लाइव टीवी

आर्टिकल 370 : SC ने कहा- कश्मीर में जरूरी सेवाओं के लिए इंटरनेट सेवाएं बहाल हो, सभी पाबंदियों की 7 दिन में हो समीक्षा

News18Hindi
Updated: January 10, 2020, 12:10 PM IST
आर्टिकल 370 : SC ने कहा- कश्मीर में जरूरी सेवाओं के लिए इंटरनेट सेवाएं बहाल हो, सभी पाबंदियों की 7 दिन में हो समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 पर लगाई गई रोक से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अक्टूबर, 2019 में हुई एक सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल उठाए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 10, 2020, 12:10 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में आर्टिकल-370 (Article 370) हटाने के बाद से लगाई गई रोक पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कश्मीर में हमारी प्राथमिकता लोगों की स्वतंत्रता और सुरक्षा देना है. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि कश्मीर में अभिव्‍यक्ति की आजादी सबसे अहम है. इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा है कि बहुत जरूरी होने पर तय समय के लिए ही इंटरनेट बंद किए जाने चाहिए. साथ ही दोहाराया कि अनिश्चितकाल के लिए इंटरनेट को बंद नहीं किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी जरूरी सेवाओं के लिए इंटरनेट शुरू किया जाए.

जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि लगातार धारा-144 का गलत इस्तेमाल किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इंटरनेट लोगों के लिए अभिव्यक्ति की आजादी जैसा है. साथ ही कहा कि यह मौलिक अधिकार जैसा ही है. उन्होंने कहा कि ठोस वजह के बिना इंटरनेट बंद नहीं किया जा सकता.

बता दें कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 के अधिकांश प्रावधान समाप्त करने के बाद वहां लगाए गए प्रतिबंधों को 21 नवंबर को सही ठहराया था. केंद्र ने अदालत में कहा था कि सरकार के एहतियाती उपायों की वजह से ही राज्य में किसी व्यक्ति की न तो जान गई और न ही एक भी गोली चलानी पड़ी. गुलाम नबी आजाद के अलावा, कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन और कई अन्य ने घाटी में संचार व्यवस्था ठप होने सहित अनेक प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की थीं.

केंद्र सरकार ने दिया था यह जवाब



केंद्र ने कश्मीर घाटी में हिंसा का हवाला देते हुए कहा था कि कई साल से सीमा पार से आतंकवादियों को यहां भेजा जाता था. स्थानीय उग्रवादी और अलगाववादी संगठनों ने पूरे क्षेत्र को बंधक बना रखा था. ऐसी स्थिति में अगर सरकार नागरिकों की सुरक्षा के लिये एहतियाती कदम नहीं उठाती तो यह 'मूर्खता' होती. केंद्र सरकार ने पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 के कई प्रावधान खत्म कर दिए थे. साथ ही राज्‍य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख में बांट दिया था.
(एजेंसी इनपुट के साथ)

ये भी पढ़ें:

गुनाहगारों की फांसी को लेकर निर्भया की मां ने दिया यह बड़ा बयान

2 साल में क्यों दोगुने हो गए देशद्रोह के मामले

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 10, 2020, 10:45 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर

भारत

  • एक्टिव केस

    5,709

     
  • कुल केस

    6,412

     
  • ठीक हुए

    503

     
  • मृत्यु

    199

     
स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 10 (08:00 AM)
हॉस्पिटल & टेस्टिंग सेंटर

दुनिया

  • एक्टिव केस

    1,152,323

     
  • कुल केस

    1,604,718

    +1,066
  • ठीक हुए

    356,660

     
  • मृत्यु

    95,735

    +42
स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
हॉस्पिटल & टेस्टिंग सेंटर