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पश्चिम बंगाल चुनाव: ओवैसी-अब्बास की जोड़ी बनी ममता की मुसीबत! 100 सीटों पर बिगड़ सकता है TMC का खेल

ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में असदुद्दीन ओवैसी.
ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में असदुद्दीन ओवैसी.

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के उतरने के बाद चुनाव और भी ज्यादा दिलचस्प हो गया है. बंगाल में ओवैसी को फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी (Pirzada Abbas Siddiqui) का साथ मिल चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 4, 2021, 7:41 AM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) की सरगर्मी अभी से दिखने लगी है. इस चुनाव (Election) में भले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच सीधी टक्कर होती दिख रही है लेकिन कुछ और दल दोनों ही पार्टियों का खेल बिगाड़ने में लगे हैं. बंगाल में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के उतरने के बाद चुनाव और भी ज्यादा दिलचस्प हो गया है. बंगाल में ओवैसी को फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी (Pirzada Abbas Siddiqui) का साथ मिल चुका है. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है ओवैसी और अब्बास इस बार के चुनाव में ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं.

पिछले चुनाव पर नजर दौड़ाएं तो 31 फीसदी वोट शेयर के साथ मुस्लिम पश्चिम बंगाल में किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं. ममता बनर्जी के सत्ता में आने का पूरा श्रेय इन्हीं मुस्लिम वोटरों को जाता है. बंगाल की 294 सीटों में से 90 सीट सीधे तौर पर इन्हीं वोटरों पर केंद्रित रहती हैं. ऐसे में ओवैसी और अब्बास के एक साथ आ जाने के बाद ये वोटर किस तरफ जाएंगे अब कोई अनुमान नहीं लगा सकता है. हालांकि जानकारों का कहना है कि इस जोड़ी के एक साथ मैदान में उतरने से ममता की वोट बैंक में सेंध जरूर लग गई है.


एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद ओवैसी काफी उत्साहित दिखे. उन्होंने कहा कि अब्बास सिद्दीकी का हमें पूरी तरह से समर्थन हासिल है. चुनाव को लेकर वो आगे जो भी फैसला करेंगे हमें मंजूर होगा. बता दें कि बंगाल के हुगली जिले में फुरफुरा शरीफ विख्यात दरगाह है. दक्षिण बंगाल में इस दरगाह का विशेष दखल है. लेफ्ट फ्रंट सरकार के दौरान इसी दरगाह की मदद से ममता ने सिंगूर और नंदीग्राम जैसे दो बड़े आंदोलन किए थे.



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CAA और NRC है बड़ा मुद्दा
बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) एक बड़ा मुद्दा है जो मुसलमानों को एकजुट कर सकता है. राज्य के माल्दा, मुर्शिदाबाद, दक्षिण दिनाजपुर, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना जैसे जिले मुस्लिम बहुल हैं. इन पांचों जिलों में 60 से ज्यादा विधानसभा सीटे हैं. दक्षिण 24 परगना को छोड़कर बाकी सभी जिले बिहार की सीमा पर हैं. बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को पांच सीटें मिलने का संदेश इन जिलों में आसानी से पहुंच गया होगा.

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TMCके शासन में अब तक चुने गए 59 मुस्लिम विधायक
टीएमसी के शासन में 2011 और 2016 में 59 मुस्लिम विधायक चुने गए. 2006 में जब लेफ्ट फ्रंट ने एकतरफा चुनाव जीता था तब 46 मुस्लिम चुनकर विधानसभा पहुंचे थे. टीएमसी को 2019 के लोकसभा चुनाव में इन 98 सीटों पर बढ़त मिली थी और उसे करीब 47 प्रतिशत वोट मिले थे। इन 130 में से 74 सीटों पर मुस्लिम आबादी 40 से 90 प्रतिशत तक है. इन 74 में से 60 पर तृणमूल ने 48 प्रतिशत वोट पाकर बढ़त हासिल की. एआईएमआईएम इन्हीं सीटों पर वोट बंटवारा कर ममता बनर्जी की राह मुश्किल कर सकती है.
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