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सैन्य अधिकारी ने कहा- सेना में समलैंगिकता और व्यभिचार हो दंडनीय अपराध

News18India
Updated: November 1, 2019, 5:29 AM IST
सैन्य अधिकारी ने कहा- सेना में समलैंगिकता और व्यभिचार हो दंडनीय अपराध
प्रतीकात्मक फोटो.

सैन्य अधिकारी ने समलैंगिकता (Homosexuality) और व्यभिचार (Adultery) के संबंध में रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) के समक्ष चिंता जताई है. अधिकारी ने कहा कि सेना में ये चरित्र उचित नहीं हैं. ऐसा करने पर दंड़ दिया जाना चाहिये.

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  • Last Updated: November 1, 2019, 5:29 AM IST
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नई दिल्ली. सैन्य अधिकारी ने समलैंगिकता(Homosexuality) और व्यभिचार (Adultery) को दंडनीय अपराध के दायरे में रखने की मांग की है. इस संबंध में सेना के अधिकारी ने रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) से संपर्क किया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने एक साल पहले समलैंगिकता और व्यभिचार को गैर-अपराधिक कृत्य करार दिया था.

वहीं सेना का कहना है कि सैन्य अधिनियम (Military Act) में प्रावधान थे जिनके तहत समलैंगिकता और व्यभिचार के लिए आरोपियों को दंडित किया जाता था. लेकिन अब उन्हें इसके लिए अलग धारा के तहत दंडित किया जाता है.

रक्षा मंत्रालय के सामने जताई चिंता
सूत्रों के अनुसार सेना ने इन कानूनों को खत्म करने के मामले में रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के सामने चिंता जाहिर की है. सेना ने कहा कि दोनों कृत्यों को दंडनीय रखा जाना एक निवारण की तरह है. ऐसा नहीं होने पर गंभीर गैर-अनुशासनिक काम बढ़ेंगे जो समस्या पैदा कर सकते हैं.

भारतीय सेना में सहायक जनरल जनरल अश्विनी कुमार ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत की. इसमें उन्होंने कहा कि कुछ मामले 'कानूनी तौर पर सही लेकिन नैतिक रूप से गलत' हो सकते हैं. कुमार ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने जो कुछ भी कहा है, वह जमीन का कानून है लेकिन सेना के बीच इस तरह के कानून कई बार अनुशासन को खत्म कर सकते हैं.

कानून खत्म करने से नहीं दे पा रहे सजा
इस सवाल पर कि क्या सेना सु्प्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा करेगी? इस पर उन्होंने कहा कि ऐसे कानून का कारण सेना समलैंगिकता और व्यभिचार के मामलों में अधिकारियों को दंडित नहीं कर पा रही है. कुमार ने सेना के अधिनियम 45 का जिक्र करते हुये कहा कि समलैंगिकता और व्यभिचार के मामले में सेना को दूसरी धाराओं के तहत दंड़ित करना पड़ रहा है.
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अधिकारी ने कहा कि समलैंगिकता और व्यभिचार के मामले में आरोपी सैन्य अधिकारी पर सेना के अधिनियम 45 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. इस तरह का व्यवहार उसका अपेक्षित चरित्र नहीं है. समलैंगिता को सेना की धारा 46 के चहत निपटाया जाता था जो किसी क्रूर, अभद्र, अप्राकृतिक प्रकार के आचरण के लिए निर्धारित है.

सेना में नैतिक मर्यादा जरूरी
कुमार ने कहा कि सेना में नैतिक मर्यादा और भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जा सकता. कुमार ने कहा कि पांच से छह अधिकारियों को नैतिक मर्यादा के लिए दंडित किया गया है, लेकिन आरोपों के बारे में नहीं बताया गया. कुमार ने कहा कि सेना में समलैंगिकता और व्यभिचार आज भी अपराध की श्रेणी में आते हैं. ऐसे मामले दंड के दायरे में होने चाहिए.

बता दें कि इसी साल की शुरुआत में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारतीय सेना में समलैंगिक यौन संबंध और व्यभिचार की अनुमति नहीं दी जाएगी. रावत ने कहा था कि हमने कभी नहीं सोचा था कि सेना में ऐसा हो सकता है. जो भी हमने सोचा था उसे आर्मी एक्ट में शामिल किया था.

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First published: November 1, 2019, 4:11 AM IST
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