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केजरीवाल को तीसरी बार सत्ता मिलते ही AAP ने किया 2014 की तरह राष्ट्रीय राजनीति का इशारा

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Updated: February 11, 2020, 6:34 PM IST
केजरीवाल को तीसरी बार सत्ता मिलते ही AAP ने किया 2014 की तरह राष्ट्रीय राजनीति का इशारा
आम आदमी पार्टी के दफ्तर के बाहर ये होर्डिंग लगाया गया.

दिल्ली चुनावों (Delhi Assembly election) में बड़ी जीत के बाद अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) तीसरी बार सीएम बनने जा रहे हैं. इसके साथ ही आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति की अपनी इच्छा को जाहिर कर दिया है.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 6:34 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली चुनावों (Delhi Assembly election) में बड़ी जीत के बाद अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) तीसरी बार सीएम बनने जा रहे हैं. इसके साथ ही आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति की अपनी इच्छा को जाहिर कर दिया है. मंगलवार को जब दिल्ली की राजनीति के आसमान पर आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) की जीत का परचम बुलंद हो रहा था, उसी समय आप के पार्टी दफ्तर में एक बड़ा होर्डिंग लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था. इस होर्डिंग पर लिखा था 'राष्ट्र निर्माण के लिए आप से जुड़ें.' इस स्लोगन के साथ एक नंबर भी दिया गया था, जिस पर मिस्ड कॉल करना है.

कुछ ऐसा स्लोगन आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया पर भी चलाया. इसमें उसने लिखा, 'जॉइन द रिवोल्यूशन, जॉइन आप.' पार्टी ने लोगों को जुड़ने के लिए नंबर भी जारी किया. आम आदमी पार्टी का ये कदम 2014 की तरह ही है, जब आम चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर की राजनीति के लिए मुहिम छेड़ी थी. तब एक करोड़ सदस्य बनाने का दावा किया गया था. उस समय आम आदमी पार्टी ने एक साथ पूरे देश में चुनाव लड़ने के लिए रणनीति बनाई थी. यही कारण था कि तब अरविंद केजरीवाल ने वाराणसी जाकर पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा था.


2014 में आप ने 'मैं भी आम आदमी' कैंपेन शुरू किया था. तब पार्टी ने लोगों को एसएमएस या मिस्ड कॉल के जरिए लोगों को पार्टी का मेंबर बनाने का अभियान शुरू किया था. आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि वह सत्ता में वापस आने पर देशभक्ति पाठ्यक्रम की शुरुआत करेंगे.

6 फरवरी को टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में केजरीवाल ने कहा था, गांधी जी के अनुसार-जो भी छाऋ स्कूल और कॉलेज से बाहर आएं उनमें तीन क्वालिटी होनी चाहिए, अच्छा इंसान, आत्मनिर्भर और राष्ट्रवादी. हमने अपने पाठ्यक्रम में हैप्पीनेस को शामिल किया. आंत्रप्रिन्योरशिप युवाओं के आत्मनिर्भर बनने के लिए शुरू की. अब देशभक्ति पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है.

2014 में प्लान हुआ था फेल
2014 के आम चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 434 उम्मीदवार उतारे थे. इनमें से सिर्फ 4 उम्मीदवार पंजाब में जीते थे. पूरे देश में आप को 2 प्रतिशत वोट मिले थे. 414 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. यहां तक कि दिल्ली में जहां पार्टी ने विधानसभा में अच्छा प्रदर्शन किया था. 2014 के चुनावों के लोकसभा में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी.

2019 में कम सीटों पर उतारे उम्मीदवार
2014 की हार से सबक लेते हुए 2019 में आम आदमी पार्टी ने चुनिंदा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे. उसने दिल्ली, पंजाब और गोवा की सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे. हरियाणा में दुष्यंत चौटाला की पार्टी से गठबंधन कर तीन सीटों पर अपने चेहरे खड़े किए. रणनीति बदलने के बावजूद उसे 40 में से 39 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. पंजाब में अकेले संगरूर को छोड़कर उसके सभी उम्मीदवार हार गए.

लोकसभा के अलावा आप ने पंजाब, गोवा, महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव लड़ा. उसने गोवा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन 39 में से 38 सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. पंजाब में जरूर उसे अच्छी कामयाबी मिली और 20 सीटें उसने जीत लीं.

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First published: February 11, 2020, 6:09 PM IST
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