COVID-19: इंडियन आर्मी के डॉक्टरों ने अपने हाथों में ली सबसे बड़े क्वारंटाइन सेंटर्स में से एक की कमान

COVID-19: इंडियन आर्मी के डॉक्टरों ने अपने हाथों में ली सबसे बड़े क्वारंटाइन सेंटर्स में से एक की कमान
सांकेतिक तस्वीर

इस आइसोलेशन सेंटर (Isolation Center) में रखे गए लोगों में से 932 दिल्ली के निजामुद्दीन में पिछले महीने हुए तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के सम्मेलन से जुड़े हुए हैं. इसमें 376 कोरोना वायरस (Coronavirus) के पॉजिटिव मामले भी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2020, 5:48 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय सेना (Indian Army) के डॉक्टरों (Doctors) की एक टीम और नर्सिंग स्टाफ (Nursing Staff) ने दिल्ली के एक क्वारंटाइन सेंटर (Quarantine Center) का काम-काज अपने हाथों में ले लिया है. यह क्वारंटाइन सेंटर देश के सबसे बड़े क्वारंटाइन सेंटर्स में से एक है. इस सेंटर की देखरेख अपने हाथों में लेने वाली सेना की इस टीम में 40 लोग हैं. जिनमें 6 मेडिकल ऑफिसर (Medical Officer) और 18 पैरामेडिक शामिल हैं, जो उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली के नरेला (Narela) में सवेरे 8 बजे से रात के 8 बजे तक आइसोलेशन यूनिट्स (Isolation Units) को संभालते हैं. इन सभी ने स्वयं से फैसिलिटी में ही रहने का निश्चय किया है.

इस आइसोलेशन सेंटर (Isolation Center) में रखे गए लोगों में से 932 दिल्ली के निजामुद्दीन में पिछले महीने हुए तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के सम्मेलन से जुड़े हुए हैं. इसमें 376 कोरोना वायरस (Coronavirus) के पॉजिटिव मामले भी हैं.

दिल्ली सरकार के डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को आराम देने के लिए उठाया गया कदम
1 अप्रैल से ही भारतीय सेना (Indian Army) इस सेंटर की देख-रेख में दिल्ली सरकार की मदद कर रही है. देशभर में कोरोना वायरस के मामलों के तेजी से प्रसार के बाद इस सुविधा का निर्माण किया गया था. गुरुवार से 40 स्वास्थ्यकर्मियों की इस टीम ने सवेरे 8 बजे से रात 8 बजे तक 12 घंटे के लिए इस सेंटर को संभालना शुरू किया था. ऐसा दिल्ली सरकार के डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को आराम देने के लिए किया गया. अब ये स्वास्थ्यकर्मी रात में इस क्वारंटाइन सेंटर को सुनिश्चित करेंगे कि रात में भी क्वारंटाइन सेंटर (Quarantine Center) आराम से काम करे.
आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'शुरुआती तौर पर मित्र देशों से आए 250 विदेशी नागरिकों को भी इसी सेंटर में रखा गया है. बाद में यहां करीब 1000 अन्य लोगों को निजामुद्दीन मरकज (Nizamuddin Markaz) से लाया गया.'



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