कोरोना के कारण ज्यादा मृत्यु दर पर घिरी पंजाब सरकार क्या 'वैक्सीन स्कैम' से सबक लेगी?

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह. (पीटीआई फाइल फोटो)

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह. (पीटीआई फाइल फोटो)

केंद्र सरकार (Central Government) के सूत्रों ने न्यूज़18 को बताया है कि कोरोना के जबरदस्त प्रसार और ज्यादा मृत्यु दर के खिलाफ उठाए कदमों को लेकर पंजाब पहले से नजरों में है. राज्य में केस फैटलिटी रेट 2.55% है जो राष्ट्रीय औसत 1.2% का दोगुना है. केस फैटलिटी रेट के मामले में राज्य के 12 जिले देश के टॉप 20 जिलों में हैं.

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नई दिल्ली. प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन बेचने का फैसला पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार (Captain Amarinder Singh) को बुरी तरह उल्टा पड़ गया है. विपक्ष ने इसे वैक्सीन स्कैम का नाम दिया है. शुक्रवार को राज्य सरकार ने अपना ये फैसला वापस ले लिया है. दरअसल राज्य सरकार ने अपने वैक्सीन स्टॉक को प्राइवेट अस्पतालों को बाजार मूल्य पर बेचने का निर्णय लिया था, जिसे अब वापस लिया जा चुका है. नए आदेश में कहा गया है कि पुराना आदेश ''सही भावना से नहीं लिया गया था'.

ये पंजाब के कोरोना के खिलाफ बुरे रिकॉर्ड में एक और शमर्नाक घटनाक्रम है. बता दें देश में कोरोना से जान गंवाने के मामले में पंजाब का प्रतिशत सबसे ज्यादा है. इसे केस फैटलिटी रेट (CFR) भी कहते हैं.

केंद्र के हस्तक्षेप के बाद कदम उठाया

मामले में मुख्यमंत्री ने केंद्र के हस्तक्षेप के बाद कदम उठाया है. केंद्र ने आज ही राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी. राज्य सरकार द्वारा 40 हजार कोवैक्सीन डोज 400 रुपए के हिसाब से खरीद कर प्राइवेट अस्पताल को 1060 रुपए में देने पर केंद्र ने जवाब मांगा था. हर डोज पर 660 रुपए यानी 165 फीसदी का प्रॉफिट था. करीब ढाई करोड़ रुपए.
हालिया कोविड नीति का प्रथम दृष्टया उल्लंघन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे हालिया कोविड नीति का प्रथम दृष्टया उल्लंघन माना है. केंद्र ने बीते महीने वैक्सीनेशन का दायरा बढ़ाया था और राज्य-प्राइवेट अस्पतालों को भी वैक्सीन उत्पादकों से खरीद की छूट दी थी. इसके तहत प्राइवेट अस्पतालों को सीधे उत्पादकों से वैक्सीन खरीदनी थी न कि केंद्र या फिर राज्य से. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पर तत्काल स्पष्टीकरण मांगा.

पंजाब सरकार से ली गई वैक्सीन 1550 रुपए में लगाई



कहा जा रहा है कि इससे पहले प्राइवेट अस्पतालों ने पंजाब सरकार से ली गई वैक्सीन 1550 रुपए में लगाई. पंजाब में चलाए जा रहे फ्री वैक्सीनेशन के तहत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जो वैक्सीन लोगों को फ्री में मिलनी चाहिए थी उसके लिए लोगों को पैसे चुकाने पड़े.

प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन लौटानी पड़ेगी

अब शुक्रवार को राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए नए आदेश के मुताबिक प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन लौटानी पड़ेगी. निर्णय में कहा गया-जब अस्पतालों को उत्पादकों से डायरेक्ट सप्लाई मिल जाए तब जितने डोज अब तक इस्तेमाल किए जा चुके हैं जा चुकी हैं, उसे भी वापस करना होगा. प्राइवेट अस्पतालों ने वैक्सीन फंड में जो राशि दी है उसे वापस कर दिया जाएगा.

स्वास्थ्य मंत्री का बयान

जिस बात ने मामले को सबसे ज्यादा विचित्र बनाया वो ये है कि स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने इससे अपने हाथ झाड़ लिए हैं. उन्होंने कहा है कि ये फैसला राज्य की मुख्य सचिव विमी महाजन ने लिया था. प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन सप्लाई की कमी को देखते हुए ये 'वन-टाइम' फैसला था.

सरकार पर बरसा विपक्ष

विपक्षी शिरोमणि अकाली दल, आम आदमी पार्टी और बीजेपी ने पंजाब सरकार की इस मुद्दे पर बुरी तरह खिंचाई की है. विपक्ष इसे वैक्सीन स्कैम कह रहा है. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि प्राइवेट अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए रिश्वत ली गई है.

पंजाब पहले से नजरों में

केंद्र सरकार के सूत्रों ने न्यूज़18 को बताया है कि कोरोना के जबरदस्त प्रसार और ज्यादा मृत्यु दर के खिलाफ उठाए कदमों को लेकर पंजाब पहले से नजरों में है. राज्य में केस फैटलिटी रेट 2.55% है जो राष्ट्रीय औसत 1.2% का दोगुना है. केस फैटलिटी रेट के मामले में राज्य के 12 जिले देश के टॉप 20 जिलों में हैं.

केंद्र सरकार में एक बड़े अधिकारी ने कहा-18 से 44 आयु वर्ग के लिए वैक्सीन की कमी को लेकर शिकायत करने के मामले में पंजाब अग्रणी रहा है. लेकिन जब उसे बीते महीने सप्लाई मिली तो 40 हजार डोज प्राइवेट अस्पतालों को डायवर्ट कर दिए गए. फ्री वैक्सीन के बजाए लोगों को 1550 रुपए अदा करने पड़ रहे हैं. राज्य वैक्सीन की कमी की एक बनावटी तस्वीर तैयार करता रहा है. 27 मई को पंजाब सरकार ने कहा 45+ वालों के लिए 86 हजार डोज ही बचे हैं जो महज एक दिन चलेंगे. इसके अलावा पीएम केयर्स फंड द्वारा भेजे गए 250 वेंटिलेटर्स का इस्तेमाल न करने को लेकर भी पंजाब सरकार से केंद्र नाराज है.

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