राहुल गांधी की गैरमौजूदगी में कांग्रेस की 'संकटमोचक' बनीं प्रियंका!

स्थापना दिवस के दिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बातचीत करतीं प्रियंका गांधी. (तस्वीर- प्रियंका गांधी ट्विटर)

स्थापना दिवस के दिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बातचीत करतीं प्रियंका गांधी. (तस्वीर- प्रियंका गांधी ट्विटर)

इस वक्त कांग्रेस (Congress) को एक अध्यक्ष के साथ ही एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो पार्टी की समस्याओं का समाधान भी करे. प्रियंका (Priyanka Gandhi) कुछ ऐसा ही कर रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2020, 10:49 PM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस के 146वें स्थापना दिवस के दिन एक बात सभी की निगाहों में थी और वो थी राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की गैरमौजूदगी. पार्टी के मुताबिक राहुल 'कुछ दिनों के लिए व्यक्तिगत यात्रा' पर हैं. उनकी यात्रा की खबर से कई लोगों को हैरानी और निराशा हुई. स्थापना दिवस के दिन ही कांग्रेस ने सेल्फी विद तिरंगा (Selfie with Tiranga) अभियान भी लॉन्च किया जिसका मकसद यह बताना है कि किसानों के आंदोलन को दबाने के लिए बीजेपी लोकतंत्र और संविधान का उल्लंघन कर रही है.

दिलचस्प ये है कि इस अभियान का आइडिया खुद राहुल गांधी की तरफ से ही आया था. इसलिए इस अवसर पर राहुल की गैरमौजूदगी पार्टी नेताओं के लिए निराशाजनक थी.

पहले भी छुट्टी पर जा चुके हैं राहुल गांधी

कांग्रेस की कार्यपद्धति पर हाल में किताब लिख चुके पार्टी के पूर्व प्रवक्ता संजय झा का कहना है कि राहुल चाहते तो इस नकारात्मक प्रचार से बचा जा सकता था. उन्होंने न्यूज़18 से बातचीत में कहा-ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. सार्वजनिक जीवन में धारणाएं कई बार वास्तविकता से ज्यादा अहमियत रखती हैं.
ऐसा तीसरी बार हुआ है जब राहुल गांधी ने 'ब्रेक' लिया है. और इस ब्रेक की टाइमिंग को लेकर मुद्दा बन रहा है. दरअसल इस वक्त किसान आंदोलन चल रहा है और इसके अलावा पार्टी का स्थापना दिवस भी था. दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण हैं. नाम न छापने की शर्त पर एक पार्टी नेता ने कहा कि राहुल गांधी अपनी यात्रा एक दिन के लिए टाल भी सकते थे.

प्रियंका निभा रही हैं जिम्मेदारी

खैर, राहुल की गैरमौजूदगी में कांग्रेस दफ्तर में एक और दृश्य भी सामने आया जिसने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा. प्रियंका गांधी कांग्रेस के वरिष्ठ और युवा नेताओं सहित कार्यकर्ताओं से बेहद मिलनसार अंदाज में मिल रही थीं. उन्होंने राहुल की गैरमौजूदगी के सवाल को तवज्जो नहीं दी लेकिन कृषि कानूनों को लेकर सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया.



ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब प्रियंका गांधी ने तब एंट्री ली है जब उनके भाई गैरमौजूद थे या फिर बीजेपी के साथ जबरदस्त रूप से भिड़े हुए थे. राजस्थान के राजनीतिक संकट के समय में सचिन पायलट के साथ उनके व्यक्तिगत समीकरणों की वजह से स्थितियां शांत हुईं. वहीं हाथरस कांड के समय में उन्होंने यूपी की योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा था.

पार्टी को क्राइसिस मैनेजर की जरूरत

पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ आसानी से घुलमिल जाने की प्रियंका  की स्टाइल के अलावा नेताओं को मिलने के लिए मनचाहा वक्त देना उन्हें राहुल गांधी से एक कदम आगे बढ़ाता है. अब अहमद पटेल की मृत्यु के बाद कांग्रेस को तत्काल एक क्राइसिस मैनेजर की आवश्यकता है. सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि उसके कई सहयोग दल भी पार्टी से संबंधों के लिए अहमद पटेल पर निर्भर थे. बहुत सारे लोगों का मानना है कि प्रियंका गांधी यह रोल अदा कर सकती हैं. संजय झा का कहना है- प्रियंका वाड्रा तीक्ष्ण बुद्धि की हैं, बेहतर संवाद करती हैं और स्वभाव से मिलनसार हैं.

(पल्लवी घोष की ये स्टोरी यहां क्लिक कर पूरी पढ़ी जा सकती है.)

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