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सैन्य अफसरों के लिए ये सुविधा फिर शुरू, आर्मी चीफ ने पूर्व नेवी चीफ को दिया श्रेय

News18Hindi
Updated: October 25, 2019, 6:02 PM IST
सैन्य अफसरों के लिए ये सुविधा फिर शुरू, आर्मी चीफ ने पूर्व नेवी चीफ को दिया श्रेय
जनरल बिपिन रावत ने एक सेमिनार के दौरान इस सुविधा के फिर शुरू होने पर रक्षामंत्री-वित्तमंत्री को भी श्रेय दिया.

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सैन्य अधिकारियों के लिए ये सुविधा बहाल किए जाने को लेकर पूर्व नेवी चीफ और सरकार को इसका क्रेडिट दिया है. सरकार ने 2017 में इस सुविधा को सातवें वेतनमान के लागू होने के बाद खत्म कर दिया था. सेवानिवृत्त अधिकारियों के एक सेमिनार को संबोधित करते हुए जनरल बिपिन रावत ने कहा कि अधिकारियों के लिए ये सुविधा इसी महीने से शुरू हो जाएगी.

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  • Last Updated: October 25, 2019, 6:02 PM IST
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नई दिल्ली. एक बार फिर से सैन्य अधिकारियों को मिलने वाले 'राशन इन काइंड' सुविधा को मोदी सरकार द्वारा फिर से शुरू कर दिया गया है. सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सैन्य अधिकारियों के लिए ये सुविधा बहाल किए जाने को लेकर पूर्व नेवी चीफ और सरकार को इसका क्रेडिट दिया है. सरकार ने 2017 में इस सुविधा को सातवें वेतनमान के लागू होने के बाद खत्म कर दिया था. सेवानिवृत्त अधिकारियों के एक सेमिनार को संबोधित करते हुए जनरल बिपिन रावत ने कहा कि अधिकारियों के लिए ये सुविधा इसी महीने से शुरू हो जाएगी.

जनरल रावत ने कहा, इस सुविधा को दोबारा शुरू करवाने के लिए कई लोग दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में इसे शुरू करवाने में पूर्व नेवी चीफ और चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल सुनील लांबा का सबसे बड़ा हाथ है, उन्होंने बहुत मजबूती से रक्षामंत्री के सामने अपना पक्ष रखा. इसलिए कोई एक इस पर क्रेडिट नहीं ले सकता. इसके साथ जनरल रावत ने इस मुद्दे के लिए वित्तमंत्री और रक्षामंत्री को भी क्रेडिट दिया कि उन्होंने इसे दोबारा शुरू करने के लिए निर्णय लिया.


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क्या है राशन इन काइंड
इस सुविधा के द्वारा अब शांत क्षेत्रों में यानी फील्ड से बाहर भी तैनाती के दौरान मुफ्त राशन मिल सकेगा. अभी तक सिर्फ मोर्चे पर तैनात अधि‍कारियों को यह सुविधा मिलती थी. अफसरों को फ्री राशन की सुविधा साल 1983 से ही दी जा रही थी. केंद्र सरकार ने 1 जुलाई, 2017 को यह निर्णय लिया कि मुफ्त राशन की जगह शांत क्षेत्रों में तैनात अफसरों को एक निश्चित भत्ता दिया जाए. सशस्त्र बलों ने रक्षा मंत्रालय से कहा कि यदि राशन इन काइंड नहीं दी जाती तो उसकी जगह प्रति दिन 205.11 रुपये का भत्ता दिया जाए. लेकिन शांति क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को सिर्फ 96 रुपये प्रति दिन का भत्ता देने का सरकार ने आदेश दिया और यह पैसा सीधे उनके बैंक खाते में चला जाता था.

2017 में एडमिरल लांबा ने इस मुद्दे को उठाते हुए तब के रक्षामंत्री अरुण जेटली को एक पत्र लिखा कि इस सुविधा को दोबारा शुरू किया जाए. इससे सरकार को कोई खास बचत नहीं होगी, इससे ऑफिसर्स मेस चलाने में दिक्कत हो रही है. जब इस सुविधा को सरकार ने दोबारा से शुरू कर दिया तो कई सैन्य अधिकारियों ने इसका क्रेडिट लेते हुए कहा कि इसे सोशल मीडिया पर चलाने के कारण सरकार ने ये फैसला लिया. आर्मी चीफ ने अपने बयान से उन्हीं अधिकारियों को जवाब दिया.

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First published: October 25, 2019, 5:27 PM IST
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