यारों के यार थे अरुण जेटली, ऐसे निभाई अपनी दोस्ती

Pankaj Kumar | News18Hindi
Updated: August 24, 2019, 2:05 PM IST
यारों के यार थे अरुण जेटली, ऐसे निभाई अपनी दोस्ती
अरुण जेटली के बारे में कहा जाता है कि वह यारों के यार थे

अरुण जेटली (ARUN JAITLEY) अपने दोस्तों (FRIENDS) के लिए हमेशा खड़े रहने वाले शख्स थे जो दुख की घड़ी में साथ निभाना अपना धर्म समझते थे. राजनीतिक गलियारे (POLITICS) में इस बात की हमेशा से चर्चा रही है कि जेटली दोस्ती और दुश्मनी दोनों को निभाना बखूबी जानते थे.

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पिछले कुछ दशकों में भारतीय राजनीति में अहम योगदान देने वाले अरुण जेटली (Arun Jaitley)  महज 66 साल की उम्र में ही काल के गर्त में समा गए. ऐसी उम्मीद शायद ही किसी को रही होगी. बीजेपी सरकार (Bjp Government)  के संकट मोचक रहे जेटली एक के बाद दूसरी बीमारी के चपेट में आते गए और उनकी समय की घड़ी रुकने को तैयार दिखने लगी. लंबी बीमारी के बाद उन्होंने 24 अगस्त को आखिरी सांस ली. पिछले साल गुर्दे का प्रत्यारोपण और फिर अमेरिका में कैंसर का इलाज कराकर लौटे अरुण जेटली को देखकर लोगों को आस बंधी थी कि राजनीति का ये चमकता सितारा भारतीय राजनीति को और रोशन करेगा.

पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अभी सुषमा स्वराज(Sushma Swaraj) के निधन के सदमे से उबरे भी नहीं थे कि अरुण जेटली (Arun Jaitley) ) की एम्स में भर्ती होने की खबर आ गई.  अरुण जेटली का फिर से गंभीर रूप में बीमार पड़ना और सांस लेने की तकलीफ का शिकायत करना उनके चाहने वालों को भारी पड़ने लगा. दूसरों की जिंदगी को और पिछले 21 सालों से पार्टी के लिए लाइफ सपोर्ट सिस्टम की भूमिका अदा करने वाले अरुण जेटली को लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जरूरत भी नाकाफी पड़ने लगी.

एम्स(AIIMS) के मुताबिक वो कार्डियो न्यूरो सेंटर में एक्सट्रार्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजन और इंट्रा एओर्टिक बैलून पंप सपोर्ट पर रहे. इसकी जरूरत तब पड़ती है जब दिल और फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं और वैंटिलेटर काम लायक रह नहीं जाता है. इसकी मदद से शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाया जाता है. लेकिन शायद ये अंतिम घड़ी की सूचना थी ताकि उनको चाहने वाले करोड़ों प्रशंसक अपने दिल और दिमाग को समझा सकें कि बीजेपी का एक और हीरो जल्द ही रुखसत होने वाला है.

अरूण जेटली की कई बातें उन्हें अन्य राजनीतिज्ञों से काफी जुदा रखती हैं


अरूण जेटली की कई बातें उन्हें अन्य राजनीतिज्ञों से काफी जुदा रखती हैं. अरुण जेटली शुरुआती सालों में राजनीति को शौकिया तौर पर करते रहे. वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह उन दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि जब अरुण राजनीति की बुलंदियों को छू रहे थे और दूसरी पंक्ति के बेहद प्रतिभा संपन्न राजनेता के रूप में देखे जा रहे थे तब उन्होंने कहा था कि भले ही और लोग राजनीति पैसे कमाने के लिए करते हों लेकिन वो ऐसे नहीं है. वो तो राजनीति में रोजाना उतना नुकसान उठा रहे हैं.

अरुण जेटली की ये बातें राजनीतिक परिपेक्ष्य में हमेशा सही साबित हुई. वो ईमानदार राजनेता की तरह हमेशा दिखाई पड़ते रहे और कभी किसी ने उंगली उठाने की गलती से भी कोशिश की तो उसे मुंह की खानी पड़ी.

यारों के यार थे अरुण जेटली
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अरुण जेटली अपने दोस्तों (FRIENDS) के लिए हमेशा खड़े रहने वाले शख्स थे जो दुख की घड़ी में साथ निभाना अपना धर्म समझते थे. राजनीतिक गलियारे में इस बात की हमेशा से चर्चा रही है कि जेटली दोस्ती और दुश्मनी दोनों को निभाना बखूबी जानते थे. अरविंद केजरीवाल ने जब उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया तो जेटली उन्हें कोर्ट में घसीटकर ले गए. पहले केजरीवाल की तरफ से राम जेठमलानी जैसे दिग्गज खड़े हुए और अपने ऊपर लगे आरोप से नाराज अरुण जेटली ने घंटों कोर्ट में खड़े रहकर अपने ऊपर फेंके गए कीचड़ को साफ करने में तनिक भी कोताही नहीं की.

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अरुण जेटली बीते दो दशकों से भी ज्यादा समय से देश की नीति निर्धारण और महत्वपर्ण विषयों पर अपनी राय ऱखते आ रहे थे.


जब केजरीवाल को अंत में ये लगा कि उनका आरोप बेबुनियाद है और वो कोर्ट के द्वारा झूठे आरोप मढ़ने के दोषी ठहराए जाएंगे तो उन्होंने माफी मांगना मुनासिब समझा. अरुण जेटली ने उन्हें माफ कर एक बड़े दिल वाले शख्सियत की पहचान दी. लेकिन दूसरे कई लोग जिन्होंने उन पर तोहमत लगाने की कोशिश की चाहे वो कीर्ति झा आजाद हों या फिर नवजोत सिंह सिद्धू, उन्हें अरुण जेटली की तरफ उंगली उठाने का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा.

पार्टी के बाहर भी उनके दोस्तों की लंबी तादाद

वैसे पार्टी के बाहर उनके दोस्तों की लंबी तादाद रही, जिनमें नीतीश कुमार, सीताराम येचुरी से लेकर मुलायम सिंह सरीखे नेता रहे जो अलग सिद्धांतों की राजनीति करते हुए भी इनके बेहद करीब थे.
राजनीतिक गलियारों में एक मशहूर किस्सा है. यह तबकी बात है, जब सीताराम येचुरी का राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने वाला था. राज्यसभा में ऐसी प्रथा रही है कि जिस भी सदस्य का समय पूरा होने वाला होता है उसके सम्मान में सदन में कुछ सम्मानित नेता कुछ शब्द बयां करते हैं.

जेटली कानून के जानकार तो थे ही साथ ही वह एक सुलझे राजनेता भी थे


सीताराम येचुरी अपने दोस्त अरुण जेटली से पूछ बैठे किए वो उनके लिए क्या बोलने वाले हैं तो जेटली ने मजाकिए लहजे में ये कह दिया कि वो कहेंगे कि सीताराम येचुरी एक पक्के मार्क्सिस्ट की तरह सदन में आए थे. लेकिन जब वो विदा हो रहे हैं तो कांग्रेस के साथ इतने घुलमिल चुके हैं कि वो अब कांग्रेस के लिए महेशा अपोलोजेटिक नजर आते हैं. ज़ाहिर है, जब अरुण जेटली नेता प्रतिपक्ष थे और सीताराम येचुरी सीपीएम के महासचिव. उन दिनों सीताराम येचुरी पर कांग्रेस की गोद में बैठे रहने का आरोप लगता रहता था. वैसे ये बातें मजाक में कही गई थी और सदन में कहा नहीं गया था लेकिन उनके कहने का निराला अंदाज आज भी याद किया जाता है.

अपने आलोचक यशवंत सिन्हा की लगातार हमले झेल रहे अरुण जेटली का सब्र जब जवाब दे गया तो उन्होंने यह कहकर उन्हें चुप कर दिया कि अस्सी की उम्र में जॉब की मांगने वाला शख्स शायद अपना ट्रैक रिकॉर्ड भूल गया है. दरअसल यशवंत सिन्हा के बारे यह कह कर उन्होंने जता दिया कि यशवंत सिन्हा 80 की उम्र में मंत्री पद चाहते हैं, जबकि उन्हें अपना ट्रैक रिकॉर्ड याद नहीं है.

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First published: August 24, 2019, 2:01 PM IST
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