आतंकियों के शव रस्सियों से बांधकर क्यों ले गए जवान? सेना ने बताई ये वजह

भारतीय सैनिकों का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी के शव को रस्सियों से घसीट रहे हैं.

भाषा
Updated: September 16, 2018, 8:37 AM IST
आतंकियों के शव रस्सियों से बांधकर क्यों ले गए जवान? सेना ने बताई ये वजह
रस्सियों से बांध कर आतंकियों का शव ले जाना एक प्रक्रिया : सेना
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Updated: September 16, 2018, 8:37 AM IST
भारतीय सेना के एक बड़े अधिकारी ने शनिवार को सेना की एक प्रक्रिया से जुड़ी अहम जानकारी दी. सेना के दक्षिण पश्चिम कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मेथसन ने बताया कि आतंकियों के शवों को रस्सियों से बांधकर ले जाना सेना की एक प्रक्रिया थी. ऐसा इसलिए किया गया ताकि उनके शरीर से बंधे विस्फोटकों व ग्रेनेड में होने वाले विस्फोट के खतरे से बचा जा सके .

चेरिश मेथसन ने संवाददाताओं से कहा, "आतंकी अपने शरीर से विस्फोटक (आईईडी) व ग्रेनेड बांध लेते हैं. सैनिक जब उनके शवों को उठाते हैं तो उनके लिए हमेशा खतरा बना रहता है. आतंकियों के शवों को रस्सी से बांध कर ले जाना सेना की एक प्रक्रिया थी, ताकि उन पर बंधे विस्फोटक सामग्री में विस्फोट की घटना में बचाव हो सके."

उल्लेखनीय है कि भारतीय सैनिकों का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी के शव को रस्सियों से घसीट रहे हैं. कुछ लोगों ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन बताया. लेफ्टिनेंट जनरल मेथसन ने कहा कि इसका जवाब दिया जाना चाहिए कि देश की रक्षा के लिए लड़ रहे सैनिकों की जिंदगी ज्यादा मायने रखती है या आतंकवादियों के मानवाधिकार का मुद्दा.

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सेना में पुनर्गठन के सवाल पर सैन्य कमांडर ने कहा कि दुनिया भर की सेनाएं समय समय पर अपनी समीक्षा करती हैं ताकि यह देखा जा सके कि उनका ढांचा संभावित खतरों से लड़ने के अनुकूल है या नहीं. उन्होंने कहा, "प्रत्येक इकाई को अपनी समीक्षा करने का अधिकार है. एक अध्ययन का आदेश दिया गया था लेकिन अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है . किसी को किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए."

सैन्य कमांडर ने बताया कि हाइफा दिवस के सौ साल पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में सेना प्रमुख बिपिन रावत जयपुर आएंगे. रावत यहां हाइफा मूर्ति के विमोचन कार्यक्रम में भी भाग लेंगे.

इस्राइल में सौ साल पहले हाइफा शहर को तुर्कों के कब्जे से मुक्त करवाने में अपनी जान न्योछावर करने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए हाइफा दिवस मनाया जाता है. सौ साल पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम 23 सितंबर को यहां हो रहा है. मेथसन ने कहा कि बहुत कम भारतीय ही इस दिवस के बारे में जानते हैं लेकिन इस्राइल में हर साल इस दिवस को मनाते हैं.
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