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सियाचिन में सैनिकों पर CAG की रिपोर्ट पर बोले सेनाध्यक्ष, ये रिपोर्ट पुरानी है

News18Hindi
Updated: February 4, 2020, 6:00 PM IST
सियाचिन में सैनिकों पर CAG की रिपोर्ट पर बोले सेनाध्यक्ष, ये रिपोर्ट पुरानी है
कैग की रिपोर्ट लोकसभा और राज्यसभा में सोमवार को पेश की गई थी. इस पर सेनाध्यक्ष ने जवाब दिया. फाइल फोटो.पीटीआई

सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Army Chief Gen Manoj Mukund Naravane) ने कैग की रिपोर्ट वर्तमान हालात के बारे में नहीं है. मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि सैनिकों की जो भी जरूरत हैं, हम उन्हें पूरा कर रहे हैं.

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  • Last Updated: February 4, 2020, 6:00 PM IST
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नई दिल्ली. लेह, लद्दाख, सियाचिन (Siachen) और डोकलाम जैसे ऊंचे व ठंडे क्षेत्रों में तैनात सैनिकों पर भारतीय नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट से बवाल उठ खड़ा हुआ है. इस रिपोर्ट पर अब सेनाध्यक्ष का बयान सामने आया है. सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Army Chief Gen Manoj Mukund Naravane) ने कैग की रिपोर्ट पर कहा है कि ये रिपोर्ट 2015-16 के बारे में है. ये पुरानी रिपोर्ट है. मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि इन जगहों के लिए हमारी पूरी तैयारी है. सैनिकों की जो भी जरूरत हैं, हम उन्हें पूरा कर रहे हैं.

आम बजट (Union Budget 2020) में रक्षा बजट पर सेनाध्यक्ष ने कहा, साल दर साल रक्षा बजट में लगभग 8% की मामूली वृद्धि देखी है. इस बार के बजट का प्रबंधन और उसका पूरा उपयोग कैसे करें, इस बारे में अध्ययन करेंगे. हम इस बात पर ध्यान देंगे कि बजट में क्या आवंटन किए गए हैं. पिछले साल ही हमने 4-5 अलग अलग प्रकार के आधुनिक हथियार प्रणालियों और प्लेटफार्मों को सेना में शामिल किया. आधुनिकीकरण कभी मुद्दा नहीं रहा.



CAG की रिपोर्ट से मचा था बवाल बता दें कि सोमवार को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में CAG की रिपोर्ट पेश की गई. इसमें कई सवाल उठाए गए थे. इसके अनुसार, लेह, लद्दाख, सियाचिन (Siachen) और डोकलाम जैसे ऊंचे व ठंडे क्षेत्रों में दिन रात ड्यूटी पर तैनात भारतीय सैनिकों को जरूरत का सामान नहीं मिल पा रहा है. इन दुर्गम जगहों पर तैनात सैनिकों को बर्फ में चलने के लिए जूते, गर्म कपड़े, स्लीपिंग बैग और सन ग्लासेज की गंभीर किल्लत है. जवानों के पास खाने-पीने का जरूरी सामान भी कम है.

जवानों को मिली जरूरत से कम एनर्जी
रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि ऊंचे क्षेत्र में सैनिकों को रोजाना जरूरत पड़ने वाली एनर्जी के हिसाब से राशन तय किया जाता है. हालांकि, बेसिक फूड आइटम की किल्लत की वजह से सैनिकों को 82 फीसदी तक कम कैलोरी मिली. लेह की एक घटना का जिक्र करते हुए CAG ने रिपोर्ट में कहा कि यहां से स्पेशल राशन को सैनिकों के लिए जारी हुआ दिखा दिया गया, लेकिन उन्हें हकीकत में ये सामान मिला ही नहीं था.

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First published: February 4, 2020, 4:59 PM IST
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