EXCLUSIVE: जेटली ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया, कहा 'वंशवाद के दिन लद गए'

न्यूज़ 18 से खास बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री और भाजपा के नेता अरुण जेटली ने किसी पार्टी या व्यक्ति का नाम लिये बगैर कई पार्टियों पर सीधे निशाना साधा और वंशवाद को पुरानी परंपरा करार दिया.

News18Hindi
Updated: March 14, 2019, 7:15 PM IST
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'परिवारवाद और जातिगत राजनीति का दौर चला गया. अब आप यह कहकर चुनाव नहीं लड़ सकते कि आप फलां परिवार या समाज से हैं. आप देखें कि जातीय आधार पर चलने वाले सारे राजनीतिक दल चूर चूर हुए. साथ ही, परिवारवाद को महत्वपूर्ण मानते रहे दल भी पतन की राह पर दिखे.' यह बात केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने न्यूज़ 18 को दिए एक खास इंटरव्यू में कही. आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र देश में परिवारवाद और जाति आधारित राजनीति और राजनीतिक दलों की चर्चा फिर ज़ोरों पर है. इसी सिलसिले में जेटली ने कहा कि पिछले कुछ समय में भारत की राजनीति की हवा बदली है और देश के लोगों का नज़रिया बदला है. 'मुझे लगता है कि जब विचारों, विचारधाराओं, प्रगति, नेतृत्व क्षमता और चरित्र व मूल्यों जैसे मुद्दे जब चुनाव में आते हैं तो परिवारवाद या आप किसी खास समाज से होने वाली राजनीति नहीं कर सकते.' जेटली ने 2014 के चुनावों का विश्लेषण करते हुए कहा कि पिछले चुनावों में भी परिवारवाद और जातीय आधार पर राजनीति करने वाले राजनीतिक दल धराशायी हुए थे. उन्होंने कहा कि इस बार भी चुनाव मुद्दों पर होगा न कि इस बात पर कि कौन किस परिवार, वंश या जाति से संबद्ध होकर चुनाव लड़ रहा है.

न्यूज़ 18 से खास बातचीत करते हुए जेटली ने किसी नार्टी या व्यक्ति का नाम लिये बगैर कई पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि 'जब समाज बदलता है और लोग देश की तरक्की देखना चाहते हैं तो वो बड़ा सख़्त फैसला लेते हैं. आपने पिछले चुनावों में भी देखा कि उत्तर प्रदेश में एक पिता और पुत्र के परिवार की राजनीतिक पार्टी का क्या हाल हुआ. इसी तरह बिहार में भी परिवार को आधार बनाकर चुनाव लड़ने वाली पार्टियों के लिए क्या चुनावी नतीजे आए. और केंद्र में भी यही हुआ.'

जेटली ने यह भी कहा कि 'अब चुनावों में गणित नहीं बल्कि केमिस्ट्री चलती है. और जब केमिस्ट्री चुनावों में चलती है तो जातियों के गणित भी टूटते हैं और वंश से जुड़े मिथक भी. और सही मायनों में लोकतंत्र के लिए ऐसा होना ज़रूरी है.' जेटली ने परिवार या वंश को लेकर राजनीति करने वाले दलों में अंतर्विरोध होने की बात कहते हुए कहा कि 'चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस ने कहा था कि आकाश में एक सूर्य हो सकता है और पृथ्वी पर एक शहंशाह... इसी तरह वंशवाद में भी एक ही प्रमुख हो सकता है. आप देखें कि जिस वंश में भी दो का प्रभाव हुआ, वहां क्या अंजाम हुआ.' जेटली ने यह भी कहा कि इस तरह की राजनीति करने वाले दलों का अंजाम क्या होगा, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है. ये भी पढ़ें: मसूद अजहर को बचाने पर चीन के खिलाफ फूटा भारतीयों का गुस्सा, चाइनीज सामान के बहिष्कार की मांग तेज
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