - जो साल 1971 के बाद बांग्लादेश से भारत चले आए थे. उनके पास पश्चिम बंगाल में मतदान के अधिकार हैं, लेकिन वे 'भारतीय' नहीं हैं, क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 6, जो कोई भी 19 जुलाई, 1948 के बाद पूर्वी या पश्चिमी पाकिस्तान से भारत में दाखिल हुआ, उसे नागरिकता के लिए आवेदन करना होगा.

गृह मंत्री अमित शाह ने 1 अक्टूबर को कोलकाता में एक सार्वजनिक समारोह में कहा कि नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार सबसे पहले मौजूदा नागरिकता मानदंडों में संशोधन करेगी. राष्ट्रव्यापी नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू कर घुसपैठियों की पहचान की जाएगी.

शाह बोले- चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शाह ने कहा 'ममता बनर्जी (Mamata Banejree) कह रही हैं कि लाखों हिंदू शरणार्थियों को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा. मैं अपने सभी शरणार्थी भाइयों को आश्वस्त करने के लिए यहां आया हूं कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि केंद्र सरकार उन्हें जाने पर मजबूर नहीं करेगी.'

शाह ने कहा कि 'मैं सभी हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि आपको भारत छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा. अफवाहों पर विश्वास न करें.'एनआरसी और नागरिकता विधेयक के मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए शाह का बयान बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा हाल के दिनों में राज्य में 11 मौतों के लिए भाजपा को दोषी ठहराए जाने के बाद आई है. दावा किया जा रहा है कि यह मौतें घुसपैठ की कवायद पर चिंता के चलते हुई.

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मटुओं की भूमिका अहम
शरणार्थियों में विशेष रूप से मटुओं ने साल 2019 के संसदीय चुनावों में भाजपा द्वारा 18 में से लगभग 10 पश्चिम बंगाल निर्वाचन क्षेत्रों में अहम भूमिका अदा की. पार्टी द्वारा जीती गई सीटें कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, रायगंज, बालुरघाट, उत्तरी मालदा, राणाघाट, बंगाण, बर्दवान-दुर्गापुर, आसनसोल, दार्जिलिंग, बैरकपुर, हुगली, झारग्राम, मिदनापुर, पुरुलिया, बांकुरा और बिष्टुपुर हैं.

इनमें से मटुआ पहली दस सीटों पर जीत के बड़े कारकों में से एक थे. अब इन सीटों में लगभग 70 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं और यह वे क्षेत्र हैं जहां भाजपा 2021 के विधानसभा चुनावों में कुल 294 में से 148 सदस्यों के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए देख रही है.

बनगाँव के भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर ने कहा, 'नागरिकता (संशोधन) विधेयक बंगाल में शरणार्थियों की खोई हुई गरिमा को वापस लाएगा और हम इस पर भ्रम को दूर करने के लिए राज्य के प्रत्येक और हर दरवाजे पर दस्तक देंगे. TMC लोगों को गुमराह और NRC पर दहशत पैदा कर रहा है.'

भाजपा ने जंगलमहल सहित बंगाल के जनजातीय क्षेत्रों में सफल जगह बनाई जिसमें लगभग 40-45 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. मटुआ बहुल इलाकों की 70 विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदगी के साथ पार्टी बंगाल में लगभग 100-105 निर्वाचन क्षेत्रों में मजबूत स्थिति में है.

तब पीएम मोदी ने कहा था - 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने ठाकुरनगर में मटुआ 'मुख्यालय' के पास 2 फरवरी को बंगाल में अभियान को शुरू किया था. जहां से भाजपा के शांतनु ठाकुर ने जीत दर्ज की थी.

उस समय, मोदी ने कहा, 'विभाजन के दौरान, सांप्रदायिक हिंसा के बीच अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोग भाग गए. सिख, हिंदू, ईसाई, पारसियों को घोर अत्याचारों का सामना करना पड़ा. अब आप मुझे बताइए, इतने वर्षों के बाद, क्या आपको नहीं लगता कि उन्हें भारत में सम्मान के साथ जीने का पूरा अधिकार है? इसलिए, हम यह नागरिकता (संशोधन) विधेयक लाए. लेकिन मैं इस पर ममता जी का पक्ष पूछना चाहूंगा. मैं आपको (मटुआ समुदाय को) आश्वस्त करना चाहूंगा कि हमारी सरकार इस मुद्दे पर आपके साथ है.'

भाजपा के शरणार्थी प्रकोष्ठ के प्रमुख डॉ. मोहित कुमार रे ने किया यह दावा
भाजपा के शरणार्थी प्रकोष्ठ के प्रमुख डॉ. मोहित कुमार रे के अनुसार, विभाजन के आसपास बांग्लादेश से भारत में लगभग 10 मिलियन लोग आए और साल 2001 से साल 2011 के बीच एक बड़ी संख्या आई. ये आँकड़े बांग्लादेश के एक अर्थशास्त्री द्वारा किए गए शोध पर आधारित हैं.'

रे ने दावा किया कि 'अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि हर दिन, औसतन 748 लोग बांग्लादेश से भारत में आते हैं और उनमें से लगभग 85 प्रतिशत बंगाल में बसते हैं. यह चिंताजनक है और कोई भी इसके बारे में कुछ नहीं कह रहा है. हमें लगता है कि यह नागरिकता (संशोधन) विधेयक निश्चित रूप से शरणार्थियों को लंबे समय से लंबित अधिकार देगा और हमारी सरकार को अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए सशक्त करेगा.'

साल 2011 के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी के पीछे शरणार्थियों, विशेष रूप से मटुआ, एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति थे.

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TMC ने बिनपनी देवी ठाकुर के समर्थन से जीत हासिल की
साल 2014 के लोकसभा चुनाव और साल 2016 के विधानसभा चुनावों में, टीएमसी ने प्रभावशाली मटुआ नेता बिनपनी देवी ठाकुर के समर्थन से जीत हासिल की. हालांकि साल 2019 के लोकसभा चुनावों में परिवर्तन की हवा चल रही थी जब बीजेपी ने नागरिकता के मुद्दे का इस्तेमाल करते हुए टीएमसी से सीटें छीन ली.

तृणमूल नेता कर्नल दिपांशु चौधरी (रिटायर्ड) ने कहा, 'भाजपा बंगाल में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के माध्यम से एक राजनीतिक कार्ड खेल रही है. वे शरणार्थियों का उपयोग करना चाहते हैं, जो बंगाल के लगभग 65 विधानसभा क्षेत्रों में अपने वोट बैंक के रूप में हावी हैं. सबसे दुर्भाग्यपूर्ण हिस्सा यह है कि वे मुसलमानों में डर पैदा कर रहे हैं.'

नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर टीएमसी और बीजेपी दोनों के नेताओं ने स्वीकार किया कि शरणार्थी और मुख्य रूप से मटुआ, साल 2021 के विधानसभा चुनावों में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: प. बंगाल में लागू होकर रहेगा NRC, अमित शाह ने कोलकाता में दोहराई प्रतिबद्धता

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First published: October 3, 2019, 5:17 PM IST
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