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सेना ने रक्षा मंत्रालय के सामने रखा पक्ष, कहा समलैंगिकता और अडल्ट्री को दंडनीय अपराध बनाए रखें

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Updated: November 1, 2019, 10:57 AM IST
सेना ने रक्षा मंत्रालय के सामने रखा पक्ष, कहा समलैंगिकता और अडल्ट्री को दंडनीय अपराध बनाए रखें
समलैंगिकता और अडल्ट्री पर कहा सेना ने कहा रक्षा मंत्रालय से

समलैंगिकता और अडल्ट्री (Homosexuality and Adultery) को दंडनीय अपराध बनाए रखें, सेना ने यह मांग उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा दोनों मामलों को अपराध की श्रेणी से हटाने के फैसले के करीब एक साल बाद की है.

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  • Last Updated: November 1, 2019, 10:57 AM IST
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नई दिल्ली. समलैंगिकता और अडल्ट्री (Homosexuality and Adultery) को लेकर सेना ने रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) से कहा कि वह इसे दंडनीय अपराध की श्रेणी में ही रखें. सेना ने यह मांग उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा दोनों मामलों को अपराध की श्रेणी से हटाने के फैसले के करीब एक साल बाद की है. सुत्रों ने बताया कि मंत्रालय के सामने अपना पक्ष रखते हुए सेना का कहना है कि सैन्य कानून में समलैंगिक संबंध और अविवाहित संबंध में पाए जाने वाले जवानों को सजा देने का प्रावधान है लेकिन अब उसी कानून के अलग प्रावधानों के तहत दंडित किया जाएगा.

एक साल बाद की मांग
पिछले साल देश की सर्वोच्च अदालत ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया था. इसके अनुसार आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं माना जाएगा.धारा 377 को पहली बार कोर्ट में 1994 में चुनौती दी गई थी. 24 साल और कई अपीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ ने अंतिम फ़ैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक लोगों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है. संवैधानिक पीठ ने माना कि समलैंगिकता अपराध नहीं है और इसे लेकर लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी.

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सेना की इस फैसले पर चिंता व्यक्त
सूत्रों ने बताया कि सेना ने रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry)से इन मामलों को अपराध की श्रेणी से हटाये जाने को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि दोनों संबंधों को दंडनीय बनाये रखने से यह निवारक की तरह काम करेगा, अन्यथा यह गंभीर अनुशासन की समस्या बन जाएगी और इससे कमान एवं नियंत्रण की समस्या आएगी. पत्रकारों से बुधवार को संवाद करते हुए भारतीय सेना में ऐडजुटैन्ट जनरल (Adjutant General Lieutenant), जनरल अश्विनी कुमार (General Ashwani Kumar) ने कहा कि कुछ मामले कानूनी रूप से ही हो सकते हैं लेकिन नैतिक रूप से गलत होते हैं.

भारतीय सेना में ऐडजुटैन्ट जनरल की शाखा सैनिकों के कल्याण के लिए जिम्मेदार है और सभी स्तरों पर सैनिकों के खिलाफ शिकायत का निपटारा करती है. गुरुवार को सेवानिवृत्त हुए कुमार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की ओर से कही गई कोई भी बात देश का कानून है और उसे मानना बाध्यकारी है.
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कोर्ट के फैसले को लेकर दिया यह जवाब
जब उनसे पूछा गया कि क्या सेना फैसले की समीक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी तो कुमार ने कहा, आपको कैसे पता कि हमने पहले ही यह नहीं किया? सेना समलैंगिकता और व्यभिचार के मामलों से सेना के संबंधित कानून के आधार पर निपटारा करती है और इसमें अनुचित कार्य करने वाले अधिकारी को सजा देने का प्रावधान है. कुमार ने कहा, जो अधिकारी समलैंगिक संबंध बनाने के आरोपी होंगे अब उनके खिलाफ सेना कानून की धारा-46 के तहत नहीं बल्कि धारा-45 (उम्मीद के विपरीत व्यवहार कर पद का दुरुपयोग करना एवं खराब आचरन) के तहत मामला चलेगा. धारा-46 में क्रूर, अश्लील एवं अप्राकृतिक कृत्य करने पर सजा का प्रावधान है.

कुमार का कहना है नैतिक अधमता और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सेना में समलैंगिता और व्यभिचार अब भी वर्जना माना जाता है। सेना व्यभिचार के मामले में अधिकारी पर मुकदमा चलाती है. इससे पहले सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा था कि सेना में समलैंगिक संबंध और व्यभिचार की इजाजत नहीं दी जाएगी. (भाषा इनपुट के साथ)

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First published: November 1, 2019, 10:52 AM IST
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