कोरोना वायरस: मरीजों के इलाज के लिए बढ़ रही है ऑक्सीजन की मांग, पिछले 1 महीने में 2% ज़्यादा डिमांड

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

Oxygen support: आमतौर पर मरीजों को कोरोना संक्रमित होने के बाद सांस लेने में परेशानी होती है. खून में 92-96% से ऑक्सीजन लेवल नीचे जाने पर डॉक्टर सतर्क हो जाते हैं.

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नई दिल्ली. देश भर में इन दिनों कोरोना (Corornavirus) के मरीजों की संख्या में रिकॉर्ड इजाफा हो रहा है. पिछले कुछ दिनों से हर रोज़ औसतन 24 हजार से ज्यादा नए केस सामने आ रहे हैं. इस बीच मरीजों के लिए ऑक्सीजन सपोर्ट (Oxygen support) की डिमांड भी बढ़ गई है. यानी मरीज़ को बचाने के लिए हॉस्पिटल में ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया जा रहा है. पिछले एक महीने के दौरान ऑक्सीजन की डिमांड 2 फीसदी बढ़ गई है.

लगातार बढ़ रही है मांग
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी के हवाले से बताया गया कि जुलाई के पहले हफ्ते में 7% एक्टिव मरीज़ ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे. इसी दौरान कोरोना मरीजों की संख्या के मामले में भारत तीसरे नंबर पर पहुंचा था. जून के महीने में 5 से 5.5% ऐसे मरीज़ थे, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे. बता दें कि कोरोना में किसी मरीज़ की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन थेरेपी बेहद अहम कड़ी है. आमतौर पर मरीजों को कोरोना संक्रमित होने के बाद सांस लेने में परेशानी होती है.

ऑक्सीजन की कमी नहीं
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, देश में ऑक्सीजन सप्लाई की कोई कमी नहीं है. इन दिनों हर रोज़ 6000 मेट्रिक टन ऑक्सीजन तैयार किया जा रहा है. जिन हॉस्पिटल में कोरोना के मरीजों का इलाज हो रहा है वहां हर रोज 1100-1200 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत है. ऑक्सीजन की बढ़ी डिमांड के पीछे सबसे बड़ी वजह है दक्षिण भारत और महाराष्ट्र के कई इलाकों में हॉटस्पॉट का बनना.




बढ़ाई जा रही है बेड की संख्या

देश भर में ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड की संख्या भी लगातार बढ़ाई जा रही है. 27 जून तक देश में 51321 ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड तैयार थे. मंत्रियों की बैठक में कहा गया था कि 9 जुलाई तक इसकी संख्या 1.42 लाख कर दी जाएगी. बता दें कि खून में 92-96% से ऑक्सीजन लेवल नीचे जाने पर डॉक्टर सतर्क हो जाते हैं. मरीज को पेट के बल लेटा दिया जाता है जिससे कि ऑक्सीजन की मात्रा बढ़े.
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