जब अरुण जेटली ने परमाणु विधेयक पर की थी मनमोहन सिंह सरकार की मदद

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Updated: August 25, 2019, 1:18 PM IST
जब अरुण जेटली ने परमाणु विधेयक पर की थी मनमोहन सिंह सरकार की मदद
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ अरुण जेटली की फाइल फोटो.

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने वरिष्ठ बीजेपी नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी पार्टी के सख्त रुख से खुद को दूर रखते हुए राष्ट्रीय हित में मनमोहन सरकार (Manmohan Singh) की मदद की थी.

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अरुण जेटली (Arun Jaitley) बेहतर कानूनी समझ वाले नेता, जिनकी विधायी कानून की जानकारी शानदार थी. उन्होंने राज्यसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर तत्कालीन यूपीए सरकार के लिए मसौदे को बेहतर रूप देने में जरा भी गुरेज नहीं किया. ये बात तब की है जब तत्कालीन यूपीए सरकार भारत-अमेरिका परमाणु करार के तहत परमाणु दायित्व विधेयक (Nuclear Liability Bill) को मंजूरी देने के लिए संघर्षरत थी. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण उन दिनों पीएमओ में राज्यमंत्री के रूप में इस परमाणु विधेयक का जिम्मा संभाल रहे थे. उन्होंने अरुण जेटली को याद करते हुए बताया कि जेटली ने विपक्ष में होते हुए भी राष्ट्रीय हित में सरकार की मदद के लिए इस मुद्दे पर अपनी पार्टी में कुछ लोगों द्वारा कड़े रुख से खुद को दूर रखा.

पृथ्वीराज चव्हाण ने जेटली को लेकर अपना अनुभव शेयर किया
द संडे एक्सप्रेस ने चव्हाण के हवाले से बताया, 'जब सरकार परमाणु दायित्व विधेयक को संसद से पास कराने के लिए जूझ रही थी (उस वक्त वामपंथी पार्टियां इस बिल के खिलाफ थी. ऐसे में सरकार के पास इस विधेयक को पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी) मैंने भाजपा से संपर्क किया. मैं अरुण जेटली के पास गया और उनसे कहा कि ये देश के लिए महत्वपूर्ण है और हमने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है. उन्होंने मसौदे को देखा और इसे सभी पार्टियों को स्वीकार्य बनाने के लिए कुछ बदलाव किए. हमने विधेयक को संशोधित किया और भाजपा ने इसका समर्थन कर दिया.'

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के साथ अरुण जेटली


सरकार की ओर से कलाउज 17 (बी) से परमाणु क्षति और ऐसे कार्य करने के इरादे से किए गए शब्दों को हटाने के बाद विधेयक पारित किया गया था. चव्हाण ने यह भी बताया कि जेटली ने 91वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित किया था, जिसने वर्ष 2003 में दलबदल विरोधी कानून को बदलने का मार्ग प्रशस्त किया. 91वां संशोधन राजनीतिक दलों को बदलने वाले नेताओं के लिए अनिवार्य बनाता है.

लोकपाल बिल पर जेटली ने विपक्ष का नेतृत्व किया
चव्हाण ने कहा, 'यह एक छोटा संशोधन था, लेकिन इसका एक बड़ा प्रभाव था. ये गोवा और कर्नाटक में हालिया राजनीतिक स्थितियों में लागू हुआ (जहां दोषपूर्ण विधायक तुरंत सरकार में शामिल नहीं हो सकते थे). 2011 में लोकपाल बिल पर चल रहे आंदोलन के दौरान जेटली ने विपक्ष का नेतृत्व किया. उन्होंने विधेयक के बारे में कहा था, 'सरकार लोकपाल को मारना चाहती है, जबकि ये अभी भी गर्भ में है.'
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राज्यसभा ने जेटली और अभिषेक सिंघवी के बीच संवैधानिक वैधता और प्रस्तावित कानून के प्रावधानों के निहितार्थ को लेकर एक जोरदार बहस देखी गई. विपक्ष के नेता होने के बावजूद जेटली को 2010 में सर्वश्रेष्ठ सांसद चुना गया था. वो समिति के सदस्य बनें और सरकार ने जन लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने में मदद की.

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First published: August 25, 2019, 12:11 PM IST
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