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RCEP पर चिंताओं के बीच क्‍या भारत दुनिया के सबसे बड़े मुक्‍त व्‍यापार समझौते के लिए है तैयार?

रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) के तहत भारत को चीन (China), ऑस्‍ट्रेलिया (Australia) व न्‍यूजीलैंड (New Zealand) से आयात होने वाली 74 फीसदी और जापान (Japan), दक्षिण कोरिया (South Korea) व आसियान देशों (ASEAN) से आयतित 90 फीसदी वस्‍तुओं से टैरिफ (Triffs) हटाना पड़ेगा. भारत को डर है कि RCEP पर सहमत होने के बाद देश सस्‍ती चीनी वस्‍तुओं (Cheap Chinese Goods) का डंपिंग ग्राउंड (Dumping Ground) बन जाएगा.

Hindi.news18.com | November 7, 2019, 8:43 PM IST
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8:43 pm (IST)
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 संजय राउत ने कहा कि जनादेश सिर्फ महायुति को नहीं मिला है बल्कि इस दौरान जो चीजें हुई हैं उसका भी मिला है. कोई भी गठबंधन ऐसे नहीं चलता. तय बातों को भुलाकर गठबंधन नहीं चलाया जा सकता.

8:42 pm (IST)

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 संजय राउत ने कहा कि बीजेपी राज्य में राष्ट्रपति शासन लाने जैसा हालात पैदा कर रही है. यह संविधान बनाने वाले बाबा साहेब भीमराव आबंडेकर का अपमान है. बीजेपी राज्यपाल से मिलने गई थी और उसे  145 विधायकों की लिस्ट सौंपनी चाहिए थी.

8:41 pm (IST)
 संजय राउत ने कहा कि बीजेपी राज्य में राष्ट्रपति शासन लाने जैसा हालात पैदा कर रही है. यह संविधान बनाने वाले बाबा साहेब भीमराव आबंडेकर का अपमान है. बीजेपी राज्यपाल से मिलने गई थी और उसे  145 विधायकों की लिस्ट सौंपनी चाहिए थी.

8:34 pm (IST)

8:34 pm (IST)
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राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी से मिलने के लिए महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल आशुतोष कुंभकोनी राजभवन पहुंचे. महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को समाप्त हो रहा है. ऐसे में अब दो संभावनाएं बनती दिख रही हैं. या तो राज्‍य में राज्‍यपाल शासन या फिर सबसे बड़े दल बीजेपी को सरकार बनाने का न्‍योता दिया जा सकता है. विधानसभा का कार्यकाल खत्‍म होने के बाद अगर कोई भी दल बहुमत साबित करने में सफल नहीं होता है, तो राज्‍य में 6 माह के लिए राष्‍ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

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उदय सिंह राणा

नई दिल्‍ली. भारतीय प्रतिनिधिमंडल रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) को अंतिम रूप देने के लिए 10 आसियान (ASEAN) देशों और चीन (China) समेत पांच अन्‍य देशों के साथ आखिरी दौर की बातचीत कर रहा है. हालांकि, केंद्रीय वाणिज्‍य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) के नेतृत्‍व वाले भारतीय दल की नई मांगों के बाद इस समझौते के अंजाम तक पहुंचने में देरी के आसार नजर आ रहे हैं. मोदी सरकार चिंतित है कि समझौते पर सहमति के बाद भारत में सस्‍ते चीनी माल (Cheap Chinese Goods) की बाढ़ आ जाएगी. इससे भारत के छोटे कारोबार (Small Businesses) को बड़ा नुकसान हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को आसियान देशों के नेताओं से बातचीत के दौरान भारत की चिंताओं (Concerns) के बारे में स्‍पष्‍ट तौर पर बता दिया. उन्‍होंने कहा कि सभी पक्षों को बराबर मार्केट एक्‍सेस (Market Access) मिलना चाहिए.

हस्‍ताक्षर के बाद बन जाएगा दुनिया का सबसे बड़ा आर्थिक गुट
अगर RECP पर सभी देश सहमत होकर हस्‍ताक्षर कर देते हैं तो यह दुनिया का सबसे बड़ा आर्थिक गुट (Largest Economic Bloc) होगा. इस समझौते में शामिल देशों की वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था (Global Economy) में करीब-करीब आधी हिस्‍सेदारी होगी. इसमें भारत से लेकर न्‍यूजीलैंड तक के देश शामिल होंगे. आरसीईपी एक व्‍यापार समझौता (Trade Agreement) है, जो सदस्य देशों को एकदूसरे के साथ कारोबार में सहूलियत देता है. समझौते के तहत सदस्य देशों को आयात (Import) और निर्यात (Export) पर लगने वाला टैक्स (Tax) नहीं भरना पड़ता है या बहुत कम भरना पड़ता है. इस समझौते पर आसियान के 10 देशों के साथ-साथ भारत समेत छह अन्य देश दस्तखत करेंगे. फिलहाल इसको लेकर आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान अलग-अलग जगहों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी है.

2012 में कंबोडिया हुए आसियान सम्‍मेलन में शुरू हुई थी बात
RECP पर सबसे पहले कंबोडिया में 2012 में हुए आसियान सम्‍मेलन के दौरान बातचीत शुरू हुई थी. इसमें 10 सदस्‍य देशों ने फैसला किया था कि वे ज्‍यादा बड़ा और एकीकृत करोबार करार चाहते हैं. आसियान देशों में शामिल ब्रूनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिश, लाओस, मलेशिया, म्‍यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड व वियतनाम का भारत, ऑस्‍ट्रेलिया, चीन, दक्षिण कोरिया, जापान व न्‍यूजीलैंड के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता (FTA) है. जब आसियान देशों ने RECP के लिए कोशिशें शुरू कीं तो जल्‍द ही स्‍पष्‍ट हो गया कि चीन को लेकर भारत की चिंता बातचीत के दौरान सबसे ऊपर रहेगी. एक रिपोर्ट के मुताबिक, RECP ने 2050 तक 2500 खबर डॉलर की कुल जीडीपी का लक्ष्‍य निर्धारित किया है. उम्‍मीद की जा रही है कि इसमें भारत और चीन की संयुक्‍त हिस्‍सेदारी 75 फीसदी होगी.

पीएम मोदी के बैंकॉक जाने से पहले ही 21 मुद्दों पर बातचीत पूरी
रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप की सफलता के लिए जरूरी है कि भारत-चीन के बीच सहमति बने. इस साझेदारी के 25 भाग (Chapters) हैं. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी के बैंकॉक (Bangkok) के लिए निकलने से पहले ही इनमें 21 पर बातचीत पूरी हो चुकी थी. बाकी चार मुद्दों पर अंतिम बाचतीत के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी पीएम मोदी के साथ गए हैं. पीएम मोदी की बैंकॉक यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) में सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने कहा था कि साझेदारी पर कई साल से बातचीत चल रही है. इससे सभी पक्षों को बड़े आर्थिक व व्‍यापारिक मौके उपलब्‍ध होंगे. सभी सदस्‍य देशों को पारदर्शी व उचित कारोबारी माहौल उपलब्‍ध कराने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, अभी भी कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनका बातचीत के जरिये समाधान निकाले जाने की जरूरत है.

भारत को कई देशों से 74 तो कई से 90 फीसदी शुल्‍क हटाने होंगे
RCEP के तहत भारत को चीन (China), ऑस्‍ट्रेलिया (Australia) व न्‍यूजीलैंड (New Zealand) से आयात होने वाली 74 फीसदी और जापान (Japan), दक्षिण कोरिया (South Korea) व आसियान देशों (ASEAN) से आयतित 90 फीसदी वस्‍तुओं से शुल्‍क (Triffs) हटाने होंगे. आर्थिक सुस्‍ती के बीच भारत को डर है कि RCEP पर हस्‍ताक्षर के बाद देश सस्‍ती चीनी वस्‍तुओं (Cheap Chinese Goods) का डंपिंग ग्राउंड (Dumping Ground) बन जाएगा. मौजूदा हालात में भारत की स्थिति मुश्किल भरी है. एक तरफ भारत इस आर्थिक गुट से बाहर भी नहीं रहना चाहता और दूसरी तरफ चाहता है कि चीन के सस्‍ते से भारतीय कारोबारियों को नुकसान भी नहीं होना चाहिए. नई दिल्‍ली खासतौर पर चीन की कृषि संबंधी वस्‍तुओं से सुरक्षा चाहती है.

चीन के साथ व्‍यापार घाटा है भारत की चिंता का सबसे बड़ा कारण
भारत में कांग्रेस (Congress) से लेकर किसान संगठनों और राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के स्‍वदेशी जागरण मंच तक का कहना है कि चीन के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता देश के निर्माण और उत्‍पाद क्षेत्र के ताबूत में आखिरी कील जैसा होगा. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि RCEP की रूपरेखा के भीतर चीन के साथ एक समझौते पर बातचीत करना बेहतर विकल्‍प होगा. डब्‍ल्‍यूटीओ में भारत की ओर से चीफ निगोशिएटर रहे सेवानिवृत्‍त राजनयिक मोहन कुमार का कहना है कि चीन के 57 अरब डॉलर का व्‍यापार घाटा सबसे बड़ी चिता की वजह है. इस मामले में भारत की चिंता पूरी दुनिया जानती है. एक तरफ चीन कुछ छूटों के चलते भारत में अपने कई उत्‍पाद धड़ल्‍ले से निर्यात करता है. वहीं, भारत की ओर से निर्यात होने वाले फार्मा उत्‍पादों समेत कई चीजों को नियमों का हवाला देकर देरी करता रहता है. इसी कारण चीन के साथ करोबार में भारत को बड़ा व्‍यापार घाटा झेलना पड़ रहा है.

50 खरब डॉलर कर अर्थव्‍यवस्‍था के लिए करना होगा FTA
भारत को 50 खबर डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बनने के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए 1991 की उदारीकरण नीति के बाद मुक्‍त व्‍यापार समझौता ही बड़ी छलांग लगाने में मदद कर सकता है. भारत अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन और गल्‍फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ 100 अरब डॉलर का कारोबार करता है, लेकिन इनमें किसी के साथ एफटीए नहीं है. अगर भारत को 2022 तक अपनी जीडीपी को दोगुना करना है तो साझेदार देशों के साथ कारोबार को भी दोगुना करना ही होगा. मोहन कुमार के मुताबिक, भारत को 50 खरब डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बनने के लिए अपने साझेदार देशों के साथ एफटीए जैसे रास्‍तों को अपनाना पड़ेगा. उन्‍होंने बताया कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एफटीए की कोशिश की, लेकिन अलग-अलग कारणों से सफलता नहीं मिल पाई.

'बिना भारत RCEP का नहीं रह जाएगा कोई मतलब'
RCEP को लेकर सात से बातचीत जारी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अन्‍य 15 देश भारत के रवैये से खीझ चुके हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या बाकी देश भारत को साथ लिए बिना समझौते पर आगे बढ़ सकते हैं. जब मोहन कुमार से ये सवाल पूछा गया तो उन्‍होंने कहा, 'मैं इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगा सकता हूं.' हालांकि, वह कहते हैं कि अगर भारत को साथ लिए बिना बाकी देश आगे बढ़ जाते हैं तो इस समझौते का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. दरअसल, इसमें शामिल ज्‍यादातर देशों का चीन के साथ एफटीए है. भारत का आसियान, जापान और कोरिया के साथ एफटीए है. वहीं, ऑस्‍ट्रेलिया और न्‍यूजीलैंड के साथ एफटीए पर बातचीत पूरी होने को है.

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