कंप्यूटरों की निगरानी वाले आदेश पर बोले जेटली- राई के बिना ही पहाड़ बना रही कांग्रेस

जेटली ने साफ किया कि सरकार ने इस मामले में कुछ भी नया नहीं किया है. इन एजेंसियों को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में ऐसी ही जिम्मेदारी दी गई थी.

News18Hindi
Updated: December 21, 2018, 8:30 PM IST
कंप्यूटरों की निगरानी वाले आदेश पर बोले जेटली- राई के बिना ही पहाड़ बना रही कांग्रेस
वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल)
News18Hindi
Updated: December 21, 2018, 8:30 PM IST
कंप्यूटर और दूसरे कम्युनिकेशन मीडियम को केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी के दायरे में लाने के आदेश का कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के राज्यसभा में भारी विरोध किया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष के हमले का जवाब दिया है. उन्होंने राज्य सभा में कहा कि इससे आम लोगों के जीवन पर कोई असर नहीं होगा.

जेटली ने साफ किया कि सरकार ने इस मामले में कुछ भी नया नहीं किया है. इन एजेंसियों को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में ऐसी ही जिम्मेदारी दी गई थी. जेटली ने कांग्रेस पर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर राई के बिना ही पहाड़ बना रही है.

राहुल गांधी का PM पर हमला- देश को पुलिस राज बनाने से समस्‍याएं नहीं सुलझेंगी

उच्च सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर अरुण जेटली ने ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि बेहतर होता कि विपक्ष इस मुद्दे को उठाने से पहले पूरी जानकारी हासिल कर लेता. उन्होंने कहा, 'विपक्ष के नेता जो भी विषय उठाते हैं, उसका एक मूल्य होता है, वह काफी मूल्यवान होता है.'

वित्त मंत्री ने आनंद शर्मा की इस बात को सिरे से गलत बताया कि इस आदेश के तहत हर कंप्यूटर और टेलीफोन की निगरानी की जाएगी. जेटली ने कहा कि आज से करीब 100-150 साल पहले एक कानून बना था, टेलीग्राफ अधिनियम. यह कानून पिछली कई सरकारों के कार्यकाल में चलता रहा. जहां जहां राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले आते हैं इस कानून के तहत कुछ एजेंसियों को निगरानी रखने का अधिकार रहा है. इसके लिए एजेंसियां अधिसूचित होती हैं. उन्होंने कहा कि इस बीच काफी तरक्की हुई. कंप्यूटर वगैरह आए. आतंकवादी कंप्यूटर के जरिये से भी काम कर सकते हैं.


वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि 18 साल पहले आईटी कानून आया. संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जो पाबंदियां लगाई गई हैं, उन्हें आईटी कानून की धारा 69 में पूरी तरह शामिल कर लिया गया. इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा भी शामिल हैं.

राहुल गांधी का PM पर हमला- देश को पुलिस राज बनाने से समस्‍याएं नहीं सुलझेंगी
Loading...

जेटली ने कहा कि जब कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा आदि के साथ खिलवाड़ कर रहा होगा, तो इन एजेंसियों को अधिकार दिया गया है वे उस व्यक्ति की निगरानी कर सकती हैं. वित्त मंत्री ने कहा, 'आईटी कानून के तहत यह अधिकार एजेंसियों को ठीक वैसे ही दिया गया है जैसे टेलीग्राफ कानून में है. उसके नियम जब आनंद शर्मा जी सरकार में थे तब बनाये गए कि किन एजेंसियों को इसके लिए अधिकृत किया जाए. 2009 में इसके नियम बने. एजेंसियां वही हैं...आईबी, रॉ, डीआरआई वगैरह वगैरह.’

उन्होंने स्पष्ट किया कि निगरानी का काम कोई भी व्यक्ति नहीं कर सकता. किसी भी व्यक्ति या कंप्यूटर की निगरानी नहीं की जा सकती है. अगर आतंकवादी गतिविधि, कानून व्यवस्था, देश की अखंडता से जब जुड़ा मामला हो, तो अधिसूचित एजेंसियां संबंधित व्यक्ति के उपकरणों की निगरानी कर सकती हैं.

वित्त मंत्री ने कहा कि इन एजेंसियों के बारे में वही आदेश बार बार जारी किया जाता है, जो 2009 में बना था. उन्होंने कहा कि 20 दिसंबर को भी वही आदेश जारी किया गया. उन्होंने कहा कि इसमें लोगों की निजता के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया गया है. जेटली ने कहा, 'आनंद शर्मा, आप वहां पहाड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां राई भी नहीं है.’


इससे पहले यह मुद्दा उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष आजाद ने कहा कि सरकार ने इस आदेश के माध्यम से देश में अघोषित आपातकाल लगा दिया है. कांग्रेस के उपनेता शर्मा ने कहा कि इस आदेश के माध्यम से लोगों की निजता के मूलभूत अधिकार पर हमला किया गया है. (एजेंसी इनपुट के साथ)
First published: December 21, 2018, 8:30 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...