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ओवैसी ने लगाया आरोप, कांग्रेस के दौर में ही 'शहीद' हुई थी बाबरी मस्जिद

News18Hindi
Updated: October 18, 2019, 1:54 PM IST
ओवैसी ने लगाया आरोप, कांग्रेस के दौर में ही 'शहीद' हुई थी बाबरी मस्जिद
ओवैसी ने लगाया आरोप, कांग्रेस के दौर में ही शहीद हुई थी बाबरी मस्जिद

असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अरोप लगाया है कि 1986 में जब बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के ताले खोले गए थे तब सरकार किसकी थी. ओवैसी ने कहा कि उस वक्त सरकार कांग्रेस की थी.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 1:54 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अध्‍यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ (Constitution Bench) ने दशकों पुराने अयोध्या जमीन विवाद (Ayodhya Land Dispute) पर सुनवाई पूरी कर ली है. शीर्ष अदालत में 40 दिनों तक चली दूसरी सबसे लंबी सुनवाई के बाद संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया. इस मामले में 17 नवंबर से पहले फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है. इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने भी अयोध्या मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी. ओवैसी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के दौर में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) शहीद हुई थी. उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि फैसला ऐसा आए, जिससे कानून के हाथ मजबूत हों. बाबरी मस्जिद को गिराया जाना कानून का मजाक था.'

महाराष्ट्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का एक वीडियो पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया गया है. इस वीडियो में ओवैसी अयोध्या मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में ओवैसी ने कहा है कि मुझे नहीं पता क्या फैसला आएगा, लेकिन मैं चाहता हूं फैसला ऐसा आए जिससे कानून के हाथ मजबूत हों. बाबरी मस्जिद को गिराया जाना कानून का मजाक था.


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असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि 1986 में जब बाबरी मस्जिद के ताले खोले गए थे तब सरकार किसकी थी. ओवैसी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस वक्त सरकार कांग्रेस की थी. उन्होंने कहा कि उस वक्त होम मिनिस्टर कौन था जब बाबरी मस्जिद शहीद हुई. अवैसी ने कहा कि दुआ करें कि इस फैसले से इंसाफ को कायम होने का मौका मिले.

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40 दिन तक चली सुनवाई
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर छह अगस्त से रोजाना 40 दिन तक सुनवाई की. इस दौरान विभिन्न पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं. संविधान पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया. संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनन्जय वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं.

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First published: October 18, 2019, 1:54 PM IST
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