प्रताप भानु मेहता के बाद अब अरविंद सुब्रमण्यम ने अशोका यूनिवर्सिटी से दिया इस्तीफा

अरविंद सुब्रमण्यम अशोका युनिवर्सिटी इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर थे. (फाइल फोटो)

अरविंद सुब्रमण्यम अशोका युनिवर्सिटी इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर थे. (फाइल फोटो)

सुब्रमण्यम (Arvind Subramanian) का इस्तीफा प्रताप भानु मेहता (Pratap Bhanu Mehta) के इस्तीफे के दो दिन बाद आया है. अरविंद सुब्रमण्यम ने आरोप लगाया है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी होने के बावजूद अशोका यूनिवर्सिटी में फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 9:24 PM IST
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नई दिल्ली. नामचीन अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम (Arvind Subramanian) ने अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) में प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया है. सुब्रमण्यम का इस्तीफा प्रताप भानु मेहता (Pratap Bhanu Mehta) के इस्तीफे के दो दिन बाद आया है. अरविंद सुब्रमण्यम ने आरोप लगाया है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी होने के बावजूद अशोका यूनिवर्सिटी में अकादमिक फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सुब्रमण्यम ने यूनिवर्सिटी पिछले साल जुलाई महीने में जॉइन की थी. उन्होंने इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में प्रोफेसर पद पर जॉइन किया था. वो न्यू अशोका सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी के फाउंडर डायरेक्टर भी रहे हैं. इस डिपार्टमेंट में भारत और वैश्विक आर्थिक मुद्दों से संबंधित विषय पढ़ाए जाते हैं. सुब्रमण्यम का इस्तीफा इस साल के अकादमिक सेशन के अंत से मान्य होगा.

गौरतलब है कि जाने-माने स्‍कॉलर, राजनीतिक विश्‍लेषक और टिप्पणीकार प्रताप भानु मेहता ने दो दिन पहले अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पद से भी इस्‍तीफा दे दिया था. दो साल पहले वह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर पद से भी इस्‍तीफा दे चुके थे. मेहता ने लगातार अपने लेखन से और सार्वजनिक तौर पर सत्ता पर सवाल उठाए हैं. उन्हें राजनीति और राजनीतिक सिद्धांत, संवैधानिक कानून, शासन और राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर देश के अग्रणी स्‍कॉलर्स में से एक माना जाता है.

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सरकार की आलोचना के सवाल से खुद को अलग किया

यूनिवर्सिटी से यह पूछा गया कि प्रताप भानु मेहता की ओर से सरकार की आलोचना करने और उनके इस्‍तीफा देने के बीच कुछ संबंध तो नहीं है. लेकिन यूनिवर्सिटी ने इस सवाल से खुद को अलग कर लिया. हालांकि एक प्रवक्ता ने उनके इस्तीफे की पुष्टि की और कहा कि कुलपति और फैकल्‍टी मेंबर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में बहुत योगदान दिया है. अशोका विश्वविद्यालय उन्हें उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता है.

विश्वविद्यालय की गवर्निंग बॉडी के पांच सदस्यों में से भी मेहता के बाहर निकलने के संबंध में कुछ सवालों को भी भेजा गया. इस गवर्निंग बॉडी में वाइस चांसलर मालाविका सरकार, चांसलर रुद्रांशु मुखर्जी, बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टीज के अध्यक्ष आशीष धवन, संस्थापक और ट्रस्टी विनीत गुप्ता व संस्थापक प्रमथ राज सिन्हा शामिल हैं.
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