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मुंबई की हवा भी हुई बेहद खराब, महज़ 6 दिन में काले पड़ गए कृत्रिम फेफड़े

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 9:38 AM IST
मुंबई की हवा भी हुई बेहद खराब, महज़ 6 दिन में काले पड़ गए कृत्रिम फेफड़े
मंगलवार को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 340 पार कर गया. (फोटो-PTI)

प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशासन ने बीते गुरुवार को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में कृत्रिम फेफड़े (Artificial Lungs) लगवाए थे. तीन दिन में ही इन फेफड़ों का रंग ग्रे हो गया और एक हफ्ते के अंदर मंगलवार को यह पूरी तरह से काला पड़ गया.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 9:38 AM IST
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मुंबई. देशभर में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इससे भी अछूती नहीं. यहां हवा की गुणवत्ता (Air Quality) इतनी खराब है कि बांद्रा में लगाए गए कृत्रिम फेफड़े (Artificial Lungs) एक हफ्ते में काले पड़ गए. स्थानीय प्रशासन ने ये कृत्रिम फेफड़े लोगों को प्रदूषण से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए लगवाए थे.

प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशासन ने बीते गुरुवार को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में कृत्रिम फेफड़े लगवाए थे. ये फेफड़े हाइ-एफिशिएंसी पार्टिक्युलेट एयर (HEPA) फिल्टर के बनाए गए थे. तीन दिन में ही इन फेफड़ों का रंग ग्रे हो गया और एक हफ्ते के अंदर मंगलवार को यह पूरी तरह से काला पड़ गया.

बता दें कि मंगलवार को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 340 पार कर गया. ये इलाका मुंबई का कॉमर्शियल हब माना जाता है. एयर क्वालिटी का 300 से पार हो जाना बेहद खतरनाक कैटेगरी में आता है.

इसके पहले बीते साल दिसंबर में मुंबई में एयर क्वालिटी इंडेक्स सातवीं बार 200 के पार पहुंच गया था, जो बहुत अस्वस्थकर माना जाता है. वहीं, इसी समय बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स का एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार आठवीं बार 300 के पार पहुंचा था. जबकि, नॉर्थ मुंबई के मलाड का AQI 305 रिकॉर्ड हुआ.

मुंबई की तरह दिल्ली, लखनऊ और बेंगलुरु की सड़कों में भी कृत्रिम फेफड़े लगवाए गए थे, ताकि लोगों को प्रदूषण से हो रहे नुकसान के प्रति जागरूक किया जा सके. दिल्ली में नवंबर में बढ़ते प्रदूषण के चलते सड़क पर लगवाए गए कृत्रिम फेफड़े 6 दिन के अंदर पूरी तरह से काले पड़ गए. वहीं, लखनऊ में 5 दिन में कृत्रिम फेफड़ों का रंग काला पड़ गया, जबकि बेंगलुरु में ये फेफड़े 25 दिन तक ठीक रहे थे.


'वातावरण' नाम से पर्यावरण संगठन चलाने वाले भगवान केशभट बताते हैं, 'मुंबई की सड़कों पर बढ़ते प्राइवेट कार प्रदूषण को बढ़ाते हैं. प्रोफेशनल्स, बिजनेसमैन, कॉर्पोरेट्स सभी अपनी कार से ट्रैवेल करते हैं. करीब 3 लाख कार रोजाना बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में आती-जाती हैं. इसका सीधा असर एयर क्वालिटी पर पड़ता है. गाड़ियों से निकलता धुंआ वायु प्रदूषण का मुख्य कारण हैं. वहीं, कंस्ट्रक्शन साइट की धूल भी प्रदूषण बढ़ाती है.'

वहीं. 'वातावरण' की कैंपेन मैनेजर शिखी कुमार बताती हैं, 'आरे को लेकर हो रहे प्रदर्शन से अब ये समझा जा सकता है कि बात सिर्फ 3 हजार पेड़ों की नहीं है. बात है हमारे चारों तरफ के हरियाली की, जो खत्म हो रही है. मुंबई जैसे शहर के लिए हरियाली बहुत जरूरी है.'ये भी पढ़ें: प्रदूषण का खतरनाक असर, इतने साल कम हो गई लोगों की उम्र

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First published: January 22, 2020, 9:04 AM IST
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