मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष नियुक्त किए गए रिटायर्ड जज अरुण मिश्र

NHRC के अध्यक्ष नियुक्त किए गए जज जस्टिस अरुण मिश्रा

NHRC के अध्यक्ष नियुक्त किए गए जज जस्टिस अरुण मिश्रा

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुण मिश्र (Arun Mishra), भारत के मानवाधिकार आयोग के नए चीफ नियुक्त किए गए हैं.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुण मिश्र (Arun Mishra), भारत के मानवाधिकार आयोग के नए चीफ नियुक्त किए गए हैं. केंद्र ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. रिटायर होने के पहले जस्टिस मिश्रा ने 2014 में कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta Highcourt) से पदोन्नत होने के बाद से भारत के सात पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के साथ काम किया.

केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के सत्ता में आने के एक महीने बाद जून 2014 में उन्हें जस्टिस आदर्श के गोयल और प्रमुख वकील रोहिंटन एफ नरीमन के साथ सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया था.

रिटायर्ड जज जस्टिस मिश्रा ने पूर्व सीजेआई आरएम लोढ़ा, पूर्व सीजेआई एचएल दत्तू, पूर्व सीजेआई टीएस ठाकुर, पूर्व सीजेआई जेएस खेहर, पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा, पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई और पूर्व सीजेआई एसए बोबडे के साथ काम किया है. सितंबर 2020 में रिटायरमेंट के वक्त जज जस्टिस मिश्रा सुप्रीम कोर्ट में तीसरे नंबर पर थे.

मानवाधिकार आयोग क्या है?
मानवाधिकार आयोग  28 अक्टूबर 1993 को मानव अधिकार अध्यादेश के संरक्षण के तहत गठित एक स्वायत्त सार्वजनिक संस्था है.  इसे मानव अधिकार अधिनियम, 1993  द्वारा एक वैधानिक आधार दिया गया था. भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मानव अधिकारों के संरक्षण और प्रचार के लिए जिम्मेदार है.

इस अधिनियम द्वारा परिभाषित "जीवन से संबंधित अधिकार, स्वतंत्रता, समानता और संविधान द्वारा गारंटीकृत व्यक्ति की गरिमा या अवतरित अंतरराष्ट्रीय करार. मानव अधिकार विभिन्न लोगों के लिए अलग-अलग बात है मानवाधिकार स्थैतिक नहीं हैं, बल्कि प्रकृति में गतिशील हैं. नए अधिकार समय-समय पर पहचाने जाते हैं और लागू होते हैं. केवल मानव अधिकारों के नवीनतम विकास से पूरी तरह से परिचित व्यक्तियों को उनकी जागरूकता दूसरों की तुलना में बेहतर मदद कर सकती है.




मानवाधिकार आयोग कैसे काम करता है?

मानवाधिकार आयोग अपने सामने प्रस्तुत किसी पीड़ित या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दायर किसी याचिका पर सुनवाई एवं कार्रवाई कर सकता है. इसके अतिरिक्त आयोग न्यायालय की स्वीकृति से न्यायालय के सामने लंबित मानवाधिकारों के प्रति हिंसा संबंधी किसी मामले में हस्तक्षेप कर सकता है. आयोग के पास यह शक्ति है कि वह संबंधित अधिकारियों को पहले से सूचित करके किसी भी जेल का निरीक्षण कर सके. आयोग मानवाधिकारों से संबंधित संधियों पर भी ध्यान देता है और उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर काम करता है.

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