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भारत-चीन तनातनी कम करने के लिए बातचीत जारी, लेकिन इस बार राहें डोकलाम जितनी आसान नहीं

भारत-चीन तनातनी कम करने के लिए बातचीत जारी, लेकिन इस बार राहें डोकलाम जितनी आसान नहीं

गलवान घाटी में गलवान नदी के मुहाने पर लगाए एक चीनी टेंट को भारतीय सेना के हटा देने के बाद हिंसक झड़प शुरू हुई थी (सांकेतिक फोटो)

गलवान घाटी में गलवान नदी के मुहाने पर लगाए एक चीनी टेंट को भारतीय सेना के हटा देने के बाद हिंसक झड़प शुरू हुई थी (सांकेतिक फोटो)

नई दिल्ली की नीतियों की कम हुई गतिशीलता, चीन (China) की अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और सम्मेलनों (international norms and conventions) के पालन की कम होती जरूरतें एकसाथ मिलकर एक खतरनाक मिश्रण बनाती है, जो निकट भविष्य में LAC पर चीनी-भारतीय तनातनी के कम होने की संभवना को बहुत हद तक कम कर देता है.

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    (अनंत मान सिंह)

    नई दिल्ली. वर्तमान में LAC पर चीनी-भारतीय सीमा गतिरोध (Sino-Indian border standoff) और इससे जुड़ी झड़पों के बारे में जानकारी की कमी ने वर्तमान स्थितियों को समझने और इसके बारे में भविष्यवाणी करने को काफी कठिन बना दिया है. इस जानकारी की कमी के बावजूद, डोकलाम (जो कि भारत, भूटान और चीन तीनों की सीमाओं का एक बिंदु है) के 2017 में हुए चीनी-भारतीय सैन्य गतिरोध में कम की गई तनातनी से LAC के वर्तमान गतिरोध की तुलना करने पर शायद वर्तमान दुविधा के बारे में कुछ सफाई मिल सकती है.

    यह अच्छे से जानी हुई बात है कि 2017 और 2020 के सैन्य गतिरोध (Military standoff) चीन-भारत सीमा के विभिन्न क्षेत्रों के लिए तुलनात्मक रणनीतिक महत्व (comparable strategic significance) के हैं. दोनों देशों के करीबी रणनीतिक महत्व और निकटता दोनों घटनाओं के पैदा होने की परिस्थितियों की तुलना, दोनों के बीच के बारीक अंतर को सामने लाने की अनुमति देती हैं.

    डोकलाम से अब तक चीनी नेतृत्व और ज्यादा अधिनायकवादी हुआ
    तुलना के लिए, ब्रेंट सस्ले के विश्लेषण के स्तर आदर्श हैं क्योंकि वे एजेंट (नेतृत्व), संरचना (अंतरराष्ट्रीय प्रणाली में स्थिति) और दोनों (राष्ट्रीय बहस) के बीच संपर्क पर ध्यान केंद्रित करते हैं. दोनों सैन्य गतिरोधों के दौरान चीन का नेतृत्व काफी हद तक अपरिवर्तित रहा है. कुछ भी हो, राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2018 में आयोजित 19वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान अपनी राष्ट्रपति पद की सीमा को हटाने के साथ अब और अधिक अधिनायकवादी बन गए हैं.

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    चीन कब्जा जमाकर भारत पर तुरंत वापस लौटने का बना रहा दबाव
    चीन में राष्ट्रीय बहस में भी थोड़ा बदलाव देखा गया है, चीन ने अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के साथ-साथ अपने राज्य नियंत्रित मीडिया का उपयोग करके अपनी आक्रामक बयानबाजी के साथ, निर्विवाद रूप से इस क्षेत्र पर दावा किया है और भारत पर 'तुरंत वापस लौटने' के लिए दबाव बना रहा है. 2017 के गतिरोध के दौरान एक प्रेस विज्ञप्ति में, डोकलाम पठार (Doklam Plateau) का जिक्र करते हुए, चीन ने खुद को भारतीय आक्रामकता का शिकार घोषित किया, जिसमें कहा गया था कि “डोकलाम चीन का है. भारतीय सैनिकों ने चीनी क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है, हम भारतीय पक्ष से तत्काल वापस जाने का आग्रह करते हैं.”

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    डोकलाम पठार में कथित आपसी मतभेद सुलझाए जाने के बाद भी, चीन ने एक अन्य आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था, “भारतीय सैन्यकर्मी और उपकरण जो चीनी क्षेत्र में आ गए थे, सभी को सीमा के भारतीय पक्ष में वापस ले जाया गया है. चीनी सीमा के सैनिक [डोकलाम] में अपनी गश्त और तैनाती जारी रखेंगे. (लेखक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में रिसर्च इंटर्न हैं)

    Tags: China, Chinese Army, Doklam, Galwan Valley, Indian army, Ladakh Border

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