आर्टिकल 35 A: तो क्या बीजेपी के 'मॉडल' का हर हाल में विरोध करेंगे कश्मीरी?

फर्स्टपोस्ट.कॉम
Updated: August 13, 2017, 8:13 AM IST
आर्टिकल 35 A: तो क्या बीजेपी के 'मॉडल' का हर हाल में विरोध करेंगे कश्मीरी?
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Updated: August 13, 2017, 8:13 AM IST
सफ़ीना वानी

श्रीनगर के सबसे प्रमुख बाजार लाल चौक के कारोबारी इस वक्त दहशत में हैं. वो घाटी में कयामत को आते हुए देखने की बात करते हैं. ये कारोबारी सुप्रीम कोर्ट के संविधान की धारा 35A को खत्म करने की आशंका से डरे हुए हैं. इनका मानना है कि अगर देश की सबसे बड़ी अदालत ने संविधान की इस धारा को खत्म किया, तो प्रलय ही आ जाएगा. इस धारा के तहत जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोग, राज्य में अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं.

श्रीनगर के रहने वाले गुलजार अहमद पेशे से ड्राइवर हैं. वो कहते हैं कि अदालत ने धारा 35A खत्म की तो बहुत बवाल होगा. पास में ही कपड़े बेचने वाले तीन लोग भी यही बात कहते हैं.

एक फेरीवाला कहता है कि सोचिए अगर सुप्रीम कोर्ट ने धारा 35A खत्म कर दी तो क्या होगा? बाहर से लोग आकर यहां संपत्ति खरीदेंगे. यहां बस जाएंगे. फिर वो सेना की मदद से हम पर राज करेंगे. यही तो इजरायल करता रहा है.

इस दुकानदार के आस-पास खड़े लोग खामोश रहते हैं. मानो उसकी हां में हां मिला रहे हैं. पिछले एक हफ्ते से घाटी में लोग यही चर्चा कर रहे हैं. आज के हालात लोगों को उस दौर की याद दिला रहे हैं जब बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में हालात भड़क उठे थे.

धारा 35A को लेकर कश्मीर के चौक-बाजारों के साथ-साथ घरों में, दफ्तरों में, सड़कों पर और यहां तक कि गाड़ियों में एक साथ बैठे लोग चर्चा कर रहे हैं.


लोगों को स्थाई निवासी होने की वजह से मिलने वाले संपत्ति, रोजगार और वजीफे के हक छिनने का डर सता रहा है. उन्हें लगता है कि धारा 35A खत्म होने पर बाहरी लोग आकर कश्मीर पर कब्जा कर लेंगे.

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श्रीनगर के टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर पर काम करने वाले मुश्ताक अहमद ऐसे ही लोगों में से एक हैं. वो कहते हैं कि कश्मीरी लोग राज्य के कानून में छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे. हमें आज भी उस दिन का अफसोस है जब शेख अब्दुल्ला ने दिल्ली की सरकार पर भरोसा किया था.

मुश्ताक चेतावनी भरे अंदाज में कहते हैं कि भारत को समझना होगा कि कश्मीर अब वैसा नहीं है, जैसा पहले था. इसके संवैधानिक अधिकार से छेड़छाड़ का लोग जी-जान से विरोध करेंगे.


कश्मीर के इस माहौल की वजह सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई एक याचिका है. ये अर्जी एक एनजीओ वी द सिटिजेन्स ने 2014 में दाखिल की थी. इसमें सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि वो संविधान की धारा 35A को खत्म कर दे.

इस धारा के तहत जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को एक खास अधिकार मिलता है. जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को ये अधिकार मिलता है कि वो राज्य के स्थाई निवासी होने की शर्तें तय करे. जो स्थाई निवासी हैं उन्हें क्या अधिकार और सुविधाएं मिलेंगी, ये भी जम्मू-कश्मीर की विधानसभा धारा 35A के तहत तय कर सकती है.

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इस धारा को 1954 में राष्ट्रपति के एक आदेश से जोड़ा गया था. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकारों को नोटिस भेजा था. मगर सिर्फ राज्य सरकार ने अपना जवाब दाखिल किया है. इस मामले पर अपना पक्ष रखने के बजाय केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर बड़ी बहस की वकालत की. केंद्र सरकार के इस रवैये की वजह से ही कश्मीर के लोग फिक्रमंद हैं. बहुत से लोग कह रहे हैं कि मोदी सरकार के रुख से साफ है कि वो संविधान की धारा 370 को पूरी तरह से खत्म करने की तैयारी कर रही है. धारा 35A को हटाना इस दिशा में पहला कदम होगा.

कश्मीर के लोगों को लगता है कि बीजेपी की सरकार राज्य की आबादी बदलकर कश्मीर की समस्या को हल करने की कोशिश कर रही है.


विपक्षी दल और अलगाववादी कह रहे हैं कि अगर संविधान की धारा 35A खत्म की गई तो कश्मीर में बगावत हो जाएगी. खुद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि अगर ये धारा संविधान से हटी तो कश्मीर में कोई तिरंगा लहराने वाला नहीं बचेगा.

कश्मीर के आम लोग अपने हक की लड़ाई के लिए खुद को दिमागी तौर पर तैयार कर रहे हैं.

श्रीनगर में टैक्सी चलाने वाले जुबैर बट कहते हैं कि पिछले कुछ साल में उनका कर्ज बढ़ता ही गया है. ऐसा कश्मीर में हिंसा की वजह से हुआ है. जुबैर कहते हैं कि एक तरफ तो केंद्र सरकार घाटी में शांति बहाली की बात करती है. वहीं, दूसरी तरफ अदालतों के जरिए कश्मीर का हक छीनने की कोशिश में है. जुबैर सवाल उठाते हैं कि कश्मीर में आतंकवाद की आग को आखिर कौन भड़का रहा है?

अलगाववादी नेता यासीन मलिक के इलाके मैसूमा में तो इस मुद्दे पर तनाव बढ़ता जा रहा है. यहां लोग अक्सर सुरक्षा बलों से भिड़ते रहे हैं. उनका कहना है कि कश्मीर का हक छीनने की ये हिंदुत्व की साजिश है.


इलाके के निवासी अमीर इलाही कहते हैं कि जब से बीजेपी ने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई है, तभी से लग रहा था कि हालात बिगड़ेंगे. इलाही कहते हैं कि वो पूरी ताकत से संघ की साजिशों का विरोध करेंगे.

श्रीनगर में बहुत से लोग तो सवाल उठाते हैं कि आखिर पीडीपी अभी भी बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार क्यों चला रही है? श्रीनगर की नई बस्तियों में रहने वाले सरकारी कर्मचारी भी महबूबा मुफ्ती के बीजेपी से गठजोड़ पर नाराज हैं.


हैदरपुरा इलाके के रहने वाले जावीद डार कहते हैं कि हर कश्मीरी को सियासी मामलों की सटीक जानकारी है. संघ किसी मुगालते में न रहे कि वो हमें बेवकूफ बना सकते हैं. हम बेहद विवादित इलाके में रहते हैं. हमें अपने अधिकारों के बारे में पता है.

श्रीनगर के एमए रोड इलाके में इन दिनों विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला तेज हो गया है. खास तौर से महिला कॉलेज की छात्राएं इसकी अगुवाई करती हैं. छात्रा इंशा मीर कहती हैं कि मोदी सरकार कश्मीर में तनाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है. इंशा कहती हैं कि बीजेपी चाहती है कि कश्मीर में हिंसा और डर का माहौल बना रहे. वो लोगों को 2016 की तरह ही भड़का रहे हैं, ताकि जब लोग सड़कों पर उतरें तो उन्हें गोलियों का शिकार बनाया जा सके. उन पर पेलेट गन से निशाना साधा जा सके. उन पर रासुका लगाकर जेलों में ठूंसा जा सके.

श्रीनगर के पुराने मुहल्लों में केंद्र की तरफ से कश्मीरियों को बार-बार ठगे जाने की चर्चा होती है. राजौरी कदल के रहने वाले रिटायर्ड इंजीनियर मोहम्मद यासीन कहते हैं कि भारत को सिर्फ कश्मीर चाहिए, कश्मीरी नहीं. वरना वो यहां पर भारत से लोगों को लाकर बसाने की बातें नहीं करते. यासीन चेतावनी देते हैं कि भारत किसी मुगालते में न रहे. कश्मीरियों वाजिब मांगों को दबाया नहीं जा सकता.

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हब्बा कदल के रहने वाले एक कश्मीरी पंडित सुरेश ने कहा कि धारा 35A का विवाद सरकार की नासमझी को दिखाता है. वो कहते हैं कि सरकार आज तक कश्मीरी पंडितों को घाटी में नहीं वापस बसा सकी है. ऐसे में बाहर से लोगों को लाकर बसाने की बात करना नासमझी नहीं तो और क्या है?
सुरेश कहते हैं कि केंद्र सरकार सिर्फ नए-नए मुद्दों के जरिए हंगामा खड़ा करती है. वो बातें करने के बजाय यहां आकर रहें, तो समझ में आएगा कि ऊल-जलूल बयान देने का क्या नुकसान होता है?

सुरेश कहते हैं कि उनके कई रिश्तेदार यहां से जा चुके हैं. यहां रोजाना होने वाली हिंसक घटनाओं की वजह से वो भी वापस नहीं आना चाहते. फिर यहां रोजगार और कारोबार के भी मौके नहीं हैं. आए दिन होने वाले प्रदर्शनों और हड़तालों की वजह से यहां कोई आना नहीं चाहता.


यानी चाहे फेरीवाले हों, या दुकानदार, सरकारी कर्मचारी हों या फिर छात्र-छात्राएं. सबकी राय एक ही है.
श्रीनगर के एक होटल कारोबारी कहते हैं कि हालात बिगड़े तो उनके कारोबार को नुकसान होगा. फिर भी हर कश्मीरी अपने हक की लड़ाई लड़ने को तैयार है. वो कहते हैं कि भले ही सूखी दाल-रोटी खानी पड़े, मगर वो केंद्र की साजिश नाकाम नहीं होने दे सकते.

कश्मीरी कारोबारी संगठन कश्मीर ट्रेडर्स ऐंड मैन्यूफैक्चरर्स फेडरेशन (KTMF) के महमूद यासीन खान ने कहा कि लोगों पर जब भी जुल्म होते हैं, तो वो उसका मुकाबला करते हैं.


यासीन खान कहते हैं कि भारत सरकार को समझना होगा कि कश्मीर में हालात पहले से ही बिगड़े हुए हैं. ऐसे में वो अगर कानून से छेड़खानी करते हैं, तो जाहिर है लोग और भड़केंगे. यासीन कहते हैं कि अगर हिंसा भड़की तो अस्सी फीसद कश्मीर घाटी जल उठेगी.
First published: August 13, 2017
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