सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तलोजा जेल से रिहा किए गए अर्नब गोस्वामी

जेल से रिहाई के बाद अर्नब के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी.
जेल से रिहाई के बाद अर्नब के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी.

Arnab Goswami Case: बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'यदि हम एक संवैधानिक न्यायालय के रूप में व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा नहीं करेंगे, तो कौन करेगा?

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 9:02 PM IST
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नई दिल्ली. रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन चीफ अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) की अंतरिम जमानत याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने सुनवाई हुई. कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को रिहाई दे दी. कोर्ट के आदेश के बाद अर्नब को तलोजा जेल से रिहा कर दिया गया है. जेल से रिहाई के बाद अर्नब के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी.

दरअसल, बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, 'यदि हम एक संवैधानिक न्यायालय के रूप में व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा नहीं करेंगे, तो कौन करेगा? अगर राज्य सरकारें किसी व्यक्ति को जानबूझकर टारगेट करती हैं, तो उन्हें पता होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए शीर्ष अदालत है.' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट का अंतरिम जमानत की मांग ठुकराना गलत था. कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से इस सब (अर्नब के टीवी पर तानो) को नजरअंदाज करने की नसीहत दी.


बॉम्बे हाईकोर्ट ने नहीं दी थी जमानत
बता दें कि अर्नब ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा जमानत से इनकार किए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाईक को आत्महत्या के लिए कथित रूप से उकसाने के मामले में अर्नब और दो अन्य लोगों को अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए उन्हें राहत के लिए स्थानीय अदालत जाने को कहा था.



अलीबाग पुलिस चाहती थी अर्नब की हिरासत
दरअसल, अलीबाग पुलिस अर्नब की पुलिस हिरासत चाहती है. इसकी मांग करते हुए अभियोजन पक्ष के विशेष सरकारी वकील पी घरात ने कहा कि अर्नब की गिरफ्तारी जरूरी थी, क्योंकि अन्वय की आत्महत्या से पहले लिखे गए पत्र में उनका नाम था. यदि गिरफ्तारी जरूरी नहीं होती, तो मजिस्ट्रेट न्यायिक हिरासत में उनसे पूछताछ की अनुमति नहीं देते.
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