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जनरल बिपिन रावत होंगे देश के पहले CDS, कैबिनेट कमेटी ने किया औपचारिक ऐलान

News18Hindi
Updated: December 31, 2019, 1:07 PM IST
जनरल बिपिन रावत होंगे देश के पहले CDS, कैबिनेट कमेटी ने किया औपचारिक ऐलान
जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) दिसंबर, 1978 में भारतीय सेना (Indian Army) में कमीशन हुए थे और 1 जनवरी, 2017 से अभी तक वे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (Chief of Army Staff) के तौर पर सेना में कार्यरत हैं.

जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) दिसंबर, 1978 में भारतीय सेना (Indian Army) में कमीशन हुए थे और 1 जनवरी, 2017 से अभी तक वे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (Chief of Army Staff) के तौर पर सेना में कार्यरत हैं.

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  • Last Updated: December 31, 2019, 1:07 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत (Bipin Rawat) पहले चीफ डिफेंस स्टाफ (Chief of Defence Staff) होंगे. कैबिनेट कमेटी (Cabinet Committee) ने रावत के नाम पर मुहर लगा दी है.

जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) दिसंबर, 1978 में भारतीय सेना (Indian Army) में कमीशन हुए थे और 1 जनवरी, 2017 से अभी तक वे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (Chief of Army Staff) के तौर पर सेना में कार्यरत हैं. बता दें रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा तक सेवा देने के वास्ते नियमों में संशोधन किया था. तीनों सेनाओं के प्रमुख में से किसी को अगर CDS बनाते हैं तो वह इस पद पर 65 साल की आयु तक रह सकता है.

20 साल बाद लागू की गई है चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की व्यवस्था
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने 15 अगस्त को घोषणा की थी कि भारत में तीनों सेना के प्रमुख के रूप में सीडीएस (CDS) होगा. बिपिन रावत 31 दिसंबर को सेना से सेवानिवृत हो रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि सीडीएस अन्य सेना प्रमुखों के समान ही होंगे. हालांकि, प्रोटोकाल की सूची में सीडीएस, सेना प्रमुखों से ऊपर होंगे.





चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद तीनों सेनाओं के ऊपर होता है. 1999 के कारगिल युद्ध के बाद से सुरक्षा विशेषज्ञ इसकी मांग करते रहे हैं. कारगिल के बाद तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में बने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GOM) ने भी तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए CDS की सिफारिश की थी. GOM ने अपनी सिफारिश में कहा था अगर कारगिल युद्ध के दौरान ऐसी कोई व्यवस्था होती और तीनों सेनाएं बेहतर तालमेल से युद्ध के मैदान में उतरतीं तो नुकसान काफी कम होता. 20 साल बाद इसे लागू गया है.

CDS के पास होंगे ये पावर
>> सीडीएस रक्षा मंत्री के लिए प्रधान सैन्य सलाहकार की भूमिका निभाएंगे. तीनों सेनाओं के प्रमुख भी अपनी-अपनी सेनाओं से संबंधित सलाह रक्षा मंत्री को पहले की तरह ही देते रहेंगे. सीडीएस, पद छोड़ने के बाद किसी भी सरकारी पद को ग्रहण करने के पात्र नहीं होंगे.

>> सीडीएस के पास तीनों सैन्य प्रमुखों समेत कोई मिलिट्री कमांड नहीं होगा. सीडीएस तीनों सेनाओं के विभिन्न संगठनों का प्रशासक होगा.

>>सीडीएस संबंधित अथॉरिटी को तीनों सेनाओं की समेकित जानकारियां उपलब्ध कराएगा. वह डिफेंस ऐक्विजीशन काउंसिल और डिफेंस प्लानिंग काउंसिल के सदस्य होगा.

>> पहला सीडीएस अपना कार्यभार संभालने के तीन वर्षों के अंदर तीनों सेनाओं के अंदर ऑपरेशन, लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, ट्रेनिंग, सपॉर्ट सर्विस, कम्यूनिकेशन, रिपेयर्स के बीच तालमेल बनाए रखने का काम करेगा.

>> सीडीएस मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर का समुचित उपयोग सुनिश्चित करेगा और इसे रैशनलाइज भी करेगा. सीडीएस की जिम्मेदारी स्वदेशी औजारों की हिस्सेदारी बढ़ाना भी है.

>>अनुमानित बजट के मुताबिक सेनाओं के अंदर कैपिटल एक्विजीशन के प्रस्तावों की प्राथमिकता तय करना भी सीडीएस की जिम्मेदारी है.

>>सीडीएस औपनेविशक विरासत में मिले कुछ प्रक्रियाओं की पहचान कर उसे दूर करेगा. रैंक और फाइल में विश्वास और भरोसा पैदा करेगा.

कई देशों के पास CDS सिस्टम
अमेरिका, चीन, यूनाइटेड किंगडम, जापान सहित दुनिया के कई देशों के पास चीफ ऑफ डिफेंस जैसी व्यवस्था है. नॉटो देशों की सेनाओं में ये पद हैं. बताया जा रहा है कि विस्तृत भूमि, लंबी सीमाओं, तटरेखाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों को सीमित संसाधनों से निपटने के लिए भारत के पास एकीकृत रक्षा प्रणाली के लिए चीफ ऑफ डिफेंस पद की बहुत जरूरत थी. (भाषा के इनपुट सहित)

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First published: December 30, 2019, 9:56 PM IST
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