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असम NRC डेटा ऑफलाइन होने पर विप्रो ने कहा- अक्टूबर 2019 के बाद रिन्यू नहीं किया गया कॉन्ट्रैक्ट

भाषा
Updated: February 12, 2020, 8:43 PM IST
असम NRC डेटा ऑफलाइन होने पर विप्रो ने कहा- अक्टूबर 2019 के बाद रिन्यू नहीं किया गया कॉन्ट्रैक्ट
केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि असम में एनआरसी का डेटा सुरक्षित है हालांकि कुछ तकनीकी मुद्दे देखे गए और उन्हें जल्द ही हल कर लिया जाएगा. (सांकेतिक तस्वीर)

एनआरसी (NRC) की अंतिम सूची 31 अगस्त 2019 को प्रकाशित होने के बाद असली भारतीय नागरिकों को शामिल किए जाने तथा बाहर किए गए लोगों की पूरी जानकारी उसकी आधिकारिक वेबसाइट http://www.nrcassam.nic.in पर अपलोड की गई.

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नई दिल्ली. देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी विप्रो (Wipro) ने असम (Assam) की राष्ट्रीय नागरिक पंजी (National Population Register) के आंकड़े ऑफलाइन हो जाने के मामले में बुधवार को कहा कि संबंधित प्राधिकरण ने विप्रो की सर्विस के कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू नहीं किया. इसके कॉन्ट्रैक्ट की समयसीमा अक्टूबर 2019 में ही समाप्त हो गयी. कंपनी ने कहा कि लंबी नीलामी प्रक्रिया के बाद विप्रो को 2014 में असम की एनआरसी प्रणाली को व्यवस्थित करने की परियोजना के लिये चुना गया था.

कंपनी ने ईमेल के जरिये जारी एक बयान में कहा कि उसने भलमनसाहत दिखाते हुए मेजबान सेवा शुल्क का भुगतान जनवरी के अंत तक जारी रखा. उसने कहा कि यदि प्राधिकरण अनुबंध का नवीनीकरण करता है तो वह ये सेवाएं पुन: मुहैया कराने को तैयार है.

विप्रो को मिला था तकनीकी समाधान देने का काम
कंपनी ने कहा, "परियोजना भारत के महारजिस्ट्रार अैर गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गयी थी और सुप्रीम कोर्ट इस परियोजना की निगरानी कर रहा था. विप्रो को आईटी सेवा प्रदाता के नाते प्रौद्योगिकी की संरचना तथा तकनीकी समाधान मुहैया कराने का काम दिया गया था."

वहीं केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि असम में एनआरसी का डेटा सुरक्षित है हालांकि कुछ तकनीकी मुद्दे देखे गए और उन्हें जल्द ही हल कर लिया जाएगा.

डेटा ऑफलाइन होने की खबरें आई थीं सामने
केंद्रीय गृह मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण उन खबरों के मद्देनजर आया कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी की अंतिम सूची का डेटा उसकी आधिकारिक वेबसाइट से ऑफलाइन हो गया है.गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘एनआरसी डेटा सुरक्षित है. क्लाउड पर कुछ तकनीकी मुद्दे देखे गए. इन्हें जल्द ही हल किया जा रहा है.’’

कुछ दिनों के लिए डेटा उपलब्ध नहीं था और इससे जनता, खासतौर से उन लोगों में भय व्याप्त हो गया जिन्हें सूची से बाहर रखा गया है क्योंकि उन्हें सूची से बाहर किए जाने का प्रमाणपत्र अभी जारी नहीं किया गया है.

19 अक्टूबर को ही खत्म हो गया था कॉन्ट्रैक्ट
एनआरसी के राज्य संयोजक हितेश देव शर्मा ने माना कि डेटा ऑफलाइन हो गया है लेकिन उन्होंने इसके पीछे किसी तरह की ‘‘दुर्भावना’’ के आरोप को खारिज किया. बड़े पैमाने पर डेटा के लिए क्लाउड सेवा आईटी कंपनी विप्रो ने मुहैया कराई थी और उनका अनुबंध पिछले साल 19 अक्टूबर तक का था. बहरहाल, पूर्व संयोजक ने इस अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया.

शर्मा ने बताया कि इसलिए विप्रो द्वारा निलंबित किए जाने के बाद 15 दिसंबर से डेटा ऑफलाइन हो गया था. उन्होंने बताया कि राज्य संयोजक समिति ने 30 जनवरी को अपनी बैठक में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने का फैसला किया और फरवरी के पहले सप्ताह के दौरान विप्रो को पत्र लिखा.

जल्द उपलब्ध हो जाएगा डेटा
शर्मा ने कहा, "एक बार जब विप्रो डेटा को ऑनलाइन कर देगी तो यह जनता के लिए उपलब्ध होगा. हमें उम्मीद है कि लोगों को अगले दो-तीन दिनों में डेटा उपलब्ध हो जाएगा."

एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त 2019 को प्रकाशित होने के बाद असली भारतीय नागरिकों को शामिल किए जाने तथा बाहर किए गए लोगों की पूरी जानकारी उसकी आधिकारिक वेबसाइट http://www.nrcassam.nic.in पर अपलोड की गई.

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First published: February 12, 2020, 8:43 PM IST
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