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स्टैन स्वामी की मौत के बाद आर्सेनल कंसल्टिंग की नई रिपोर्ट में दावा, प्लांट किए गए थे दस्तावेज

पर्किंसन बीमारी से पीड़ित स्टैन स्वामी का सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया था, जहां उन्हें 29 मई को भर्ती कराया गया था.  फाइल फोटो

पर्किंसन बीमारी से पीड़ित स्टैन स्वामी का सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया था, जहां उन्हें 29 मई को भर्ती कराया गया था. फाइल फोटो

Arsenal Consulting की रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2016 से लेकर नवंबर 2017 तक सुरेंद्र गाडलिंग के कम्प्यूटर में छेड़छाड़ की गई और कम से कम 14 आपराधिक पत्रों को प्लांट किया गया. ये काम उसी हैकर ने किया, जिसने रोना विल्सन के सिस्टम में 30 से ज्यादा फाइलें प्लांट की थीं.

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    नई दिल्ली. एक्टिविस्ट स्टैन स्वामी (Stan Swamy) की मौत के एक दिन बाद बोस्टन स्थित अमेरिकी फोरेंसिक एजेंसी आर्सेनल कंसल्टिंग (Arsenal Consulting) ने बड़ा दावा किया है. अमेरिकी एजेंसी ने कहा है कि स्टैन स्वामी के साथ सख्त आतंक विरोधी कानूनों के तहत गिरफ्तार सुरेंद्र गाडलिंग के कम्प्यूटर में आपराधिक सबूतों को प्लांट किया गया था. इन लोगों को प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) समूह के साथ कथित जुड़ाव के मामले में गिरफ्तार किया गया था.

    एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सुरेंद्र गाडलिंग के कम्प्यूटर में उनकी गिरफ्तारी के दो साल पहले छेड़छाड़ की गई थी. गाडलिंग की गिरफ्तारी एक ईमेल के लिए हुई थी, जो उन्हें भेजा गया था. यह ईमेल स्टैन स्वामी जैसे अन्य लोगों को भी भेजा गया था. ऐसे में आशंका इस बात की है कि स्टैन स्वामी के कम्प्यूटर से भी छेड़छाड़ हुई हो सकती है. 84 वर्षीय ईसाई पादरी स्टैन स्वामी और सुरेंद्र गाडलिंग उन 16 लोगों में हैं, जिन्हें भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी बनाया गया है.

    आरोपियों का दावा- पेश किए गए सबूत फर्जी
    अपनी मौत तक स्टैन स्वामी और अन्य लोग लगातार इस बात को दोहराते रहे हैं कि उनके खिलाफ दंगा भड़काने और माओवादी गुरिल्ला से संबंध रखने को लेकर पेश किए गए सबूत फर्जी हैं. एनआईए का दावा है कि स्टैन स्वामी और अन्य 15 लोगों ने 3 साल पहले महाराष्ट्र स्थित भीमा कोरेगांव में दंगा भड़काया. भीमा कोरेगांव में लाखों दलित हर साल उच्च जाति के लोगों के खिलाफ अपनी ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं.

    कड़े कानूनों के दुरुपयोग का आरोप
    मामले में गिरफ्तार सभी 16 लोगों में स्टैन स्वामी सबसे बुजुर्ग थे और उन्हें अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था, जिसमें पूछताछ के लिए लंबे समय तक हिरासत में रखने का प्रावधान है. इन लोगों पर प्रधानमंत्री की हत्या के लिए साजिश करने का आरोप भी लगाया गया था. आलोचकों को कहना है कि सरकार अपने विरोधियों और लेफ्ट के प्रति झुकाव रखने वाले बुद्धिजीवियों को निशाना बनाने के लिए कड़े कानूनों का दुरुपयोग कर रही है.

    'प्लांट किए गए थे आपराधिक दस्तावेज'
    इस साल की शुरुआत में अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट ने भी इसी तरह की रिपोर्ट प्रकाशित की थी, इस रिपोर्ट को भी आर्सेनल कंसल्टिंग ने जारी किया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि हैकर्स ने मामले में गिरफ्तार रोना विल्सन के कम्प्यूटर में 30 से ज्यादा दस्तावेज प्लांट किए थे. आर्सेनल की ताजा रिपोर्ट जून 2021 की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 53 वर्षीय दलित एक्टिविस्ट सुरेंद्र गाडलिंग के कम्प्यूटर में भी आपराधिक दस्तावेजों को प्लांट करने का मामला फोरेंसिक जांच में सामने आया है.

    आर्सेनल ने सुरेंद्र गाडलिंग के हार्ड ड्राइव का विश्लेषण किया था. रिपोर्ट में कहा गया है, "यह दर्ज किया जाना चाहिए कि आर्सेनल के सामने आया यह अब तक का सबसे गंभीर मामला है, जिसमें सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है." आर्सेनल ने अपनी वेबसाइट पर जानकारी दी है कि उन्होंने बोस्टन मैराथन बॉम्बिंग सहित कई हाई प्राफाइल केस पर काम किया है.

    NIA ने प्रतिक्रिया देने से किया इनकार
    रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2016 से लेकर नवंबर 2017 तक सुरेंद्र गाडलिंग के कम्प्यूटर में छेड़छाड़ की गई और कम से कम 14 आपराधिक पत्रों को प्लांट किया गया. ये काम उसी हैकर ने किया, जिसने रोना विल्सन के सिस्टम में 30 से ज्यादा फाइलें प्लांट की थीं. सुरेंद्र गाडलिंग को 3 साल पहले गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद से वे जेल में हैं. आर्सेनल कंसल्टिंग की रिपोर्ट पर एनआईए ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया और कहा कि मामला अभी अदालत में है.

    पर्किंसन बीमारी से पीड़ित स्टैन स्वामी का सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया था, जहां उन्हें 29 मई को भर्ती कराया गया था. उन्हें एल्गार परिषद मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने अक्टूबर 2020 में रांची से गिरफ्तार किया था.

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