आर्टिकल 370 हटने से इस समुदाय में जगी न्याय की उम्मीद, 62 साल से झेल रहा था यातनाएं

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटने का जश्न मना रहे वाल्मीकि समुदाय के युवा एकलव्य ने कहा, ‘इससे 62 साल से चले आ रहे अन्याय का अंत हो जाना चाहिए.’

भाषा
Updated: August 9, 2019, 5:44 PM IST
आर्टिकल 370 हटने से इस समुदाय में जगी न्याय की उम्मीद, 62 साल से झेल रहा था यातनाएं
आर्टिकल 370 हटने से वाल्मीकि समुदाय में जगी न्याय की उम्मीद
भाषा
Updated: August 9, 2019, 5:44 PM IST
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद वाल्मीकि समुदाय (Valmiki Community) के तीन हजार से अधिक लोगों को सम्मान की नजर से देखे जाने की उम्मीद जगी है. वाल्मीकि समुदाय के पूर्वजों को 1957 में जम्मू-कश्मीर सरकार पंजाब से लेकर आई थी, लेकिन यहां उन्हें कभी नागरिक नहीं माना गया और उनके अधिकारों से भी वंचित रखा गया. हालांकि उन्हें रहने के लिए जमीन जरूर दी गई.

अनुच्छेद 370 (Article 370)हटने का जश्न मना रहे समुदाय के युवा एकलव्य ने कहा,  ‘इससे 62 साल से चले आ रहे अन्याय का अंत हो जाना चाहिए.’ एकलव्य ने कहा कि उनके वंशज उस समय मुख्यमंत्री रहे बख्शी गुलाम मोहम्मद के निमंत्रण पर 1957 में पंजाब के गुरदासपुर से सफाई कार्यों के लिए यहां आए थे.

वाल्मिकी समुदाय की महिला राधिका ने कहा, ‘चूंकि जम्मू-कश्मीर सरकार को शहर की साफ-सफाई के लिये श्रमिकों की आवश्यकता थी, इसलिए उन्होंने हमारे पूर्वजों को भूमि आवंटित की और वे उसी पर बस गए.’

कोर्ट में लड़ी लंबी लड़ाई, फिर भी नहीं मिला न्याय

एकलव्य अफसोस जताते हुए कहते हैं कि हमें कभी राज्य का विषय नहीं माना गया, कभी राज्य सरकार की नौकरी और अन्य अधिकार प्राप्त करने का हक नहीं दिया गया. एकलव्य, राधिका और उनके समुदाय के दस अन्य सदस्य भेदभाव को खत्म करने के लिये सुप्रीम कोर्ट समेत विभिन्न अदालतों में लंबी लड़ाई लड़ चुके हैं.

जम्मू-कश्मीर सरकार ने नहीं दी नौकरी
एकलव्य ने कहा, ‘हम यहां सिर्फ नगर निगम में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर सकते हैं, वह भी बिना नियमितीकरण या पदोन्नति की उम्मीद के.’ एकलव्य वर्षों पहले स्नातक की पढ़ाई कर चुके हैं, इसके बावजूद आज तक जम्मू-कश्मीर सरकार में नौकरी नहीं पा सके हैं. उन्होंने कहा, "अब राज्य के पास कोई विशेष दर्जा नहीं है, लिहाजा राज्य के विषय की अवधारणा अपने आप ही खत्म हो गई है. इससे सभी भारतीयों और जम्मू-कश्मीर के सभी स्थायी निवासियों को एक जैसा सम्मान मिलना चाहिये." उन्हें उम्मीद है कि उनके जैसे लोगों को भी जल्द ही नवगठित जम्मू-कश्मीर संघ शासित प्रदेश में सरकारी नौकरियों और अन्य अधिकारों का हकदार घोषित किया जाएगा.
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एकलव्य और राधिका जम्मू शहर के क्रिश्चन कॉलोनी, बख्शी नगर, डोगरा हॉल, रेशम घर, वाल्मीकि कॉलोनी और गांधी नगर इलाके में रहने वाले अपने समुदाय के 3,000 से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं. जम्मू में जमीन होने और जिंदगी वहीं गुजारने के बावजूद वे मतदान, उच्च शिक्षा, राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली छात्रवृत्ति और नौकरियों में आरक्षण के अधिकार से वे महरूम हैं.

पीएम मोदी को दी बधाई
राधिका ने कहा, "हम जम्मू-कश्मीर के भेदभावपूर्ण कानूनों के खत्म करने का साहसिक फैसला लेने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक इच्छाशक्ति को सलाम करते हैं."

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First published: August 9, 2019, 5:35 PM IST
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