सितंबर से संसद का मानसून सत्र, इन 11 अध्यादेश को पारित कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती

सितंबर से संसद का मानसून सत्र, इन 11 अध्यादेश को पारित कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती
सितंबर के दूसरे सप्ताह से संसद का मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) की शुरुआत हो सकती है.

संसद के मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) में सरकार के लिए 11 अहम अध्यादेशों (Ordinances) को इसी सत्र में पारित कराना बेहद जरूरी है. इनमें सबसे अहम अध्यादेश संसदीय कार्य मंत्रालय से जुड़ा मंत्रियों का वेतन और भत्ते (संशोधन) अध्यादेश है. ये अध्यादेश 9 अप्रैल, 2020 को जारी किया गया. ये अध्यादेश मंत्रियों का वेतन और भत्ते एक्ट, 1952 में संशोधन करता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2020, 12:35 PM IST
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नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) का संकट और प्रकोप लगातार बढ़ रहा है. अब तक देश में कोरोना के 33.87 लाख कंफर्म केस आ चुके हैं, लेकिन देश पूरी तरह अनलॉक हो चुका है. इस बीच केंद्र सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि अगले महीने के दूसरे सप्ताह से संसद के मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) की शुरुआत हो सकती है. हालांकि, अभी तक इसका औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है.

विपक्ष के कुछ सांसद मांग कर रहे हैं कि इस बार वर्चुअल तरीके से संसद चलाई जाए. इस बीच सरकार के सामने 11 अहम अध्यादेशों को इसी सत्र में पारित कराना बेहद जरूरी है. इनमें सबसे अहम अध्यादेश संसदीय कार्य मंत्रालय से जुड़ा मंत्रियों का वेतन और भत्ते (संशोधन) अध्यादेश है. ये अध्यादेश 9 अप्रैल, 2020 को जारी किया गया. ये अध्यादेश मंत्रियों का वेतन और भत्ते एक्ट, 1952 में संशोधन करता है.

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इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय के महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, स्वास्थ्य मंत्रालय के होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश 2020, सरकार ने वित्त मंत्रालय के टैक्सेशन और अन्य कानून (विभिन्न प्रावधानों में राहत) अध्यादेश, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश, 2020. ये सभी बहुत महत्वपूर्ण अध्यादेश हैं जिन्हें इसी साल कैबिनेट ने मंजूरी दी है.
वहीं, उपभोक्ता मामले एवं खाद्य वितरण मंत्रालय का अनिवार्य वस्तुएं (संशोधन) अध्यादेश, 2020 है, जिसे पांच जून 2020 को जारी किया गया था. उक्त अध्यादेश अनिवार्य वस्तुएं एक्ट 1955 में संशोधन करता है. सरकार ने वित्त मंत्रालय के टैक्सेशन और अन्य कानून (विभिन्न प्रावधानों में राहत) अध्यादेश, 2020 को 31 मार्च, 2020 को जारी किया था, जिसे पारित किया जाना है. वहीं, दिवालियापन संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को छह जून को घोषित किया गया था और 26 जून को घोषित बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अध्यादेश को रखा गया है. मानसून सत्र में पारित नहीं होने पर इनमें से लगभग पांच से छह अध्यादेश समाप्त हो जाएंगे.

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, ‘उचित समय पर संसद का मानसून सत्र होगा. कोविड-19 को देखते हुए जो भी सुरक्षा के मापदंड होंगे उसे हम अपनाएंगे और समय से सत्र को चलाएंगे.’

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क्या होते हैं अध्यादेश?
अध्यादेश अस्थायी कानून हैं, जिन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर प्रख्यापित किया जाता है, जिसका संसद के अधिनियम के समान प्रभाव होगा. अध्यादेश का छह महीने का जीवन होता है और जिस दिन से सत्र शुरू होता है, उसे एक विधेयक द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए. इसे छह माह के भीतर संसद द्वारा पारित किया जाना चाहिए, नहीं तो ये समाप्त हो जाता है. (PTI इनपुट के साथ)
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