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LAC पर भारत बना रहा है दुनिया की सबसे लंबी सुरंग, उड़ेगी चीन की नींद, जानें खास बातें

राजनाथ सिंह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की सेल टनल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

राजनाथ सिंह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की सेल टनल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

टनल का काम पूरा होने पर यह 1.5 किलोमीटर से ज्यादा लंबी टनल 13,000 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी डबल लेन सड़क सुरंग में से एक होगी. आधुनिक तकनीक से तैयार की गई इस सुरंग पर बर्फबारी का भी कोई असर नहीं होगा.

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    नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भारत-चीन तनाव के बीच अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल की खुदाई का काम पूरा हो गया है. गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विस्फोट के जरिए मुख्य ट्यूब का रास्ता खोलने के लिए बटन दबाया. यह टनल भारतीय सेना के लिए काफी अहम है. इस टनल के जरिए भारतीय सेना को हर मौसम में एलएसी तक पहुंचने और जरूरी सामान पहुंचाने में आसानी होगी. साथ ही इस टनल से वक्त की भी बचत होगी. टनल का काम पूरा होने पर यह 1.5 किलोमीटर से ज्यादा लंबी टनल 13,000 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी डबल लेन सड़क सुरंग में से एक होगी. आधुनिक तकनीक से तैयार की गई इस सुरंग पर बर्फबारी का भी कोई असर नहीं होगा.

    इस खास मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की सेल टनल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अत्याधुनिक सुरंग सिर्फ तवांग ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के लिए जीवन रेखा साबित होगी.

    भारत के लिए क्यों खास है ये टनल?
    – यह टनल सेला पास से होकर गुजरती है और ऐसी संभावना है कि इसके बनने के बाद तवांग से चीन सीमा की दूरी 10 किलोमीटर कम हो जाएगी.

    – यह अरुणाचल प्रदेश के तवांग और पश्चिम कामेंग जिले के बीच की सीमा पर स्थित है. इस परियोजना में दो टनल बनाई जा रही हैं. टनल 1 करीब 980 मीटर लंबी है वहीं टनल नंबर 2 जो एक ट्विन ट्यूब टनल है उसकी लंबाई करीब 1555 मीटर है.

    – इस टनल की मदद से असम के तेजपुर में मौजूद सेना के 4 कॉर्प्स मुख्यालय और तवांग के बीच यात्रा के समय में करीब एक 1 घंटे की कटौती हो जाएगी.

    – सेना के अधिकारियों का कहना है कि इस टनल का निर्माण कार्य जून 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है.

    – इस टनल के बनने के बाद बोमडिला और तवांग के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 13 का 171 किलोमीटर का जो रास्ता है, वो सभी मौसमों में उपयोग हो सकेगा. जिससे पर्यटकों सहित दूसरे जरूरी आवागमन में ही मदद मिलेगी.

    2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस परियोजना की नींव रखी थी. इसकी लागत करीब 687 करोड़ रू होगी. 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान चीन के भारत पर आक्रमण में तभी तेजी आई थी और वह हम पर हावी हो गए थे जब पीएलए सेला में पूरी तरह से फैल गई थी. लेकिन ये टनल सिर्फ सुरक्षा में ही मजबूती नहीं लाएगी बल्कि इसकी मदद से पश्चिम अरुणाचल के दूर-दराज के लोगों को आवागमन में भी आसानी होगी. इसकी मदद से पर्यटन में भी इजाफा होगा जिससे अरुणाचल की आर्थिक स्थिति में भी इजाफा होगा.

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